नई दिल्ली: बांग्लादेश में एक हिंदू पत्रकार के मौत का मामला सामने आया है। इस घटना ने एक बार फिर से बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। वैसे भी बांग्लादेश में लगातार अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ अत्याचार की घटनाएं सामने आती रहती हैं। पाकिस्तान की तरह ही बांग्लादेश में भी हिंदुओं को टारगेट किलिंग, हिंसा और उनके धार्मिक स्थलों पर हिंसा व तोड़फोड़ एवं मॉब लिचिंग की घटनाओं का सामना करना पड़ता है।
अब हिंदू पत्रकार की मौत का मामला सामने आया है। वहां के प्रमुख दैनिक अखबार ‘समकाल’ के न्यूजरूम में एक वरिष्ठ हिंदू पत्रकार पुलक चटर्जी के शव मिलने से सनसनी फैल गई है। 57 साल के हिंदू पत्रकार का शव बरिसल जिले में स्थित अखबार के ब्यूरो कार्यालय में मिला है। उनका शव ऑफिस में ही फंदे से लटका पाया गया। हालांकि पुलिस का कहना है कि मौत की असली वजह का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही होगा। बांग्लादेशी अखबार ‘ढाका ट्रिब्यून’ ने स्थानीय सूत्रों के हवाले से लिखा है कि चटर्जी को करीब तीन साल पहले ‘समकाल’ अखबार से हटा दिया गया था। वह बरिसल प्रेस क्लब के महासचिव पद पर भी रह चुके थे।

वहीं, बांग्लादेश की अवामी लीग पार्टी ने हिंदू पत्रकार की मौत की परिस्थितियों पर सवाल खड़ा किया है। अवामी लीग पार्टी का कहना है कि यह सामान्य हत्या या आत्महत्या नहीं है। आवामी लीग ने शनिवार को दावा किया कि हिंदू पत्रकार पुलक चटर्जी के शव की जो तस्वीर लीक हुई है, उससे साफ पता चलता है कि यह स्वाभाविक मौत नहीं है। उनके दोनों पैर जमीन पर टिके थे, घुटने मुड़े हुए थे और शरीर लगभग सीधा था। आवामी लीग ने कहा कि कोई भी व्यक्ति इस तरह फंदे पर लटककर नहीं मर सकता। यह साफ तौर पर एक पूर्वनियोजित साजिश है और इसकी जांच होनी चाहिए कि इसे किसने और क्यों अंजाम दिया। पार्टी ने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और जमात-ए-इस्लामी गठबंधन के शासन में अल्पसंख्यकों पर हुई बर्बरता की भी याद दिलाई।
आवामी लीग का कहना है कि बीएनपी ने 2001 से 2006 के पांच साल के शासन में अल्पसंख्यकों पर जो अत्याचार किए थे वो फिर से देखने को मिल रहे हैं। 2026 में भी वैसे ही हालत हैं। हिंदुओं के मंदिरों पर हमले और महिलाओं के खिलाफ भयानक यौन हिंसा ने अनगिनत हिंदुओं को बांग्लादेश छोड़ने के लिए मजबूर किया है। पार्टी ने कहा कि हिंदू पत्रकार पुलक चटर्जी उस दौर में भी पत्रकारिता कर रहे थे और उन घटनाओं के प्रमुख गवाह थे। आवामी लीग ने कहा कि पुलक चटर्जी एक अल्पसंख्यक थे। उनकी हत्या करके हिंदुओं के आवाजों को दबाने की कोशिश की गई है।

















