धर्म और राष्ट्र अलग नहीं...  दुनिया को भारत से है समाधान की उम्मीद: सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी
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धर्म और राष्ट्र अलग नहीं…  दुनिया को भारत से है समाधान की उम्मीद: सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी

मुंबई में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉक्टर मोहन भागवत जी ने कहा कि भारत में धर्म और राष्ट्र को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता।

Written byLalit FularaLalit Fulara
Oct 2, 2026, 03:40 pm IST
inसंघ @100
श्री मोहन भागवत, सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

श्री मोहन भागवत, सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

नई दिल्ली/मुंबई: मुंबई में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉक्टर मोहन भागवत जी ने कहा कि भारत में धर्म और राष्ट्र को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता। राष्ट्र का उद्देश्य धर्म से जुड़ा है और धर्म राष्ट्र को मजबूती देने का काम करता है। दोनों एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। उन्होंने यह बात अखिल भारतीय विहार सेवा समूह के 14वें सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही।

डॉक्टर मोहन भागवत जी ने कहा कि अगर राष्ट्र कमजोर होता है तो धर्म भी प्रभावित होता है और दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ना जिम्मेदारी है। आज दुनिया के सामने विकास और पर्यावरण संरक्षण, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और पारिवारिक जीवन तथा धार्मिक आस्था और संघर्ष के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है।दुनिया में कई जगह संतुलन की कमी दिखाई दे रही है।

‘दुनिया भारत से समाधान की उम्मीद कर रही’
डॉक्टर मोहन भागवत जी ने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा दुनिया के सामने मौजूद इन चुनौतियों से निपटने में मदद कर सकती है। भारत ने ऐतिहासिक रूप से दूसरे देशों पर कब्जा किए बिना और लोगों का मतांतरण कराए बिना अपने ज्ञान को दुनिया के साथ साझा किया है। दुनिया को उम्मीद है कि रास्ता भारत से निकलेगा। भारत के पास ज्ञान की ऐसी बड़ी विरासत है, जिसकी आज दुनिया को जरूरत है। भक्ति और समर्पण के जरिए व्यक्ति ईश्वर के करीब पहुंच सकता है। इस ज्ञान और परंपरा को आगे बढ़ाने वाले लोगों के जीवन और उनकी परंपराओं की रक्षा करना केवल धार्मिक जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह मानवता की सेवा भी है।  भारत की ऐतिहासिक परंपरा रही है कि वह दूसरे देशों पर जीत हासिल किए बिना या लोगों का मतांतरण किए बगैर अपना ज्ञान साझा करता रहा है।

‘हमारा राष्ट्र और धर्म अलग नहीं है…दोनों एक-दूसरे पर निर्भर’
डॉक्टर मोहन भागवत जी ने कहा कि हमारा राष्ट्र और धर्म अलग नहीं है। राष्ट्र का उद्देश्य धर्म है और धर्म राष्ट्र को बनाए रखने में मदद करता है। दोनों एक-दूसरे पर निर्भर हैं। अगर एक है तो दूसरा भी है और अगर एक नहीं है तो दूसरा भी नहीं है। भारतीय दृष्टिकोण केवल किसी एक वर्ग के कल्याण तक सीमित नहीं है। हमारे पूर्वजों ने पूरे विश्व के कल्याण के बारे में सोचा। हम कहते हैं कि सभी सुखी रहें। हम यह नहीं मानते कि कुछ लोग समृद्ध हों और कुछ नहीं। यहां ऐसा कोई दोहरा मापदंड नहीं है। भले ही अधिकतम संख्या में लोग खुश हों लेकिन अगर कुछ लोग भी पीड़ित हैं, तो उनका दुख सभी की खुशी को नष्ट कर देता है। डॉक्टर मोहन भागवत जी ने कहा कि भारत ने करीब 3,000 वर्षों से किसी देश को जीते बिना, किसी का मतांतरण किए बिना और किसी पर हमला किए बिना सुख और शांति का मार्ग दिखाया है। इसलिए लोगों को हमसे उम्मीदें हैं।

Topics: RSSसंघDr. Mohan Bhagwatआरएसएससंघ प्रमुख मोहन भागवतRSS chief Mohan Bhagwatडॉक्टर मोहन भागवत
Lalit Fulara
Lalit Fulara
उत्तराखंड के अल्मोड़ा ज़िले के सुदूर स्थित छोटे से गाँव 'पटास' में पैदाइश. कला-साहित्य में विशेष रुचि. पहला नॉवेल 'घासी: लाल कैंपस का भगवाधारी' प्रकाशित. विगत 12 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय. करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर से हुई और उसके बाद ज़ी न्यूज़, न्यूज़18, राजस्थान पत्रिका, अमर उजाला और इंडियाडॉटकॉम होते हुए वर्तमान में पांचजन्य डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर के तौर पर कार्यरत. पत्रकारिता में एम.ए माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के नोएडा कैंपस से किया है. [Read more]
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