कलकत्ता हाई कोर्ट में एक मामले की सुनवाई हुई जिसमें मुर्शिदाबाद की एक महिला अपने पति को देश से बाहर भेजे जाने से रोकना चाहती थी। कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी और पति से भारतीय नागरिकता के सबूत मांगे।
मामला क्या है
मुर्शिदाबाद की नरगिस बीबी ने कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। उनका पति सेलिम शेख 31 अगस्त से डिटेंशन कैंप में बंद है। नरगिस चाहती थीं कि कोर्ट अधिकारियों को निर्देश दे ताकि उनके पति को डिपोर्ट न किया जाए। सलेम का नाम सस्पेक्टेड इमीग्रेंट रजिस्टर से हटाकर उसे बांग्लादेशी करार दिया गया था। नरगिस का नाम 2002 और 2026 की वोटर लिस्ट में दर्ज है, लेकिन सेलिम का नाम इन दोनों में से किसी में भी नहीं है।
पुलिस का पक्ष
बंगाल पुलिस के वकील ने कोर्ट को बताया कि 31 अगस्त को हुई छापेमारी में कुछ दस्तावेज मिले। इन दस्तावेजों से संकेत मिलता है कि सेलिम अवैध बांग्लादेशी है। उसे गृह मंत्रालय के मई 2026 के नोटिफिकेशन के तहत हिरासत में लिया गया था। इस नोटिफिकेशन में अवैध प्रवासियों की खोज, पहचान और देश से बाहर भेजने का प्रावधान है।
कोर्ट में क्या हुआ
नरगिस के वकील ने हिरासत को गैरकानूनी बताया। उन्होंने कहा कि सेलिम को किसी अधिकारी के सामने पेश नहीं किया गया। जस्टिस कृष्णा राव की सिंगल बेंच ने याचिका पर सुनवाई की। जस्टिस राव ने पूछा कि कानून के मुताबिक, 30 दिनों की जांच चल रही है। अगर कोई व्यक्ति कोर्ट या अधिकारी को यह साबित नहीं कर पाता कि वह भारतीय नागरिक है, तो अधिकारी क्या करें। क्या उसे भारतीय इलाके में घूमने दिया जाए।
कोर्ट ने साफ कहा कि एक दस्तावेज मांगा गया है। वह दस्तावेज दिखाएं जिससे पता चले कि सेलिम का नाम 2002 की वोटर लिस्ट में था। जस्टिस राव ने सीधे शब्दों में कहा कि साबित करें कि आप भारतीय हैं।
कोर्ट ने खारिज की याचिका
कोर्ट ने निर्वासन रोकने की याचिका खारिज कर दी। पुलिस के पास सेलिम के अवैध बांग्लादेशी होने के सबूत बताए गए। नरगिस की याचिका में पति को देश से बाहर भेजने से रोकने की मांग थी, लेकिन कोर्ट ने नागरिकता साबित करने की जिम्मेदारी व्यक्ति पर डाली। मामला गुरुवार को सुना गया और याचिका खारिज हो गई। सेलिम अभी भी डिटेंशन कैंप में हैं और जांच का प्रोसेस जारी है।

















