क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि आज के सभ्य समाज में भी लड़कियों को कोड़े मारने की सजा दी जा सकती है और इस पर भी दुनिया भर की वामपंथी फेमिनिस्ट इस पर पूरी तरह से चुप्पी साधे हुए हैं। यह बहुत ही भयावह है कि ऐसी असभ्य सजाओं पर भी चुप्पी है।
अनिवार्य हिजाब का विरोध कर रही ईरानी महिलाएं
ईरान में दरअसल महिलाएं अनिवार्य हिजाब के नियमों का विरोध कर रही हैं। और इतना ही नहीं बल्कि वे लोग कई दशकों से अनिवार्य हिजाब का विरोध कर रही हैं। और उन्हें सजा भी हर तरीके की मिल रही है। सजा का न ही कोई रूप है और न ही समय सीमा।
और न ही अपराध की कोई श्रेणी है। अपराध बस इतना भर हो सकता है कि लड़की या महिला ने अपना सिर खुला रख लिया हो। अब सिर खुला रखना इतना बड़ा अपराध है या फिर उसका समर्थन करना ही इतना बड़ा अपराध है कि उसके लिए कोड़े लगाए जाएं?
क्यों मिली थी ईरान की गायिका को यह सजा?
अब इस बात कर आते हैं कि आखिर इस ईरानी गायिका को सजा क्यों मिली थी? दरअसल ईरान की एक गायिका परस्तू अहमदी ने दिसंबर 2024 में एक लाइव कॉन्सर्ट में स्लीवलेस ड्रेस पहनकर गाना गाया था। एक तो सिर नहीं ढका और दूसरी तरफ स्लीवलेस ड्रेस? यह कैसे सरकार और सरकार का समर्थन कर रहे कट्टरपंथी बर्दाश्त कर सकते थे? ईरान के कानून यह स्पष्ट करते हैं कि लड़कियों को सिर ढककर चलना ही होगा और केवल सिर ढकना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि कैसे बाल नहीं दिखने हैं, ये भी सुनिश्चित करना होगा।
और जब यह वीडियो लाखों बार देखा गया, असंख्य बार फॉरवर्ड हुआ और वायरल हुआ, तो देखते ही देखते सरकार में बैठे लोग गुस्से से भर गए और परस्तू को अश्लीलता फैलाने के आरोप में हिरासत में ले लिया। उन पर आरोप लगाए गए कि उनके गाने के कारण देश के कानूनी और सांस्कृतिक नियमों का उल्लंघन हुआ है।
आखिर क्या दोष है परस्तू का
परस्तू का असली दोष क्या था? क्या असली दोष उसका गाना गाना या फिर स्लीवलेस ड्रेस पहनना था? नहीं परस्तू का असली दोष यह था कि उन्होनें सरकार की आँखों में आँखें ही नहीं डाली थीं, बल्कि उनके इस रूप ने कहीं न कहीं असंख्य लड़कियों को भी बेखौफ कर दिया था।
उन्हें हिरासत में लिया गया था और उसके बाद जून में कुम की एक आपराधिक अदालत ने उन्हें और उनके बैंड के आठ और लोगों को अश्लीलता फैलाने के आरोप में दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। उन्हें कोड़े मारने की सजा के साथ ही उनपर तमाम प्रतिबंध भी लगा दिए थे, जैसे कि वे दो साल तक किसी भी ऐसी गतिविधियों में हिस्सा नहीं बन पाएंगी और साथ ही न ही वे देश छोड़कर जा पाएंगी।
उनकी इस सजा के खिलाफ याचिका दायर की गई थी। मगर पिछले शुक्रवार उनकी यह अपील उच्च अदालत ने बिना किसी सुनवाई के खाफीज कर दी और निचली अदालत के ही निर्णय को अंतिम और लागू करने योग्य घोषित कर दिया।
उनके वकील ने यह तर्क दिया था कि किसी म्यूज़िक कॉन्सर्ट को करना कोई अपराध नहीं है। उन्हें इस सजा को मानवाधिकारों के खिलाफ बताया था। परंतु उनकी तमाम अपीलें बेकार गईं और परस्तू की सजा को बरकरार रखा गया।
सोशल मीडिया पर परस्तू की सजा के खिलाफ गुस्सा
ईरान में इस सजा को बरकरार रखने को लेकर सोशल मीडिया पर गुस्सा देखा जा रहा है। न केवल स्थानीय लोग इसके खिलाफ हैं, बल्कि मानवाधिकार संगठन भी इस सजा को लेकर गुस्से मे हैं। ईरान के इन कानूनों का विरोध करने वाली मसीह अलिनेजाद ने भी एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि ईरान की सबसे प्यारी आवाज वाली गायिका को केवल गाना गाने के चलते 74 कोड़ों की सजा दी गई और उनके संगीतकारों एवं प्रोडक्शन टीम को भी उतनी ही सजा मिली है।
उन्होनें लिखा कि वे चिल्लाना चाहती हैं, और सड़कों पर चीख चीखकर सभी को बताना चाहती हैं कि यह सरकार निर्दोष लोगों को मार रही है, फांसी दे रही है और कोड़े लगा रही है। यह साधारण सरकार नहीं है।
रॉबर्ट स्पेन्सर एक्स पर पोस्ट लिखते हुए पश्चिमी फेमिनिस्ट और इस्लाम का समर्थन करने वाले कथित लिबरल कार्यकर्ताओं पर प्रश्न उठाते हुए कहा कि वे लोग इस्लाम की आलोचना के खिलाफ बहस करते थकते नहीं हैं और वे मुसलमानों को हर उस बहस से बचाते हैं, जो उनकी तहज़ीब और मजहबी प्रक्रियाओं में बसी महिला विरोधी बातों के विषय मे होती हैं।
उन्होंने लिखा कि इस्लाम का बचाव करते हुए, वे इस्लामिक शासन में महिलाओं कि पीड़ा को अनदेखा कर देती हैं। और ईरानी गायिका परस्तू अहमदी की सजा ने एक बार फिर से उस कठिन सच्चाई को उजागर किया है, जिसमें ऐसे समाज की महिलाएं रहती हैं।
Islamic Republic of Iran sentences singer Parastoo Ahmadi to 74 lashes for performing without hijab
by Ashlyn DavisWestern feminists and pro-Islam liberal activists don’t get tired of arguing against criticism of Islam and shield Muslims from debates about the misogyny deeply… pic.twitter.com/mydui7Ex6h
— Robert Spencer (@jihadwatchRS) June 29, 2026
पिछले कई दिनों से कई पोर्टल्स एवं मीडिया यह स्थापित करने का प्रयास कर रही थीं कि ईरान में अब महिलाएं बिना हिजाब के घूम सकती हैं। मगर परस्तू के लिए आए इस निर्णय ने कहीं न कहीं स्थापित किया कि ऐसा बिल्कुल भी नहीं है।
पत्रकार एमिली श्चर्यदेर ने भी लिखा कि परस्तू को जो 74 कोड़े लगाने की सजा थी, वह अदालत ने बरकरार रखी है। और आप सभी को यह याद रखना चाहिए जब भी आप किसी को यह कहते हुए सुने कि ईरान में अब महिलाएं बिना हिजाब के निकल सकती हैं।











