नई दिल्ली/मुंबई: मुंबई में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉक्टर मोहन भागवत जी ने कहा कि भारत में धर्म और राष्ट्र को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता। राष्ट्र का उद्देश्य धर्म से जुड़ा है और धर्म राष्ट्र को मजबूती देने का काम करता है। दोनों एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। उन्होंने यह बात अखिल भारतीय विहार सेवा समूह के 14वें सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही।
डॉक्टर मोहन भागवत जी ने कहा कि अगर राष्ट्र कमजोर होता है तो धर्म भी प्रभावित होता है और दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ना जिम्मेदारी है। आज दुनिया के सामने विकास और पर्यावरण संरक्षण, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और पारिवारिक जीवन तथा धार्मिक आस्था और संघर्ष के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है।दुनिया में कई जगह संतुलन की कमी दिखाई दे रही है।
‘दुनिया भारत से समाधान की उम्मीद कर रही’
डॉक्टर मोहन भागवत जी ने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा दुनिया के सामने मौजूद इन चुनौतियों से निपटने में मदद कर सकती है। भारत ने ऐतिहासिक रूप से दूसरे देशों पर कब्जा किए बिना और लोगों का मतांतरण कराए बिना अपने ज्ञान को दुनिया के साथ साझा किया है। दुनिया को उम्मीद है कि रास्ता भारत से निकलेगा। भारत के पास ज्ञान की ऐसी बड़ी विरासत है, जिसकी आज दुनिया को जरूरत है। भक्ति और समर्पण के जरिए व्यक्ति ईश्वर के करीब पहुंच सकता है। इस ज्ञान और परंपरा को आगे बढ़ाने वाले लोगों के जीवन और उनकी परंपराओं की रक्षा करना केवल धार्मिक जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह मानवता की सेवा भी है। भारत की ऐतिहासिक परंपरा रही है कि वह दूसरे देशों पर जीत हासिल किए बिना या लोगों का मतांतरण किए बगैर अपना ज्ञान साझा करता रहा है।
‘हमारा राष्ट्र और धर्म अलग नहीं है…दोनों एक-दूसरे पर निर्भर’
डॉक्टर मोहन भागवत जी ने कहा कि हमारा राष्ट्र और धर्म अलग नहीं है। राष्ट्र का उद्देश्य धर्म है और धर्म राष्ट्र को बनाए रखने में मदद करता है। दोनों एक-दूसरे पर निर्भर हैं। अगर एक है तो दूसरा भी है और अगर एक नहीं है तो दूसरा भी नहीं है। भारतीय दृष्टिकोण केवल किसी एक वर्ग के कल्याण तक सीमित नहीं है। हमारे पूर्वजों ने पूरे विश्व के कल्याण के बारे में सोचा। हम कहते हैं कि सभी सुखी रहें। हम यह नहीं मानते कि कुछ लोग समृद्ध हों और कुछ नहीं। यहां ऐसा कोई दोहरा मापदंड नहीं है। भले ही अधिकतम संख्या में लोग खुश हों लेकिन अगर कुछ लोग भी पीड़ित हैं, तो उनका दुख सभी की खुशी को नष्ट कर देता है। डॉक्टर मोहन भागवत जी ने कहा कि भारत ने करीब 3,000 वर्षों से किसी देश को जीते बिना, किसी का मतांतरण किए बिना और किसी पर हमला किए बिना सुख और शांति का मार्ग दिखाया है। इसलिए लोगों को हमसे उम्मीदें हैं।

















