सुप्रीम कोर्ट आज मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करने जा रहा है। इन याचिकाओं में उनके पद से निलंबन और चुनाव आयोग के नाम पर कथित एकतरफा फैसलों को रद्द करने की मांग की गई है।
याचिकाएं किसने दायर कीं
ये याचिकाएं पटना के राकेश कुमार सिंह और अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने दायर की हैं। सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच करेगी।
मुख्य आरोप क्या हैं
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ज्ञानेश कुमार ने वो शक्तियां अकेले इस्तेमाल कीं जो कानूनी रूप से पूरे चुनाव आयोग की हैं। खासकर स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) यानी वोटर लिस्ट की खास गहन जांच से जुड़े दिशानिर्देशों और सॉफ्टवेयर में बदलाव बिना दूसरे दो चुनाव आयुक्तों — सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी — की सहमति या जानकारी के किए गए।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पिछले करीब 10 महीनों (अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 तक) में इन दोनों आयुक्तों ने कम से कम 14 बार ऐसे फैसलों पर लिखित आपत्ति दर्ज कराई थी जो उनकी जानकारी के बिना आयोग के नाम पर जारी हुए थे। इनमें वोटर रजिस्ट्रेशन, नाम हटाने-जोड़ने की प्रक्रिया, फॉर्म-6 में बदलाव और वोटर डेटाबेस के नियंत्रण जैसे मुद्दे शामिल हैं।
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कानूनी बात क्या है
याचिकाओं में कहा गया है कि चुनाव आयोग एक बहु-सदस्यीय संस्था है। संविधान के अनुच्छेद 324 और 2023 के कानून की धारा 18 के अनुसार आयोग के फैसले जितना संभव हो सर्वसम्मति से होने चाहिए। मतभेद होने पर बहुमत से फैसला लिया जाना चाहिए। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि CEC ने इस सामूहिक प्रक्रिया का उल्लंघन किया।
याचिकाओं में क्या मांगा गया है
राकेश कुमार सिंह की याचिका में कहा गया है कि अंतिम सुनवाई तक ज्ञानेश कुमार को CEC के कामकाज से अलग रखा जाए। इस दौरान आयोग का काम दूसरे दो आयुक्तों के सर्वसम्मत फैसले से चलाया जाए। साथ ही आयोग के मूल रिकॉर्ड पेश करने और रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज की अगुवाई में स्वतंत्र जांच या SIT गठित करने की भी मांग है।
दूसरी याचिका में SIR से जुड़े कथित अनधिकृत फैसलों, दिशानिर्देशों और सॉफ्टवेयर बदलावों को असंवैधानिक और अवैध घोषित करने की मांग की गई है। इसमें CEC समेत कुछ अन्य अधिकारियों के खिलाफ आधिकारिक कर्तव्य उल्लंघन के लिए आपराधिक कार्रवाई शुरू करने की भी अपील है। ये सुनवाई आज सोमवार को होनी है।

















