दिल्ली के प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया, जब कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संयोजक अभिजीत दिपके, आइसा नेता नेहा बोरा और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण समेत अन्य लोगों को विरोध का सामना करना पड़ा। कार्यक्रम के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए ‘बंद करो, दफा हो जाओ’ जैसे नारे लगाए।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में अभिजीत दिपके ने पिछले 10 से 15 दिनों से दिल्ली में चल रहे छात्र और युवा आंदोलनों का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे युवाओं को हटाया जा रहा है और कई लोगों को हिरासत में लिया गया है। दिपके ने विपक्षी नेताओं राहुल गांधी, ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल और पिनाराई विजयन का भी उल्लेख करते हुए दावा किया कि आंदोलन के दौरान नेताओं को भी हिरासत में लिया गया। उन्होंने 10 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन के संदर्भ में रेलवे सेवाओं पर असर पड़ने, दिल्ली में मेट्रो स्टेशन बंद किए जाने और जम्मू-कश्मीर से सुरक्षा बलों को बुलाए जाने का दावा भी किया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
महिला पत्रकार की शिकायत का मुद्दा उठा
आइसा नेता नेहा बोरा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक महिला पत्रकार से जुड़े मामले को उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि पत्रकार ने विवेक भगत के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराने के लिए पुलिस से संपर्क किया था, लेकिन बाद में पत्रकार के खिलाफ भी काउंटर एफआईआर दर्ज कर दी गई। बोरा ने निष्पक्ष जांच और शिकायतकर्ताओं को न्याय मिलने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस मामले में भी सभी तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। इस बीच, सीजेपी और अन्य संगठनों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए शनिवार को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में जुटने की अपील की है। लोगों से राष्ट्रीय ध्वज लेकर पहुंचने का आग्रह किया गया है। आम आदमी पार्टी ने भी इस आह्वान का समर्थन किया है।

















