जेपी नड्डा ने चुनाव आयोग का बचाव किया, राहुल गांधी और विपक्ष पर निशाना साधानई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने सोमवार को चुनाव आयोग से जुड़े एसआईआर विवाद पर विपक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि झूठ को सौ बार दोहराने से वह सच नहीं बन जाता। नड्डा ने आरोप लगाया कि विपक्ष बार-बार आरोप लगा रहा है, जबकि चुनाव आयोग जवाब दे चुका है।
नड्डा का बयान
नड्डा ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “राहुल गांधी, ध्यान से सुनो—झूठ को सौ बार दोहराने से वह सच नहीं बन जाता। सच को हराया नहीं जा सकता।” उन्होंने अरविंद केजरीवाल, अखिलेश यादव और ममता बनर्जी का भी नाम लिया। नड्डा का कहना था कि इन नेताओं का एकमात्र एजेंडा देश के स्वायत्त और संवैधानिक संस्थानों को बदनाम करना और कमजोर करना बन गया है।
उन्होंने कहा कि यह वही ‘टूलकिट मानसिकता’ है जिसमें हर सुबह देश के विकास को रोकने की नई साजिश रची जाती है—आरोप लगाओ, माहौल बिगाड़ो और निकल जाओ। नड्डा के मुताबिक विपक्ष की यही कार्यशैली हो गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा, जनकल्याण या देश की प्रतिष्ठा से कोई मतलब नहीं। इनका मकसद सिर्फ सत्ता हासिल करना, वंशवाद को बढ़ावा देना और निजी फायदा उठाना है।
विपक्ष पर आरोप
नड्डा ने कहा कि आज देश 140 करोड़ नागरिकों के प्रयासों से विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है और भारत की आवाज दुनिया में गूंज रही है। लेकिन कांग्रेस और पूरा इंडिया गठबंधन इस प्रगति से परेशान और निराश दिख रहा है। नीति और विजन न होने के कारण वे भ्रम और अव्यवस्था फैलाने के नए तरीके खोज रहे हैं।
उन्होंने याद दिलाया कि कुछ दिन पहले एक बनावटी खबर के आधार पर पूरे देश में हंगामा खड़ा किया गया था। अब चुनाव आयोग ने उनके सारे आरोपों का जवाब देने के बाद भी वे फिर से माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। नड्डा ने कहा कि राहुल गांधी और केजरीवाल आरोप लगाकर चले जाते हैं, उनका जनहित से कोई लेना-देना नहीं। उन्होंने बीजेपी का रुख बताते हुए कहा कि उनके लिए सत्ता 140 करोड़ लोगों के हित में काम करने का साधन है।
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एसआईआर विवाद की पृष्ठभूमि
यह राजनीतिक विवाद चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) को लेकर खड़ा हुआ है। राहुल गांधी ने पहले आरोप लगाया था कि 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव ‘रिजिड’ थे। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तुरंत इस्तीफे की मांग की थी। उन्होंने एक न्यूज चैनल की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा था कि कुमार ने केरल के पूर्व मुख्य सचिव जिजी थॉमसन से 2026 विधानसभा चुनाव बीजेपी टिकट पर लड़ने का प्रस्ताव किया था।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र किसी नीतिगत मुद्दे से नहीं, बल्कि आयोग में प्रतिनियुक्ति पर तैनात एक अधिकारी के कामकाज से जुड़ा था।
चुनाव आयुक्तों पर रिपोर्ट और आयोग का जवाब
एक अखबार की रिपोर्ट में कहा गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने दस महीने में कम से कम 14 बार एसआईआर और अन्य चुनावी मामलों से जुड़े फैसलों पर आपत्ति जताई थी। इनमें फॉर्म-6, मतदाता हटाने और मतदाता सूची डेटाबेस तक पहुंच जैसे मुद्दे शामिल थे। चुनाव आयोग ने कहा कि ये आपत्तियां अंतिम फैसलों पर संस्थागत असहमति नहीं थीं। ड्राफ्ट स्तर पर उठाए गए सवाल, सुझाव और इनपुट सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग ने साफ किया कि एसआईआर सहित सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे और तीनों आयुक्तों की मंजूरी से हुए थे।
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि केरल के एक मुख्य सचिव ने खुद बताया है कि सीईसी ने उन्हें चुनाव लड़ने को कहा था। खड़गे का आरोप था कि उच्च पद पर बैठे व्यक्ति बीजेपी का दर्शन फैला रहे हैं और वे बीजेपी कार्यकर्ता बन गए हैं। उन्होंने कहा कि अगर उनमें थोड़ी भी नैतिकता है तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। खड़गे ने बताया कि उन्होंने कार्यसमिति की बैठक बुलाई है जिसमें इस मुद्दे पर चर्चा होगी।
कांग्रेस, सीपीआई, सीपीआई(एम), तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) समेत कई विपक्षी दलों ने कुमार के इस्तीफे की मांग की है। सीपीआई(एमएल) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने बताया कि 30 सितंबर को इंडिया गठबंधन की बैठक होने की उम्मीद है जिसमें एसआईआर प्रक्रिया और चुनाव आयोग के कामकाज पर चर्चा होगी।















