नहीं टली ईरानी गायिका के कोड़े की सजा? आखिर क्यों?
October 2, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम विश्व

नहीं टली ईरानी गायिका के कोड़े की सजा? आखिर क्यों?

ईरान की गायिका परस्तू अहमदी को बिना हिजाब और स्लीवलेस ड्रेस में गाने के आरोप में 74 कोड़ों की सजा बरकरार रखी गई। जानें पूरा मामला और फेमिनिस्ट चुप्पी का सच।

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा — edited by कुलदीप सिंह
Oct 2, 2026, 02:20 pm IST
inविश्व

क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि आज के सभ्य समाज में भी लड़कियों को कोड़े मारने की सजा दी जा सकती है और इस पर भी दुनिया भर की वामपंथी फेमिनिस्ट इस पर पूरी तरह से चुप्पी साधे हुए हैं। यह बहुत ही भयावह है कि ऐसी असभ्य सजाओं पर भी चुप्पी है।

अनिवार्य हिजाब का विरोध कर रही ईरानी महिलाएं

ईरान में दरअसल महिलाएं अनिवार्य हिजाब के नियमों का विरोध कर रही हैं। और इतना ही नहीं बल्कि वे लोग कई दशकों से अनिवार्य हिजाब का विरोध कर रही हैं। और उन्हें सजा भी हर तरीके की मिल रही है। सजा का न ही कोई रूप है और न ही समय सीमा।

और न ही अपराध की कोई श्रेणी है। अपराध बस इतना भर हो सकता है कि लड़की या महिला ने अपना सिर खुला रख लिया हो। अब सिर खुला रखना इतना बड़ा अपराध है या फिर उसका समर्थन करना ही इतना बड़ा अपराध है कि उसके लिए कोड़े लगाए जाएं?

क्यों मिली थी ईरान की गायिका को यह सजा?

अब इस बात कर आते हैं कि आखिर इस ईरानी गायिका को सजा क्यों मिली थी? दरअसल ईरान की एक गायिका परस्तू अहमदी ने दिसंबर 2024 में एक लाइव कॉन्सर्ट में स्लीवलेस ड्रेस पहनकर गाना गाया था। एक तो सिर नहीं ढका और दूसरी तरफ स्लीवलेस ड्रेस? यह कैसे सरकार और सरकार का समर्थन कर रहे कट्टरपंथी बर्दाश्त कर सकते थे? ईरान के कानून यह स्पष्ट करते हैं कि लड़कियों को सिर ढककर चलना ही होगा और केवल सिर ढकना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि कैसे बाल नहीं दिखने हैं, ये भी सुनिश्चित करना होगा।

और जब यह वीडियो लाखों बार देखा गया, असंख्य बार फॉरवर्ड हुआ और वायरल हुआ, तो देखते ही देखते सरकार में बैठे लोग गुस्से से भर गए और परस्तू को अश्लीलता फैलाने के आरोप में हिरासत में ले लिया। उन पर आरोप लगाए गए कि उनके गाने के कारण देश के कानूनी और सांस्कृतिक नियमों का उल्लंघन हुआ है।

आखिर क्या दोष है परस्तू का

परस्तू का असली दोष क्या था? क्या असली दोष उसका गाना गाना या फिर स्लीवलेस ड्रेस पहनना था? नहीं परस्तू का असली दोष यह था कि उन्होनें सरकार की आँखों में आँखें ही नहीं डाली थीं, बल्कि उनके इस रूप ने कहीं न कहीं असंख्य लड़कियों को भी बेखौफ कर दिया था।

उन्हें हिरासत में लिया गया था और उसके बाद जून में कुम की एक आपराधिक अदालत ने उन्हें और उनके बैंड के आठ और लोगों को अश्लीलता फैलाने के आरोप में दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। उन्हें कोड़े मारने की सजा के साथ ही उनपर तमाम प्रतिबंध भी लगा दिए थे, जैसे कि वे दो साल तक किसी भी ऐसी गतिविधियों में हिस्सा नहीं बन पाएंगी और साथ ही न ही वे देश छोड़कर जा पाएंगी।

उनकी इस सजा के खिलाफ याचिका दायर की गई थी। मगर पिछले शुक्रवार उनकी यह अपील उच्च अदालत ने बिना किसी सुनवाई के खाफीज कर दी और निचली अदालत के ही निर्णय को अंतिम और लागू करने योग्य घोषित कर दिया।

उनके वकील ने यह तर्क दिया था कि किसी म्यूज़िक कॉन्सर्ट को करना कोई अपराध नहीं है। उन्हें इस सजा को मानवाधिकारों के खिलाफ बताया था। परंतु उनकी तमाम अपीलें बेकार गईं और परस्तू की सजा को बरकरार रखा गया।

सोशल मीडिया पर परस्तू की सजा के खिलाफ गुस्सा

ईरान में इस सजा को बरकरार रखने को लेकर सोशल मीडिया पर गुस्सा देखा जा रहा है। न केवल स्थानीय लोग इसके खिलाफ हैं, बल्कि मानवाधिकार संगठन भी इस सजा को लेकर गुस्से मे हैं। ईरान के इन कानूनों का विरोध करने वाली मसीह अलिनेजाद ने भी एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि ईरान की सबसे प्यारी आवाज वाली गायिका को केवल गाना गाने के चलते 74 कोड़ों की सजा दी गई और उनके संगीतकारों एवं प्रोडक्शन टीम को भी उतनी ही सजा मिली है।

उन्होनें लिखा कि वे चिल्लाना चाहती हैं, और सड़कों पर चीख चीखकर सभी को बताना चाहती हैं कि यह सरकार निर्दोष लोगों को मार रही है, फांसी दे रही है और कोड़े लगा रही है। यह साधारण सरकार नहीं है।

रॉबर्ट स्पेन्सर एक्स पर पोस्ट लिखते हुए पश्चिमी फेमिनिस्ट और इस्लाम का समर्थन करने वाले कथित लिबरल कार्यकर्ताओं पर प्रश्न उठाते हुए कहा कि वे लोग इस्लाम की आलोचना के खिलाफ बहस करते थकते नहीं हैं और वे मुसलमानों को हर उस बहस से बचाते हैं, जो उनकी तहज़ीब और मजहबी प्रक्रियाओं में बसी महिला विरोधी बातों के विषय मे होती हैं।

उन्होंने लिखा कि इस्लाम का बचाव करते हुए, वे इस्लामिक शासन में महिलाओं कि पीड़ा को अनदेखा कर देती हैं। और ईरानी गायिका परस्तू अहमदी की सजा ने एक बार फिर से उस कठिन सच्चाई को उजागर किया है, जिसमें ऐसे समाज की महिलाएं रहती हैं।

Islamic Republic of Iran sentences singer Parastoo Ahmadi to 74 lashes for performing without hijab
by Ashlyn Davis

Western feminists and pro-Islam liberal activists don’t get tired of arguing against criticism of Islam and shield Muslims from debates about the misogyny deeply… pic.twitter.com/mydui7Ex6h

— Robert Spencer (@jihadwatchRS) June 29, 2026

पिछले कई दिनों से कई पोर्टल्स एवं मीडिया यह स्थापित करने का प्रयास कर रही थीं कि ईरान में अब महिलाएं बिना हिजाब के घूम सकती हैं। मगर परस्तू के लिए आए इस निर्णय ने कहीं न कहीं स्थापित किया कि ऐसा बिल्कुल भी नहीं है।

पत्रकार एमिली श्चर्यदेर ने भी लिखा कि परस्तू को जो 74 कोड़े लगाने की सजा थी, वह अदालत ने बरकरार रखी है। और आप सभी को यह याद रखना चाहिए जब भी आप किसी को यह कहते हुए सुने कि ईरान में अब महिलाएं बिना हिजाब के निकल सकती हैं।

Topics: परस्तू अहमदीईरानी गायिका कोड़ों की सजा74 कोड़े सजाअनिवार्य हिजाब ईरानबिना हिजाब गाना
Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

No Content Available
Load More

ताज़ा समाचार

नहीं टली ईरानी गायिका के कोड़े की सजा? आखिर क्यों?

Bharat Bhushan tiwari Fact check

Fact Check: फ्लाईदुबई में स्मित पर हमला करने वाले मुस्लिम को पॉयलट ने लगाए ‘डेथ टू अमेरिका’ के नारे

निशा उरांव

ईसाई मिशनरियों पर भड़कीं IRS अधिकारी निशा उरांव, कहा-‘सरना जनजातीय बिकाऊ नहीं….किसी की दलाली नहीं कर रही’

प्रतीकात्मक तस्वीर

भारत हरित ऊर्जा के क्षेत्र में द्रुत गति से बढ़ रहा आगे, इसके लिए क्या है जरूरी?

PM मोदी और कैप्टन स्मित मच्छार के बातचीत का VIDEO देखिये

मोहम्मद दीपक

कोटद्वार में विवाद के बाद ‘मोहम्मद’ दीपक गिरफ्तार, व्यापारी के साथ बदसलूकी का मामला

‘आप भारतीय हैं साबित कीजिए, वरना बांग्लादेश डिपोर्टेशन जारी रहेगा’: कोलकाता हाई कोर्ट ने क्यों कहा ऐसा ?

जंतर-मंतर पर कॉकरोचों का CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन पर रोक, दिल्ली में धारा 163 लागू ; 11 मेट्रो स्टेशन बंद

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

पुतिन ने PM मोदी को धन्यवाद दिया: कहा-वे यूक्रेन युद्ध खत्म करने के लिए सक्रिय, उनके पास बेहतरीन आइडिया

एशियन गेम्स 2026: भारतीय महिला रिकर्व तीरंदाजी टीम ने रचा इतिहास, दक्षिण कोरिया को हराकर जीता पहला गोल्ड

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies