देश में चल रहे आंदोलनों और उनकी फंडिंग को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता और भारत के पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे के बयान ने नई बहस शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि देश में चल रहे आंदोलन को विदेश से फाइनेंशियल मदद मिल रही है और इसके जरिए भारत में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश की जा सकती है।
विदेशी ताकतों को लेकर क्या बोले हरीश साल्वे?
हरीश साल्वे के अनुसार, भारत के कुछ फैसलों से विदेशी ताकतें खुश नहीं हैं। उन्होंने भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर चल रही बातचीत का भी जिक्र किया। उनका मानना है कि जब कोई सरकार बाहरी दबाव में झुकने से इनकार करती है, तो उसे कमजोर करने की कोशिश की जा सकती है। उन्होंने आशंका जताई कि कुछ ताकतें भारत में ऐसा माहौल बनाना चाहती हैं, जिससे सरकार पर दबाव बढ़े। साल्वे ने नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश में हुए राजनीतिक बदलावों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत में भी ऐसे हालात पैदा करने की कोशिश हो सकती है। उन्होंने बांग्लादेश का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह शेख हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी, वैसी स्थिति भारत में भी बन सकती है। इसे लेकर उन्होंने चिंता जताई। हरीश साल्वे ने CJP से जुड़े कुछ लोगों, जिनमें दीपके जी और सौरव दास के नाम शामिल हैं, की भूमिका और उन्हें मिलने वाली आर्थिक मदद पर सवाल उठाए। उन्होंने यह जानने की जरूरत बताई कि इन लोगों को पैसा कहां से मिलता है और इसके पीछे कौन है। साल्वे का कहना है कि पिछले छह से आठ महीनों में उन्हें कुछ गतिविधियों में एक खास पैटर्न दिखाई दिया है।
हरीश साल्वे देश के जाने-माने वकील हैं। वह 1999 से 2002 तक भारत के सॉलिसिटर जनरल रहे। उन्होंने कुलभूषण जाधव मामले में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में भारत का पक्ष रखा था। वह वोडाफोन टैक्स विवाद जैसे बड़े मामलों से भी जुड़े रहे हैं। कानूनी क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें 2015 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।
















