यह श्लोक महाभारत के उद्योग पर्व के अंतर्गत आने वाले ‘विदुर नीति’ (अध्याय 38) से उद्धृत है।
श्लोक :
सोत्साहानां मनाक् कुर्यात् काले सत्त्वपरीक्षणम्।
प्रोत्साहयेन्निरुत्साहान् न वाचाऽपि तु कर्मणा॥
भावार्थ :
उत्साही और सक्षम व्यक्तियों के सामर्थ्य व धैर्य की सही समय आने पर परीक्षा लेनी चाहिए। वहीं, जो हतोत्साहित या निरुत्साही हैं, उन्हें केवल बातों या उपदेशों से नहीं, बल्कि व्यावहारिक कार्यों और अवसरों के माध्यम से प्रेरित करना चाहिए।
आज के युग में प्रासंगिकता (Relevance) :
कुशल नेतृत्व (Leadership): यह श्लोक आधुनिक टीम मैनेजमेंट का बेहतरीन सूत्र है। एक अच्छे लीडर को पता होना चाहिए कि आत्मविश्वासी सदस्यों को कब कठिन चुनौतियाँ देनी हैं और निराश सदस्यों की मदद व्यावहारिक रूप से कैसे करनी है।
क्रियात्मक प्रोत्साहन (Action-Oriented Motivation): केवल खोखले भाषण या सांत्वना देने से किसी का मनोबल नहीं बढ़ता। वास्तविक मदद वह है जहाँ व्यक्ति को साधन, संसाधन या साथ देकर काम पूरा कराया जाए।
समय का चयन (Timeliness): किसी व्यक्ति की योग्यता की परीक्षा सही समय पर ही ली जानी चाहिए, बिना वजह उन पर दबाव बनाना सही नीति नहीं है।

















