विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने 27 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण के दौरान पाकिस्तान पर बड़ा हमला किया। उन्होंने पाकिस्तान को आतंकवाद का बार-बार इस्तेमाल करने वाला देश बताया और कहा कि आतंकवाद के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस वाले रवैये में कोई ढील नहीं दी जानी चाहिए।
पाकिस्तान और आतंकवाद पर बात
जयशंकर ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ का नाम लिए बिना कहा कि उन्होंने शुक्रवार को अपने भाषण में कश्मीर मुद्दा उठाया था। जयशंकर के मुताबिक शरीफ ने तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया और आतंकवाद को सामान्य बनाने वाले तर्क दिए। साथ ही आतंकवाद के नतीजों से बचने की कोशिश की। जयशंकर ने साफ कहा कि यह बात नहीं चलेगी।
उन्होंने बताया कि आतंकवाद लंबे समय से शांति के लिए खतरा बना हुआ है। सीमा पार उद्देश्य वाला राज्य-प्रायोजित आतंकवाद वैश्विक व्यवस्था के लिए सीधी चुनौती है। भारत आतंकवाद से अपनी रक्षा करने का अधिकार इस्तेमाल करेगा। शरीफ ने अपने भाषण में पिछले साल भारत-पाकिस्तान संघर्ष खत्म होने का श्रेय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समय पर किए गए हस्तक्षेप को दिया था। जयशंकर ने कहा कि ऐसी प्रथाओं में लगे सरकारों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। आतंकवाद के वित्तीय पहलू खास तौर पर उजागर किए जाएं और उनका मुकाबला हो।
उन्होंने जोड़ा कि दोस्ती और सद्भाव आतंकवाद के साथ नहीं चल सकते। ऐसे समझौते जिनकी बुनियाद आतंकवाद पर टिकी हो, उन पर सवाल उठना स्वाभाविक है। आतंकवाद करने वाले को अपनी राह सुधारनी होगी।
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पश्चिम एशिया और यूक्रेन के संघर्ष
जयशंकर ने पश्चिम एशिया और यूक्रेन में चल रहे संघर्षों को खत्म करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि शांति बनाए रखने में नाकामी सिर्फ सुरक्षा को कमजोर नहीं कर रही, बल्कि प्रगति को भी नुकसान पहुंचा रही है और विकास को रोक रही है। वैश्विक दुनिया में युद्ध के असर हर जगह महसूस होते हैं। संघर्ष से दूर रहने वाले देश भी बिना किसी गलती के सजा भुगत रहे हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित होने वालों की आवाज अक्सर सबसे कम सुनी जाती है। अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों और नाविकों को निशाना बनाना बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है।
पश्चिम एशिया के संकट पर बोलते हुए जयशंकर ने टिकाऊ और स्थायी शांति के लिए दो-राज्य समाधान का समर्थन किया।
ग्लोबल साउथ और एआई का दुरुपयोग
जयशंकर ने आज की दुनिया में ग्लोबल साउथ की मुश्किलों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के गलत इस्तेमाल की भी बात की। उन्होंने कहा कि अत्यधिक प्रतिस्पर्धा का नजरिया आ गया है जो संस्थाओं को कमजोर कर रहा है और रुकावटें पैदा कर रहा है।
ग्लोबल साउथ के औद्योगीकरण के अधिकार को गैर-बाजार व्यवहार और बाजार से वंचित करने की वजह से नुकसान हो रहा है। तकनीक का सफर जो उम्मीद जगाने वाला था, अब चिंता का स्रोत बन गया है। एआई का दुरुपयोग पक्षपात बढ़ा रहा है और आपसी सम्मान घटा रहा है। ये रुझान संयुक्त राष्ट्र के उद्देश्यों के लिए अच्छे नहीं हैं।
















