आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस इंसान के लिए कितना बड़ा खतरा और वरदान हो सकता है, इसको लेकर देश और दुनिया में विमर्शों का बाजार गर्म है। कुछ लोग इसे वरदान की तरह देखते हैं, जबकि दूसरा पक्ष इसे बेहद खतरनाक मानता है। अब इस बात की भी चर्चाएं शुरू हो गई है कि एआई इंसान के दिमाग को प्रभावित कर रहा है। इसी साल जुलाई में ब्राउन यूनिवर्सिटी की शिक्षण और सीखने में जेनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समिति ने एक रिपोर्ट जारी की। इसमें पता चला कि आधे से ज्यादा अंडरग्रेजुएट स्टूडेंट्स नियमित रूप से जनरेटिव एआई टूल्स इस्तेमाल करते हैं। रिपोर्ट के फीडबैक में कई छात्रों ने पूछा कि एआई का इस्तेमाल दिमाग पर नकारात्मक असर तो नहीं डाल रहा, और लंबे समय में सीखने की क्षमता पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।
कॉग्निटिव ऑफलोडिंग क्या है?
कंप्यूटर साइंस की डॉक्टोरल कैंडिडेट मेगन वेई कहती हैं कि जब छात्र असाइनमेंट के लिए बड़े भाषा मॉडल इस्तेमाल करते हैं, तो असल में काम एआई को सौंप देते हैं। खुद क्लास का मैटेरियल नहीं सीखते। वेई और उनके सह-लेखकों ने एक पेपर में कॉग्निटिव ऑफलोडिंग को ऐसे बताया—किसी काम का दिमागी मेहनत वाला हिस्सा एआई जैसे दूसरे साधन पर डाल देना। इससे यूजर की मेहनत और शामिल होने का स्तर कम हो जाता है।
मेलानी सुब्बियाह, जो उसी पेपर की सह-लेखिका और LUNAR लैब की पोस्टडॉक्टरल असोसिएट हैं, कहती हैं कि असर इस बात पर निर्भर करता है कि यूजर कितनी मेहनत कर रहा है। अगर सही तरीके से इस्तेमाल करें तो पूरा ऑफलोडिंग जरूरी नहीं होता। एआई की राइटिंग अक्सर आधी सही-आधी गलत होती है, इसलिए यूजर को आउटपुट की क्वालिटी जाँचनी पड़ती है। जब कोई पूरा काम खुद संभालता है तो उसमें भी काफी मेहनत लगती है। ऑफलोडिंग कितना होगा, ये इस पर निर्भर करता है कि कोई कितना शॉर्टकट ले रहा है।
छात्रों और रिसर्चर्स के अनुभव
जोई वीसमैन ’28 ने देखा कि कई साथी सुविधा के लिए सोचने की स्किल मशीन पर छोड़ देते हैं। एक एंथ्रोपोलॉजी क्लास में किसी ने बातचीत के पॉइंट्स भी चैटजीपीटी से निकलवाए।
एनेनबर्ग इंस्टीट्यूट की पोस्टडॉक्टरल रिसर्च असोसिएट एनालीस पॉलसन बताती हैं कि सीखने के लिए दिमागी मेहनत वाले अनुभव जरूरी होते हैं, जो दिमाग को कुछ हद तक बदलते हैं। जैसे गुणा की टेबल याद करना। उनके मुताबिक, दो मुख्य नजरिए हैं। एक कहता है कि एआई लर्निंग को बढ़ाता है—खासकर उन छात्रों को फीडबैक मिलता है जिन्हें पहले ट्यूशन जैसी सुविधा नहीं थी। रिपोर्ट में भी कई छात्रों ने कहा कि वे नए कॉन्सेप्ट सीखने के लिए एआई इस्तेमाल करते हैं। दूसरा नजरिया कहता है कि एआई लर्निंग की प्रक्रिया को ऑटोमेट कर देता है और दिमागी विकास को सीमित कर सकता है। सबसे अच्छा तब सीखा जाता है जब हम खुद आइडिया बनाते हैं और दिमागी उलझनों से जूझते हैं।
कैट गाओ कहती हैं कि नई चीजें सीखने में एआई मददगार हो सकता है, लेकिन कई साथी डिफॉल्ट रूप से एआई पर निर्भर हो गए हैं। इससे क्लास में एक-दूसरे से बातचीत कम हो रही है, जो दिमागी क्षमता के लिए अच्छा नहीं।
एआई का सही इस्तेमाल कैसे हो?
एंटरप्रेन्योरशिप और एजुकेशन की असिस्टेंट प्रोफेसर सालोनी गुप्ता एक स्टडी कर रही हैं। इसमें 4,000 छात्रों को पहले एक ओपन-एंडेड सवाल दिया गया—कि वे किसी काम को कैसे अप्रोच करेंगे। फिर एआई की मदद से वही काम करने को कहा गया। जिन्होंने पहले अपनी स्ट्रैटेजी सोची, वे एआई के साथ ज्यादा एंगेज्ड रहे। गुप्ता कहती हैं कि जब कोई पीछे हटकर बड़ा पिक्चर देखता है—मेरा लक्ष्य क्या है—तो एआई के साथ काम ज्यादा स्पेसिफिक और सीखने लायक हो जाता है।















