पाञ्चजन्य हमेशा से भारत की राष्ट्रीय चेतना, सांस्कृतिक मूल्यों और राष्ट्रीय विचारधारा की सशक्त आवाज रहा है। हम पहले विद्यार्थी परिषद में काम करते थे। उस समय पाञ्चजन्य हर जगह घर तक नहीं पहुंचता था। कहीं किसी संस्थान में मिलता था, कहीं किसी कार्यालय में। जब पाञ्चजन्य मिल जाता था तो उसे पढ़ने की इच्छा होती थी। जितना समय मिलता, वहीं पढ़ते थे।
किसी विषय की अनुभूति तीन प्रकार से होती है, देखकर, पढ़कर और सुनकर। मेरे राष्ट्र के कर्णधार युवाओं, मैं आपसे कहना चाहता हूं कि राष्ट्र के प्रति हमारे विचार और हमारी संस्कृति हमें ऐसे ही नहीं मिली है। यह हमारे पूर्वजों की धरती है। दुनिया में दूसरा कोई राष्ट्र आपको ऐसा नहीं मिलेगा। निश्चित रूप से उस विचारधारा की सशक्त आवाज पाञ्चजन्य है और वह लगातार 1948 से इस यात्रा को आगे बढ़ाने का काम कर रहा है।
पाञ्चजन्य के मार्गदर्शक पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने भारतीय चिंतन को एकात्म मानववाद का दर्शन दिया। उन्होंने राष्ट्र को मजबूत करने और आगे बढ़ाने की जो परिकल्पना दी, उसमें अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति का कल्याण महत्वपूर्ण था। जब तक अंतिम व्यक्ति को लाभ नहीं मिलेगा, जब तक वह आर्थिक रूप से सशक्त नहीं होगा, तब तक राष्ट्र आगे नहीं बढ़ सकता। निश्चित रूप से पाञ्चजन्य ने हमेशा अंतिम पंक्ति के व्यक्ति को आगे लाने के लिए काम किया है।
मित्रों, 1948 में पाञ्चजन्य के साप्ताहिक प्रकाशन की शुरुआत श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के संपादन में हुई। श्रद्धेय अटल जी के संपादन में प्रारंभ में पाञ्चजन्य भारतीय संस्कृति के आदर्शों का स्मरण दिलाने के संकल्प के साथ आगे बढ़ा। पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी की जयंती हर साल 25 दिसंबर को मनाई जाती है और उसे सुशासन दिवस के रूप में मनाया जाता है। हमारे पूर्वजों और मनीषियों ने जिस कल्पना के साथ इस राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया था, उनके उन विचारों को आगे बढ़ाने का काम हम कैसे कर सकते हैं, यह भी हमारे सामने एक महत्वपूर्ण प्रश्न है।
हमारी संस्कृति कर्तव्य प्रधान
हमारी सांस्कृतिक विरासत ऐसी है कि दुनिया के देश यहां आते हैं। जिन लोगों ने हमारी संस्कृति को बदलना चाहा, वे खुद सिमटकर रह गए, लेकिन हमारी संस्कृति में कोई अंतर नहीं डाल सके। यही भारत की आत्मा है। भारत की सनातन संस्कृति हमारे पूर्वजों की धरोहर है। परिवार में एक-दूसरे से प्रेम, परस्पर संबंध और कर्तव्य की भावना इसी संस्कृति से आती है। लंबे समय तक राष्ट्र में कभी अधिकारों की बात प्रमुख नहीं थी। अगर यह राष्ट्र चला तो कर्तव्य के माध्यम से चला, कर्तव्यों से चला। कर्तव्य में ही हमारे अधिकार समाहित होते थे। आज स्थिति बदल गई है। आज बेटी पिता से पूछती है कि मेरा अधिकार क्या है, पत्नी पूछती है कि मेरा अधिकार क्या है। जो भी पूछता है, वह पूछता है कि मेरा अधिकार क्या है, लेकिन कोई यह नहीं पूछता कि मेरा कर्तव्य क्या है। हमारी संस्कृति कर्तव्य को ध्यान में लाती है।
राजधर्म का अंतिम उद्देश्य लोककल्याण
सुशासन केवल सरकार चलाने की व्यवस्था नहीं, बल्कि जनता के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का माध्यम भी है। मेरे विचार से सुशासन का अर्थ नीति में नीयत, प्रशासन में पारदर्शिता, निर्णय में गति, व्यवस्था में जवाबदेही और शासन में सामान्य नागरिक की भागीदारी है। महाभारत ने राजधर्म का अंतिम उद्देश्य लोककल्याण बताया था। आज भारत आत्मविश्वास के साथ सुशासन की राह पर बढ़ रहा है। आज भारत दुनिया की पांच प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। पिछले 12 वर्षों में जिस तरह से परिवर्तन हुआ है, वह बहुत बड़ा परिवर्तन है। मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों से घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिला। जीएसटी जैसे बड़े कर सुधार ने देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी। सांस्कृतिक गौरव के रूप में अयोध्या में भव्य राम मंदिर बन चुका है। अनुच्छेद 370 समाप्त कर जम्मू-कश्मीर के विशेष संवैधानिक दर्जे को समाप्त कर दिया गया। यूपीआई से भुगतान हो या मिशन चंद्रयान, दुनिया भारत की वैज्ञानिक क्षमता को देख चुकी है।
घर में घुसकर मारता है भारत
हम सभी ने ऑपरेशन सिंदूर के रूप में देखा कि आज भारत की सेनाएं दुश्मन को हराती ही नहीं हैं, बल्कि घर में घुसकर मारने का काम भी हमारी सेना करती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने देश को सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास का मंत्र दिया है। निश्चित रूप से यह जन से जोड़ता है। राजस्थान की सरकार इसी मंत्र को धरातल पर उतारते हुए काम कर रही है। हमने शासन को तकनीकी आधारित, संवेदनशील और पारदर्शी बनाया है।
ग्रामीण राजस्थान से सीधा संवाद
सरकार और जनता के बीच दूरी कम करने के लिए हमने ‘ग्राम विकास रथ अभियान’ के रूप में एक बड़ा कदम उठाया। 14,000 से अधिक ग्राम पंचायतों में हमारे रथ गए हैं और करीब 3,80,000 किलोमीटर की यात्रा कर ग्रामीण राजस्थान से सीधा संवाद स्थापित किया है। हमने इसके लिए एक ऐप भी बनाया है। इसके माध्यम से ग्राम विकास और वार्ड विकास की कल्पना की गई है। आने वाले पांच वर्षों में क्या आवश्यकताएं होंगी, 10, 15 और 20 वर्षों में क्या-क्या आवश्यकताएं होंगी, इन्हीं आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विकास का रोडमैप तैयार किया जा रहा है।
रोजगार के लिए कर रहे काम
राजस्थान ऐसा क्षेत्र है जहां बड़ी संख्या में खनिज निकलते हैं। सोलर के लिए राजस्थान में बहुत बड़ा काम है। राजस्थान में हैंडीक्राफ्ट का बहुत बड़ा काम है। टेक्सटाइल के रूप में भी बहुत बड़ा काम है। अलग-अलग क्षेत्रों में कुछ न कुछ बनता है। कहीं मूर्तियां बनती हैं, कहीं हैंडीक्राफ्ट का सामान बनता है, कहीं चूड़े और चूड़ियां बनती हैं, कहीं जूते बनते हैं। कहीं जीरा उत्पादन होता है, कहीं ईसबगोल और कहीं सौंफ होती है। हमने कहा कि इन सारी चीजों की प्रोसेसिंग यूनिट राजस्थान में कम हैं। इन प्रोसेसिंग यूनिट के माध्यम से युवाओं को उनके क्षेत्र में ही रोजगार कैसे दिया जा सकता है, जिले में रोजगार कैसे मिल सकता है, इसके लिए लगातार काम किया जा रहा है।
राजस्थान में ऐसे लोगों को लाने का प्रयास किया जा रहा है जो यहां आकर प्रोसेसिंग यूनिट लगा सकें। इसके लिए कलेक्शन सेंटर, प्रोसेसिंग, मार्केट हब और गोदाम जैसी पूरी शृंखला विकसित करने की जरूरत है। इससे राजस्थान आगे बढ़ेगा।
दूसरे प्रदेशों को दे रहे बिजली
ढाई साल के अंदर हमने 12,000 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया है। कांग्रेस ने पांच साल में मात्र 3,900 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया था। राजस्थान लंबे समय से बिजली खरीदता रहा था, लेकिन पिछले चार महीने से राजस्थान दूसरे प्रदेशों को बिजली देने का काम कर रहा है। हमारे पास अतिरिक्त बिजली है, जिसे हम दूसरे प्रदेशों को दे रहे हैं। जो 400 केवी के ट्रांसफार्मर 15 साल पहले बन जाने चाहिए थे, आज हमारी सरकार उन्हें बना रही है। एक हनुमानगढ़ में,बन रहा है, एक उदयपुर में और एक कुमेर में बन रहा है। ये छह महीने में तैयार हो जाएंगे, हम उद्योगों को, उपभोग्ताओं को 24 घंटे और किसानों को दिन में बिजली देंगे। बिजली की कोई कमी नहीं आएगी।
नौकरी देने वाले बनें युवा
मेरे युवा साथियों, मैं आपसे एक अनुरोध जरूर करना चाहता हूं कि राजस्थान में बहुत पोटेंशियल है। राजस्थान में खनिज निकलते हैं, पर्यटन की दृष्टि से प्रदेश मजबूत है, सूर्य भगवान की हमारे ऊपर कृपा है और सौर ऊर्जा के क्षेत्र में हम देश में पहले नंबर पर हैं। जमीन की हमारे पास कमी नहीं है। आप स्टार्टअप और स्किल के माध्यम से स्वयं का कारोबार करें। आप नौकरी लेने वाले नहीं, नौकरी देने वाले बनें। आप जहां पहुंचना चाहते हैं, हमारी सरकार पहली सीढ़ी से वहां तक पहुंचने में पूरी तरह मदद करेगी। इसीलिए हम युवा नीति लेकर आए हैं। युवा नीति में हमने स्पष्ट किया है कि युवा अपना प्रोजेक्ट बनाकर दे। वह प्रोजेक्ट बनाकर देगा तो 50 लाख रुपए से लेकर एक करोड़ रुपये तक का ऋण हम देंगे, वह भी बिना ब्याज के। अगर दो-तीन-चार लोग मिलकर काम करते हैं और उसकी लागत ज्यादा आती है तो हम वह भी देंगे। पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान राजस्थान के युवाओं को पेपर लीक जैसा दंश झेलना पड़ा। पेपर लीक के दोषियों को जेल में पहुंचाने का काम हमारी सरकार ने किया है। गरीब कल्याण के काम भी लगातार किए जा रहे हैं।
सामाजिक सुरक्षा पेंशन को बढ़ाकर हमने 1,450 रुपये कर दिया है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 4,40,000 से अधिक आवास बनाए गए हैं। जरूरतमंदों को 450 रुपये में गैस सिलेंडर देने का काम हम कर रहे हैं। हमारी बेटियों के लिए 14 लाख साइकिल वितरित की गई हैं। 400 मेधावी छात्राओं को स्कूटी वितरित की गई हैं। शिक्षा और चिकित्सा दोनों निःशुल्क हैं। गर्भवती बहनों के लिए मां बहुचर योजना के माध्यम से काम किया जा रहा है। हम जानते हैं कि ग्रामीण क्षेत्र में माताओं-बहनों को किस तरह की परेशानी होती है।
आर्थिक संकट के कारण यदि वे दो-चार दिन इलाज में देर कर देती हैं तो बीमारी बढ़ जाती है। इसलिए मां बहुचर योजना के माध्यम से ऐसी महिलाओं को निःशुल्क सोनोग्राफी, निःशुल्क दवा और निःशुल्क जांच की सुविधा देने का काम किया जा रहा है। इसके लिए 4,82,000 से अधिक कूपन जारी किए जा चुके हैं। राजस्थान में लगभग 19 लाख लखपति दीदी बन चुकी हैं और उनकी संख्या लगातार बढ़ रही है। उनके जीवन में बदलाव को देखकर कई बातों का अनुभव होता है। जब हमारी माताएं-बहनें दिन-रात मेहनत करके अपना जीवन बदल रही हैं तो आप युवा भी आगे बढ़ सकते हैं।
संस्कारों को संजोकर रखें
हमारे माता-पिता, दादाजी, परिवार और गुरुजनों से जो संस्कार मिले हैं, हमें उन्हें किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ना है। हमें उनसे मिले संस्कारों को आगे भी संजोकर रखना चाहिए। आपके कई साथी ऐसे होंगे जो आपके संस्कारों को इधर-उधर करने की चेष्टा करेंगे। ऐसे लोगों से भी हमें सावधान रहना है। उनको अपने में समाहित करना है, उनके साथ समाहित नहीं होना है, ताकि हमारी संस्कृति ठीक प्रकार से आगे बढ़े और दुनिया में हमारा नाम रोशन करे। इसमें सरकार के साथ समाज, मीडिया, नागरिक संगठन और युवाओं सहित प्रत्येक नागरिक की भूमिका बहुत आवश्यक है। ऐसे में पाञ्चजन्य जैसे मंचों का महत्व और बढ़ जाता है, क्योंकि लोकतंत्र में स्वस्थ संवाद शासन को अधिक उत्तरदायी और समाज को अधिक जागरूक बनाता है।
आज जब भारत विकसित भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है, तब पत्रकारिता की भूमिका और भी बढ़ जाती है। मैं देखता हूं कि कई पत्रकार इतनी सटीक बात कहते हैं। पत्र-पत्रिकाओं में जो आलेख आते हैं, उन्हें भी हम अपने जीवन में ढालने का काम करें। हमें प्रतिदिन पढ़ना चाहिए। वे हमारे जीवन को बहुत सुगम बना सकते हैं। आज पत्रकारिता के सामने सूचना देने के साथ ही राष्ट्रहित और निजी हित के बीच अंतर स्पष्ट करने की भी चुनौती है। मुझे विश्वास है कि पाञ्चजन्य अपनी राष्ट्र प्रथम की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए भारत की सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय विमर्श को और मजबूत करेगा। इसी संकल्प के साथ मैं पाञ्चजन्य को इस सुशासन संवाद के लिए बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं देता हूं।

















