चातुर्मास के दिव्य ज्ञान-विज्ञान को हृदयंगम करें देश के सनातनी युवा
October 18, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Copy
    • Subscribe & Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Copy
    • Subscribe & Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

चातुर्मास के दिव्य ज्ञान-विज्ञान को हृदयंगम करें देश के सनातनी युवा

सनातन हिन्दू धर्म की सबसे बड़ी विशेषता इसमें श्रद्धा और तर्क दोनों का अद्भुत समन्वय है।

Written byपूनम नेगीपूनम नेगी
Jul 6, 2025, 10:22 am IST
inभारत

सनातन हिन्दू धर्म की सबसे बड़ी विशेषता इसमें श्रद्धा और तर्क दोनों का अद्भुत समन्वय है। इस सनातनी ज्ञान-विज्ञान को जांचने-परखने और अनुभव करने का सर्वाधिक फलदायी साधनाकाल है ‘चातुर्मास’ यानी वर्षाकाल के चार महीने। मन और जीवन को श्रेष्ठ व उन्नत बनाने वाले चातुर्मास के नियम वैज्ञानिकता से भी जुड़े हैं। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी से कार्तिक माह की देवोत्थानी एकादशी तक की चार महीनों की इस अवधि का सनातन हिन्दू संस्कृति में विशिष्ट आध्यात्मिक महत्व तो है ही; संयम, मौन और सहिष्णुता की सीख देने वाली यह विशेष कालावधि सांस्कृतिक और व्यावहारिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

वैदिक मान्यता के अनुसार सृष्टि के संचालक श्रीहरि विष्णु के इस चार मासीय योगनिद्रा काल की अवधि में सृष्टि संचालन का दायित्व देवाधिदेव महादेव स्वयं अपने कन्धों पर उठाते हैं। इसी कारण चौमासे में विशेष रूप से महाधिदेव के जलाभिषेक की परम्परा है। श्रावण माह में देश भर में निकलने वाली कांवड़ यात्राएं हमारी इसी सांस्कृतिक संचेतना का पर्याय मानी जाती हैं। यह अवधि इस वर्ष 6 जुलाई से शुरू होकर 2 नवंबर तक रहेगी। देश की युवा पीढ़ी को सनातन ज्ञानतंत्र की इस अनूठी वैज्ञानिकता को आधुनिक सन्दर्भों में कहीं अधिक गहराई व बारीकी से समझने व आत्मसात करने की जरूरत है।

स्व से समष्टि की यात्रा कराता है चातुर्मास : पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य

गायत्री महाविद्या के महामनीषी पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य चातुर्मास की महत्ता पर प्रबोधित करते हुए कहते हैं,’’ परम प्रभु का योगनिद्रा काल मनुष्य के दैविक जीवन में ही नहीं, दैहिक जीवन भी दिव्य जागृति लेकर आता है। इस चार मासीय योगनिद्रा काल में मानव खुद की अंतर्यात्रा कर स्व से समष्टि की ओर बढ़ सकता है। प्रतिवर्ष चार माह की यह कैवल्य अवधि आंतरिक प्रकृति की शुद्धि द्वारा बाहरी प्रकृति व पर्यावरण की शुद्धि हेतु स्वयं को समर्पित करने का सुअवसर प्रदान करती है। जीवन का एक-एक क्षण मूल्यवान है। जो क्षण चला गया, वह कभी लौटकर नहीं आता और आने वाला क्षण हमारे हाथ में नहीं है, इसलिए वर्तमान क्षण का सर्वोत्तम सदुपयोग कर उसे सार्थक बनाना, यही हमारे वश में है। जीवन में सेवा के बीजों को अंकुरित, पल्लवित व पुष्पित होने दें। इससे स्वयं का जीवन तो उमंग व तरंग से खिल उठेगा ही, औरों के जीवन में भी उल्लास का संचार होगा। चातुर्मास आध्यात्मिक जागरण के साथ अपने मूल, मूल्य, जड़ों से जुड़ने, नूतन व श्रेष्ठ विचारों पर चितंन करने का अवसर प्रदान करता है। इस समय का सर्वश्रेष्ठ सदुपयोग कर हम अतीत का मंथन, वर्तमान में जीवन और भविष्य का चितंन कर नवजीवन की ओर आगे बढ़ सकते हैं।

जब हम एकांत में होते हैं तो वह समय दुनिया को समझने, सही और गलत के बीच निर्णय लेने में हमारी मदद करता है। यदि आज के युवा चातुर्मास के इस महत्व को जान लें, तो उन्हें अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने में अत्यधिक मदद मिलेगी। उनके ज्ञान और रचनात्मकता को बढ़ाने में भी उनकी सहायता होगी। हमारा जीवन हमारे निर्णयों का ही तो परिणाम होता है, इसलिए उसे श्रेष्ठ बनाने के लिए हमें उन सनातन वैदिक परंपराओं को आत्मसात करना होगा, जिन्हें हमारे ऋषियों ने बड़े ही शोध, वैज्ञानिकता और आध्यात्मिक ज्ञान के आधार पर तैयार किया था। चातुर्मास का समय उसी शोध का दिव्य उदाहरण है, जिसका प्रयोग कर हम जीवन में सत्य, अहिंसा और अनुशासन सीख सकते हैं। नैतिकता, मूल्यों और श्रेष्ठ गुणों से समृद्ध जीवन का निर्माण कर एक श्रेष्ठ समाज और जिम्मेदार नागरिकों का निर्माण कर सकते हैं।

‘इंटरनेट’ के साथ ‘इनरनेट’ से जुड़ने की जरूरत : चिदानंद मुनि

इसी क्रम में परमार्थ निकेतन के प्रमुख चिदानंद मुनि राष्ट्र की युवा शक्ति का आह्वान कहते हुए कहते हैं कि तनाव, विग्रह, क्रोध व क्रूरता से भरे आज के समाज में जब मामूली सी कहासुनी से शुरू हुए झगड़े में जान तक ले लेने की खबरें आम हो गयी हैं। आपसी विश्वास और संवेदना के छीजने से मानवीय रिश्ते तार-तार हो रहे हैं। उचित मार्गदर्शन और सुसंस्कारों के अभाव में नयी पीढ़ी नशाखोरी के दुर्व्यसनों और अपराधों के चंगुल में फंसती जा रही है। किन्तु कहते हैं न कि जब जागो तभी सवेरा। वर्तमान समय में युवाओं को इंटरनेट के साथ इनरनेट से जुड़ने की भी जरूरत है और इनरनेट से जुड़ने का सबसे श्रेष्ठ माध्यम है चातुर्मास। परम प्रभु श्रीहरि का यह योगनिद्रा काल अंतस में प्रवेश की दिव्य यात्रा है। यह वह अवसर है हम संयम और साधना के द्वारा मन के वैचारिक अंधकार को दूर कर सर्वत्र सद्ज्ञान का उजास फैला सकते हैं।

इसके लिए अतंस को, आंतरिक अंधकार को दूर करने के लिए भीतर ज्ञान का दीप जलाना जरूरी है। किन्तु; जब हम भीतर के प्रकाश को खोजने निकलें तो भीतर की कुविचारों की जंक फाइल्स को डिलीट करते चलें, भीतर पड़ी धूल को हटाएं, भीतर सद्गुणों का रंग-रोगन करें, ताकि चैतन्य जाग्रत हो, ज्ञान के सूर्य का उदय हो। चातुर्मास में बाहरी प्रकृति में भी परिवर्तन होता है। बाहर तो प्रकाशमान ऊर्जा व्याप्त है, लेकिन हम अपने भीतर कैवल्य का नन्हा-सा दीप प्रज्वलित कर लें; जो भेदभाव की सारी दीवारों को मिटा दे, दरारों को भर दे और सभी के दिलों में भी प्रेम व सद्भाव के दीप जला दे तो हमारा अंतर्मन प्रकाशित हो उठेगा। अपने विचारों से, व्यवहार से, दृष्टिकोण से हमने अपने जिस आंतरिक प्रकाश को ढक रखा है, हमें उसे हटाना है। जिस प्रकार सूर्य बाहर चमकता रहता है, लेकिन यदि हम अपने घर की खिड़कियां न खोलें और पर्दे से पूर्णतया ढक दें तो घर में प्रकाश नहीं आएगा, सदैव घर के अंदर अंधकार ही रहेगा। अर्थात यदि हमें प्रकाश चाहिए तो घर की खिड़कियों को खोलना ही होगा, पर्दों को हटाना ही होगा। तब प्रकाश स्वतः ही हमारे घर में प्रवेश कर लेगा। इसी प्रकार जब हम अपने विचार, व्यवहार और सोच पर से रूढ़ियों, आकांक्षाओं और ईर्ष्या के पर्दे हटा देंगे तो फिर हमारी चेतना, हमारा अंत:करण स्वतः ही आलोकित हो उठेगा।

प्रकृति के संरक्षण व संवर्धन की सीख

चातुर्मास के दौरान धरती पर अनगिनत जीव, नन्हे पौधे और वनस्पतियां विकसित होती हैं। यह कितनी सुन्दर बात है कि हमारी संस्कृति में पेड़-पौधों में भी जीवन और संवेदना का वास माना गया है। यही बात अब वैज्ञानिक शोध में भी साबित हो चुकी है। यही कारण है पर्यावरण को सहेजने का भाव हमारी सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा है। चातुर्मास में तुलसी, पीपल सींचने और अक्षय नवमी को आंवले के वृक्ष की पूजा की भी परंपरा है। इस परंपरा को हम प्रकृति और परमात्मा के प्रेम का प्रतीक भी मान सकते हैं। कोरोना विपदा के बाद हम पीपल, तुलसी, आंवला जैसे औषधीय और जीवनरक्षक पौधों की पूजा के मायने समझने लगे हैं। यह प्रकृति पूजन कहीं न कहीं स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का ही संदेश देता है। प्राणवायु देने वाले- तुलसी, आंवला और पीपल के पौधों को संरक्षित रखने की बात भी चातुर्मास के नियमों का हिस्सा है। यह किसी अंधविश्वास से नहीं, बल्कि पूरी तरह वैज्ञानिक और जनकल्याण के भाव से जुड़े हैं। आज के समय में जब हमें अपनी परंपराओं को जीवित रखने की जरूरत है, वैज्ञानिकता के साथ बनाये गये चातुर्मास के ये नियम सेहत, संयम और संस्कृति के सच्चे वाहक हैं।

चातुर्मास काल का अनूठा आहार विज्ञान

वैदिक साहित्य में भगवान विष्णु के नाम ‘सूर्य’, ‘अग्नि’ और ‘हरि’ भी हैं। हरिशयनी एकादशी से हरि के योगनिद्रा में जाने के पीछे का मूल भाव प्रकृति में अग्नि तत्व की न्यूनता और जल तत्व की अधिकता को दर्शाता है। भारतीय आयुर्वेद के मनीषियों के अनुसार सूर्य या अग्नि तत्व पोषण की दृष्टि से अति महत्वपूर्ण होते हैं तथा वर्षाकाल में प्रकृति के सापेक्ष शरीर की जठराग्नि मन्द पड़ जाने से पाचन शक्ति कमजोर हो जाने से उदर व संक्रामक रोगों का प्रसार होने लगता है। मौसम में सूर्य के ताप में धीरे धीरे कमी और बरसात के साथ प्रकृति में जल तत्व की अधिकता से नमी या सीलन के कारण प्रतिरोधक क्षमता में कमी के चलते संक्रामक रोगाणुओं को पनपने का वातावरण मिल जाता है। अतः कमजोर पाचन के साथ त्वचा पर फोड़े-फुंसियां, घमौरी के अलावा सर्दी, जुखाम, बुखार आदि रोग बढ़ने लगते हैं। बरसात के कारण जगह जगह दूषित पानी व गन्दगी जमा होने से मक्खी, मच्छर या अन्य कीड़े मकोड़े के द्वारा होने वाले जैसे मलेरिया, टायफायड, चिकनगुनिया, डेंगू, ज्वर, पीलिया आदि में भी वृद्धि हो जाती है। प्रतीत होता है कि हमारे वैदिक मनीषी वर्षाकाल में पनपने वाली इन व्याधियों से भली भांति परिचित थे; तभी तो उन्होंने इन रोगों से बचाव के जो नियम सदियों पहले बनाये थे, उनकी प्रासंगिकता आज भी जस की तस है। हमारे स्वास्थ्य विज्ञानियों की वर्षा ऋतु में देर से पचने वाले गरिष्ठ मसालेदार तैलीय व बासी भोजन, मांसाहार, बहुत ठंडे पेय के सेवन से बचने, दूध, दही व साग से परहेज करने तथा सादा सात्विक आहार लेने की सलाह को अब आधुनिक एलोपैथिक चिकित्सक भी उचित मान रहे हैं ताकि जीवनी शक्ति और मस्तिष्क की क्रिया में सन्तुलन बना रहे।

Topics: ekadashi 2025सनातन धर्मकांवड़ यात्रासनातन संस्कृतिहिन्दू धर्मदेवशयनी एकादशीदेवोत्थानी एकादशीdevshayani ekadashi vrat kathaekadashi vrat katha
Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

‘छत्रपति संवाद : मुंबई संकल्प’ : ‘मोबाइल चलाएं, उसकी गिरफ्त में न आएं’

काशी में चाचा का पिंडदान करते अमेरिकी नागरिक जैक्सन।

अमेरिका के जैक्सन ने काशी में किया चाचा का पिंडदान, आत्मा की मोक्ष कामना के लिए पहुंचे भारत

अलाउद्दीन ने अपनाया सनातन धर्म

Ghar Wapsi: अलाउद्दीन ने अपनाया सनातन धर्म, जनेऊ धारण कर बने अखिलेश

स्वामी विवेकानंद

9/11 : स्वामी विवेकानंद और सनातन का विश्वघोष

मुस्लिम लड़की ने सनातन धर्म अपनाकर हिंदू लड़के से शादी की

मुस्लिम युवती ने अपनाया सनातन धर्म, हिंदू युवक से रचाई शादी; अब परिजनों से जान का खतरा

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा

‘राष्ट्र निर्माण के यज्ञ में सतत आहुति दे रहा पाञ्चजन्य’

Load More

ताज़ा समाचार

सीजेपी का विरोध प्रदर्शन (फाइल फोटो)

दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन से 10 दिनों में व्यापारियों को 4 हजार करोड़ के नुकसान का अनुमान

पी चिदंबरम का बड़ा आरोप: चुनाव आयोग ने 17 राज्यों में SIR छोड़ दिया, 13.3 करोड़ नाम हटाए गए

Kolkata Durga Puja Stampede reason

Explainer: कोलकाता दुर्गा पूजा पंडाल भगदड़: क्या थी वजह और कैसे बचें इस तरह की दुर्घटना से?

Hijab Controversy

अजरबैजान और ईरान: लड़कियों द्वारा हिजाब पर बवाल, क्या राजनीतिक इस्लाम और स्थानीय संस्कृति के बीच टकराव?

Goa CJP Protest

गोवा पुलिस ने CJP प्रदर्शन में 300 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की, हिंदू भावनाओं को ठेस पहुँचाने का आरोप

JNU में विजयादशमी उत्सव के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का पथ संचलन

प्रतीकात्मक चित्र

नैनीताल पुलिस ने साइबर क्राइम हॉटस्पॉट के खिलाफ एक दिन में 43 FIR दर्ज किए, कुल 49 अभियोग

US Nidal Hassan Fansi

निदाल हसन की मौत की सजा का सीधा प्रसारण: पेंटागन का प्रस्ताव और ट्रंप का फैसला क्यों बदला?

प्रतीकात्मक तस्वीर

रिपोर्टर्स कलेक्टिव रिपोर्ट: इन्वेस्टिगेशन या राजनीतिक अभियान? तथ्यों की चयनात्मक और पूर्वाग्रही सोच

Kolkata Durga Puja Stampade

कोलकाता दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़: 12 लोग हिरासत में लिए गए, जांच के लिए एसआईटी गठित

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies