पाप कांग्रेस का, धो रही है भाजपा
August 6, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

पाप कांग्रेस का, धो रही है भाजपा

सोनिया-मनमोहन सरकार ने 2014 में लोकसभा चुनाव की घोषणा के बाद एक राजपत्र जारी कर दिल्ली की 123 संपत्तियों को वक्फ बोर्ड को देने का निर्णय लिया था। भारत सरकार ने उन्हें अपने पास ही रखने का फैसला लिया है

Written byअरुण कुमार सिंहअरुण कुमार सिंह
Mar 1, 2023, 06:45 pm IST
inभारत, विश्लेषण
2014 में सोनिया-मनमोहन सरकार द्वारा जारी राजपत्र। इसके जरिए 123 संपत्तियों को वक्फ बोर्ड के हवाले करने का प्रयास किया गया।

2014 में सोनिया-मनमोहन सरकार द्वारा जारी राजपत्र। इसके जरिए 123 संपत्तियों को वक्फ बोर्ड के हवाले करने का प्रयास किया गया।

वास्तव में यह लगभग 110 वर्ष पुराना मामला है। एक जानकारी के अनुसार जब दिल्ली को राजधानी बनाया गया था, उस समय इन सारी संपत्तियों का अधिग्रहण किया गया था। इसके लिए आवश्यक प्रक्रिया अपनाई गई थी, लेकिन बाद में इन संपत्तियों पर वक्फ बोर्ड ने दावा कर दिया। यही नहीं, 1970 में दिल्ली वक्फ बोर्ड ने इन संपत्तियों को एकतरफा वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया।

भारत सरकार ने दिल्ली के कुछ प्रमुख स्थानों पर स्थित 123 संपत्तियों को वक्फ बोर्ड की संपत्ति नहीं माना है। यानी अब ये संपत्तियां पूरी तरह केंद्र सरकार के अधीन ही रहेंगी। हालांकि दिल्ली वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष अमानतुल्लाह खान ने इसका विरोध किया है। दिल्ली वक्फ बोर्ट ने इसे उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। वहीं विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष आलोक कुमार का कहना है कि केंद्र सरकार ने इन संपत्तियों को लेकर जो इच्छाशक्ति दिखाई है, वह अभूतपूर्व है।

इन 123 संपत्तियों में कुछ संपत्तियां तो अति संवेदनशील स्थानों पर हैं, कुछ खंडहर में बदल गई हैं, लेकिन अधिकांश संपत्तियों पर व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं। एक तरह से इन संपत्तियों पर कुछ प्रभावशाली लोगों का कब्जा है।

उल्लेखनीय है कि केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय से जुड़े उप भूमि और विकास अधिकारी (डी.एल.डी.ओ.) ने 8 फरवरी को दिल्ली वक्फ बोर्ड को एक पत्र लिखकर बताया कि 123 संपत्तियां केंद्र सरकार की हैं और सरकार ने इन्हें कब्जे में लेने का निर्णय लिया है। डी.एल.डी.ओ. ने उक्त पत्र में कहा है कि सेवानिवृत्त न्यायाधीश एस.पी. गर्ग की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय समिति ने अपनी रपट में लिखा है कि उसे गैर-अधिसूचित वक्फ संपत्तियों को लेकर दिल्ली वक्फ बोर्ड की ओर से कोई आपत्ति नहीं मिली। इस समिति में पूर्व एसडीएम राधा चरण भी शामिल हैं। फरवरी, 2022 में समिति का गठन हुआ था। इस समिति ने इन संपत्तियों पर दिल्ली वक्फ बोर्ड के दावे की जांच की। समिति ने वक्फ बोर्ड को कई बार बुलाया और अपना पक्ष रखने को कहा, लेकिन वक्फ बोर्ड ने न तो कोई जवाब दिया और न ही उसका कोई प्रतिनिधि समिति के सामने हाजिर हुआ। इसके बाद समिति ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी। उसी रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने उपरोक्त निर्णय लिया है।

पुराना विवाद
वास्तव में यह लगभग 110 वर्ष पुराना मामला है। एक जानकारी के अनुसार जब दिल्ली को राजधानी बनाया गया था, उस समय इन सारी संपत्तियों का अधिग्रहण किया गया था। इसके लिए आवश्यक प्रक्रिया अपनाई गई थी, लेकिन बाद में इन संपत्तियों पर वक्फ बोर्ड ने दावा कर दिया। यही नहीं, 1970 में दिल्ली वक्फ बोर्ड ने इन संपत्तियों को एकतरफा वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया। दिल्ली वक्फ बोर्ड की इस हरकत का तत्कालीन भारत सरकार ने विरोध किया। सरकार ने इन सभी संपत्तियों के लिए अलग-अलग नोटिस जारी किया। इसके साथ ही सरकार ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) से कहा कि वह इन संपत्तियों का सर्वेक्षण करे। इसके बाद डीडीए के अधिकारियों ने जगह-जगह जाकर इनका सर्वेक्षण किया। सर्वेक्षण में पाया गया कि इन संपत्तियों को न तो ‘वक्फ’ किया गया था और न ही उनके लिए कोई ‘वाकिफ’ नियुक्त किया गया था। डीडीए ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ‘‘इन संपत्तियों पर तथाकथित वक्फ या वाकिफ का वास्तविक कब्जा नहीं था।’’ यह भी लिखा है, ‘‘इनमें से किसी भी संपत्ति में कोई मस्जिद, मकबरा या कब्रिस्तान था ही नहीं।’’

यही नहीं, वक्फ बोर्ड के दावे के विरुद्ध सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय में 123 अलग-अलग मुकदमे भी दायर किए। सरकार ने न्यायालय को बताया कि ये संपत्तियां उसके द्वारा 1911-15 में अधिग्रहित की गई थी। बाद में कुछ संपत्तियों को दिल्ली डीडीए को हस्तांतरित कर दिया गया था, लेकिन वे कभी भी दिल्ली वक्फ बोर्ड से संबंधित नहीं रही हैं।

वर्तमान में इन 123 संपत्तियों में से 61 का स्वामित्व शहरी विकास मंत्रालय के तहत भूमि और विकास कार्यालय के पास है, जबकि शेष दिल्ली विकास प्राधिकरण के पास हैं। इनमें से अधिकतर संपत्तियां कनॉट प्लेस, मथुरा रोड, लोधी रोड, मान सिंह रोड, पंडारा रोड, अशोक रोड, जनपथ, संसद भवन, करोल बाग, सदर बाजार, दरियागंज और जंगपुरा के आसपास हैं। इनका क्षेत्रफल लगभग 1,360 एकड़ है और इनकी कीमत 20 हजार करोड़ रु. से अधिक है।

40 वर्ष तक लड़ी विहिप

दिल्ली की इन 123 संपत्तियों को वक्फ से बचाने के लिए विश्व हिंदू परिषद ने लगभग 40 वर्ष तक न्यायालय में मुकदमा लड़ा। उसने इस मामले में भारत सरकार द्वारा उठाए गए हर कदम का जमकर विरोध भी किया। वर्तमान में विहिप के कार्याध्यक्ष आलोक कुमार एक अधिवक्ता के नाते इस मामले से शुरू से जुड़े रहे हैं। सरकार के निर्णय से वे खुश होकर कहते हैं कि सरकार ने 123 संपत्तियों पर जो निर्णय लिया है, वह बहुत अच्छा है। विहिप इस निर्णय का स्वागत करती है।

 

संप्रग सरकार की शरारत
विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल कहते हैं, ‘‘इन संपत्तियों को लेकर एक समय तो भारत सरकार मुकदमा लड़ती रही, लेकिन बाद में इस पर उसका रवैया बदल गया। अभी न्यायालय में मुकदमा चल ही रहा था कि मुस्लिम वोट बैंक को खुश करने के लिए 1974 में भारत सरकार ने इन संपत्तियों पर एक उच्चाधिकार समिति बना दी।’’ इस समिति के अध्यक्ष दिल्ली वक्फ बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष एस.एम.एच. बर्नी को बनाया गया। विनोद बंसल मानते हैं, ‘‘जो दिल्ली वक्फ बोर्ड इन संपत्तियों पर दावा करता था, उसके अध्यक्ष को ही यह तय करने का अधिकार दिया गया कि ये संपत्तियां किसकी हैं।

यानी सरकार ने बिल्ली को ही दूध की रखवाली की जिम्मेदारी दे दी। इस कारण वही हुआ, जो वक्फ बोर्ड चाहता था।’’ बर्नी समिति ने अपनी रिपोर्ट में लिखा, ‘‘ये संपत्तियां वक्फ संपत्ति के रूप में कार्य कर रही हैं।’’ इसके साथ ही बर्नी समिति ने इन संपत्तियों को वक्फ संपत्ति घोषित करने की सिफारिश की। इन संपत्तियों में एक उपराष्ट्रपति आवास के परिसर में है और दूसरी वायरलेस स्टेशन के अंदर। बर्नी समिति ने इन दोनों के लिए अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि इन दोनों स्थानों पर समिति के सदस्यों को जाने की अनुमति नहीं मिली। इसके बाद भारत सरकार ने फौरन बर्नी समिति की सिफारिश को मान लिया और ये सारी संपत्तियां दिल्ली वक्फ बोर्ड को पट्टे पर देने का निर्णय ले लिया।

27 मार्च, 1984 को भारत सरकार ने एक आदेश (जे 20011/4/74.1-2) जारी किया। उसमें कहा गया है, ‘‘ये सारी संपत्तियां सालाना एक रुपए प्रति एकड़ की दर से वक्फ बोर्ड को पट्टे पर दी जाती हैं।’’ इंद्रप्रस्थ विश्व हिंदू परिषद ने भारत सरकार के इस निर्णय का जबर्दस्त विरोध किया। उसी वर्ष इंद्रप्रस्थ विश्व हिंदू परिषद ने दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर (1512) कर कहा कि भारत सरकार ने गलत ढंग से अरबों की संपत्ति दिल्ली वक्फ बोर्ड को दी है। याचिका की पहली सुनवाई में ही उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार के निर्णय पर रोक लगा दी। उस याचिका के विरोध में केंद्र सरकार ने न्यायालय में जो दलील दी, वह चकित कर देने वाली है। सरकार ने कहा, ‘‘ये सभी संपत्तियां भारत सरकार की हैं। इन संपत्तियों को किसी अन्य विभाग या संगठन को दिए जाने के बारे में कोई कानूनी प्रतिबंध नहीं है।…’’

यह मामला कई वर्ष तक उच्च न्यायालय में चला। न्यायालय ने बार-बार सरकार से पूछा कि उसने किस आधार पर ये संपत्तियां वक्फ बोर्ड को देने का निर्णय लिया है? क्या इस पर कोई नीति बनाई गई है? इस पर 29 अगस्त, 2005 को महाधिवक्ता ने न्यायालय से नीति बनाने के लिए छह महीने का समय मांगा। न्यायालय ने छह महीने का समय भी दे दिया, लेकिन सरकार छह साल तक सोती रही। बाद में विहिप ने फिर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

इसके बाद 12 फरवरी, 2011 को उच्च न्यायालय ने इस मामले को यह कहते हुए खारिज कर दिया, ‘‘सरकार इस मामले को नए तरीके से देखकर नीति बनाए और छह महीने में इस काम को पूरा करे।’’ लेकिन तय छह महीने में सरकार कोई नीति नहीं ला पाई। इसके बाद अदालत ने 5 सितंबर, 2011 तक की तारीख देते हुए निर्देश दिया, ‘‘सरकार इस आदेश का पालन करते हुए नीति तय करे और उसकी एक प्रति याचिकाकर्ता के वकील को भी दे।’’ लेकिन दुर्भाग्य से केंद्र सरकार ने फिर कोई नीति नहीं बनाई। उलटे भारत सरकार ने भूमि अधिग्रहण से संबंधित 2013 के एक कानून की धारा 93 (1) का हवाला देते हुए इन संपत्तियों से अपना कब्जा वापस ले लिया।

यह धारा कहती है, ‘‘संबंधित सरकार को ऐसे किसी भी भूखंड के अधिग्रहण को वापस लेने का अधिकार है, जिसका कब्जा अभी तक नहीं लिया गया हो।’’ इसके बाद 2014 में 16वीं लोकसभा के चुनाव की घोषणा होने के बाद सोनिया-मनमोहन सरकार ने 5 मार्च, 2014 (बुधवार) को एक राजपत्र (566) जारी कर 123 संपत्तियों को दिल्ली वक्फ बोर्ड को सौंप दिया।

चुनाव आयोग से शिकायत
विश्व हिंदू परिषद ने एक बार फिर सरकार के इस निर्णय का विरोध किया। विहिप के तत्कालीन महामंत्री चंपत राय के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल 18 मार्च, 2014 को मुख्य चुनाव आयुक्त से मिला और उन्हें एक पत्र सौंपा। उस पत्र के पैरा 11 में लिखा गया है, ‘‘यह बड़ा आश्चर्यजनक है कि लगभग एक शताब्दी पूर्व अधिग्रहित की गई संपत्तियों का कब्जा लेने में सरकार विफल रही। और उसने एक ही झटके में माननीय न्यायालय में दाखिल अपने वक्तव्य या कानूनी कार्रवाइयों और शपथपत्रों को नकार दिया।’’ विहिप ने चुनाव आयोग से यह भी कहा कि सरकार ने अल्पसंख्यकों के नाम पर अरबों की संपत्ति थाली में परोस कर उन्हें दे दी। इसके बाद चुनाव आयोग ने सरकार के आदेश को खारिज कर दिया।

इस तरह यह मामला उस समय रुक गया। बाद में मई, 2014 में केंद्र सरकार बदल गई। नरेंद्र मादी प्रधानमंत्री बने। इसके बाद विश्व हिंदू परिषद ने एक बार फिर से इस मामले को सरकार के समक्ष उठाया। तत्कालीन शहरी विकास मंत्री वेकैंया नायडू से विहिप के प्रतिनिधिमंडल ने भेंट कर उनसे इस मामले को लेकर बात की। इसके बाद सरकारी स्तर पर कुछ गतिविधियां होती रहीं। वहीं, कुछ अन्य संगठन भी इस मांग को लेकर न्यायालय पहुंचे कि इन संपत्तियों पर सरकार कब्जा करे। एक ऐसा ही मामला अभी भी न्यायालय में चल रहा है।

अब केंद्र सरकार ने गर्ग समिति की रिपोर्ट के आधार पर इन संपत्तियों को अपने पास ही रखने का निर्णय लिया है। इसके बाद कुछ मुस्लिम संगठन और सेकुलर जमात के लोग इससे जुड़े तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत कर रहे हैं। कुछ लोग मुस्लिम समाज को भड़काने वाले बयान दे रहे हैं। सरकार के सामने यही बड़ी चुनौती है।

Topics: सोनिया-मनमोहन सरकारअंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष आलोक कुमारदिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए)BJP is washing away the sins of CongressSonia-Manmohan governmentVishwa Hindu ParishadInternational Executive President Alok Kumarविश्व हिंदू परिषदDelhi Development Authority (DDA)चुनाव आयोगElection Commissionwaqf board propertyवक्फ बोर्ड की संपत्ति
अरुण कुमार सिंह
अरुण कुमार सिंह
समाचार संपादक, पाञ्चजन्य | अरुण कुमार सिंह लगभग 25 वर्ष से पत्रकारिता में हैं। वर्तमान में साप्ताहिक पाञ्चजन्य के समाचार संपादक हैं। [Read more]
Share21
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

Uttarakhand SIR Voter List Controversy Dehradun Congress BJP Mahendra Bhatt Yashpal Arya Panchjanya

SIR अभियान के तहत जारी हो रहे नोटिस, जानिए किन दस्तावेजों से होगा वोटर लिस्ट सत्यापन

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा- शिक्षकों को BLO बनाया जा सकता है लेकिन उन पर अनावश्यक दबाव न हो

Uttarakhand SIR Voter List Controversy Dehradun Congress BJP Mahendra Bhatt Yashpal Arya Panchjanya

SIR फेज-3 में बड़ा खुलासा! ‘अन्य’ कारणों से 84 हजार से ज्यादा वोटर लिस्ट से बाहर

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (प्रतीकात्मक फोटो)

BJP को रोकने के लिए संघ को निशाना क्यों बना रहा विपक्ष?

प्रतीकात्मक चित्र

SIR: एक साल में हटाए गए 6 करोड़ अवैध मतदाताओं के नाम

मुहर्रम में वैन को क्रेन से बांधकर उड़ाया गया

उज्जैन: मोहर्रम जुलूस में वैन को 40 फीट ऊंचाई पर लटकाकर विस्फोट से उड़ाया, इस्लामिक झंडे फहराए; वीडियो वायरल

Load More

ताज़ा समाचार

इंग्लैंड-वेल्स-स्कॉटलैंड में सिंगल-सेक्स जगहों का नया EHRC गाइडेंस: जैविक लिंग आधार पर टॉयलेट-चेंजिंग रूम

आज का श्लोक : देश का अभ्युदय करने वाला एक ही त्रिक है – वेष, भाषा और सदाचार

Ajmer RSS Sanvad Dr Manmohan Vaidya Dr Anil Samariya JLN Medical College Panchjanya

“अध्यात्म ही भारत के स्वराज व स्वदेशी का मूल आधार”: अजमेर संघ संवाद में बोले डॉ. मनमोहन वैद्य जी

Assam Floods 2026 RSS Volunteers Relief Work Panchjanya

‘असम बाढ़ त्रासदी में देवदूत बने RSS के स्वयंसेवक’ : 3.32 लाख लोग प्रभावित, राहत और पुनर्वास में जुटा संघ परिवार

Uttarakhand jailor naim

“14 साल का स्कूली छात्र भेजा गया जेल”: बांग्लादेश में कार्रवाई से हड़कंप, अवामी लीग ने बताया राजनीतिक प्रतिशोध

Haridwar Police Kanwar Yatra 2026 Shekhar Chandra Suyal Swapan Kishor Singh Roorkee Panchjanya

“सुरक्षा ही नहीं, सेवा भी”: कांवड़ यात्रा में हरिद्वार पुलिस की अनोखी मिसाल, शिवभक्तों ने भी की प्रशंसा

Uttarakhand SIR Voter List Controversy Dehradun Congress BJP Mahendra Bhatt Yashpal Arya Panchjanya

“घुसपैठियों के नाम हटने से बौखलाहट” : उत्तराखंड में SIR वोटर लिस्ट पर महाभारत, कांग्रेस बोली- वर्ग विशेष को टारगेट किया

Sheikh Hasina Press Conference Delhi

गिरफ्तारी या मौत का खतरा भी नहीं रोक सकता, दिसंबर में बांग्लादेश लौटूंगी : शेख हसीना

Army Chief General Dheeraj Seth Central Command Lucknow Visit Yoddha Seva Samman Panchjanya

“भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों के लिए तैयार रहे सेना”: COAS जनरल धीरज सेठ का सेंट्रल कमांड लखनऊ का दो दिवसीय दौरा

UP Assembly Monsoon Session Adjourned CM Yogi Adityanath Attacks SP Lucknow Panchjanya

UP Monsoon Session Adjourned: यूपी विधानसभा सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, सीएम योगी बोले- “बेनकाब हुआ सपा का चरित्र”

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies