जगदलपुर। बस्तर के दरभा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत चिड़पाल में एक विशेष धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम उस समय भावुक क्षणों का साक्षी बना, जब एक ही परिवार के सात सदस्यों ने करीब दस वर्ष बाद ईसाई मत छोड़कर स्वेच्छा से पुनः सनातन धर्म और अपनी पारंपरिक सामाजिक-सांस्कृतिक परंपराओं को अपनाने की घोषणा की। बस्तर जिला यादव समाज ने इसे ‘घर वापसी’ बताते हुए परिवार का आत्मीय स्वागत किया। परिवार के सदस्यों ने भी अपनी मूल संस्कृति, संस्कारों और परंपराओं में लौटने को आत्मिक शांति और संतोष का अनुभव बताया।
सनातन धर्म में लौटने वाले परिवार के सदस्यों में चैतूराम यादव, कमलू राम यादव, चमरीन यादव, कचरी यादव, आराधना यादव, वीरेंद्र यादव और सुरेंद्र यादव शामिल हैं। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन-पूजन और शुद्धिकरण संस्कार संपन्न कराया गया। धर्माचार्यों ने गायत्री मंत्र का जाप कराया और गीता पाठ के माध्यम से परिवार को सनातन परंपरा के धार्मिक एवं आध्यात्मिक पक्ष से परिचित कराया। कार्यक्रम में यादव समाज की पारंपरिक संस्कृति, सामाजिक रीति-रिवाजों और पूर्वजों से चली आ रही परंपराओं के महत्व पर भी चर्चा की गई।
‘धर्म का निर्णय व्यक्ति की अपनी इच्छा’
बस्तर जिला यादव समाज ने कहा कि धर्म से जुड़ा निर्णय व्यक्ति की अपनी इच्छा पर निर्भर करता है। जो परिवार अपनी पुरानी धार्मिक और सामाजिक परंपराओं में लौटना चाहते हैं, उनका समाज सम्मान और सहयोग के साथ स्वागत करेगा।
समाज के पदाधिकारियों के अनुसार, किसी परिवार का अपनी परंपराओं की ओर लौटना अकेला धार्मिक पहचान का विषय होने तक सीमित न होकर यह उसके सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों से भी जुड़ा विषय है। इसी भावना के साथ यादव समाज ने परिवार के सदस्यों का स्वागत किया और उन्हें समाज की मुख्यधारा में आत्मीयता के साथ शामिल किया।
‘अपनी संस्कृति में लौटकर मिला आत्मिक संतोष’
सनातन धर्म में लौटने वाले परिवार के सदस्यों ने इस अवसर पर अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा कि वे लंबे समय से अपनी पारंपरिक संस्कृति, संस्कारों और त्योहारों को याद कर रहे थे। उनके अनुसार, अपनी मूल परंपराओं में वापस लौटने के बाद उन्हें असीम आत्मिक शांति और संतोष का अनुभव हुआ है।
चिड़पाल में हुआ यह आयोजन बस्तर के ग्रामीण समाज में धार्मिक पहचान के साथ-साथ पारंपरिक संस्कृति और सामाजिक जुड़ाव के प्रश्न को भी सामने लाता है। यादव समाज ने स्पष्ट किया कि अपनी पुरानी परंपराओं में लौटने वाले परिवारों को सम्मान और सहयोग दिया जाएगा।

















