गजब बेइज्जती है! पाकिस्तानी मौलाना फजलुर रहमान ने आसिम मुनीर का मजाक उड़ाया, 1971 के सरेंडर की याद दिलाई
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गजब बेइज्जती है! पाकिस्तानी मौलाना फजलुर रहमान ने आसिम मुनीर का मजाक उड़ाया, 1971 के सरेंडर की याद दिलाई

पाकिस्तान के मौलाना फजलुर रहमान ने फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के दावों का मजाक उड़ाया। उन्होंने 1971 के युद्ध और जनरल याह्या खान के बयान की याद दिलाते हुए सेना के रवैये पर सवाल उठाए।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Aug 25, 2026, 10:13 am IST
inविश्व

दुनियाभर में आए दिन अपना मजाक बनवाने वाले पाकिस्तानी सेना के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का मजाक सरेआम उसके ही देश में उड़ाया गया है। ये सब किया है पाकिस्तान के वरिष्ठ नेता और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (एफ) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने। उन्होंने मुनीर के बड़े-बड़े दावों को लेकर उनका मजाक उड़ाते हुए पाकिस्तानी सेना के रवैये पर सवाल उठाए और 1971 के युद्ध की याद दिलाई।

मौलाना फजलुर रहमान ने कहा कि सेना वाले हमेशा बड़े-बड़े दावे करते हैं कि वे देश की रक्षा करेंगे और कोई उन्हें नुकसान नहीं पहुंचा सकता। उन्होंने कहा, “हम इस देश की रक्षा करने वाले हैं। किसी के बाप में भी इतनी ताकत नहीं है कि वह इस देश को नुकसान पहुंचा सके। मैं मानता हूं कि आप बहुत ताकतवर हैं।”

लेकिन दूसरी तरफ देश की जनता बहुत सारी परेशानियों से गुजर रही है। उन्होंने पूछा कि जब जनता इतनी तकलीफ में है तो सेना वाले मजे क्यों कर रहे हैं और जनता की परीक्षा क्यों ले रहे हैं।

1971 के सरेंडर की याद

उन्होंने असीम मुनीर के मौजूदा रवैये की तुलना 1971 के युद्ध से की। उस साल भारत और पाकिस्तान के बीच 13 दिन तक युद्ध चला था। 16 दिसंबर 1971 को ढाका में करीब 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों ने भारत के सामने हथियार डाल दिए थे। इसके बाद पाकिस्तान का पूर्वी हिस्सा अलग हो गया और बांग्लादेश बन गया।

मौलाना ने याद दिलाया कि सरेंडर से ठीक एक दिन पहले जनरल याह्या खान ने सेना को संबोधित करते हुए कहा था कि हम सड़कों पर, रेगिस्तान में, खेतों में, कारखानों में, पहाड़ों में हर जगह लड़ेंगे। उन्होंने कहा, “मुझे याद है और शायद कुछ बुजुर्गों को भी याद होगा कि दिसंबर 1971 में हथियार डालने से एक दिन पहले जनरल याह्या खान ने ये बड़ी-बड़ी बातें कही थीं।”

लंबे संघर्ष और अत्याचार की बात

मौलाना फजलुर रहमान ने आगे कहा कि आज 2026 का साल है। 1989 में अफगानिस्तान में जो युद्ध शुरू हुआ था, उसके बाद से करीब 45-46 साल यानी लगभग आधी सदी से इस इलाके में खून बह रहा है। उन्होंने बताया कि जब लंबे समय तक खून बहता रहता है और अत्याचार चलता रहता है तो इससे भौगोलिक बदलाव का संकेत मिलता है। यानी देश के नक्शे में फिर से बदलाव हो सकता है।

उन्होंने कहा कि लोग अत्याचार सह रहे हैं और आगे भी सहते रहेंगे। उन्होंने कहा, “यह अत्याचार का संकेत है। कम से कम हमें अपने इरादों के बारे में बता दीजिए। हम इसे सह रहे हैं और आगे भी सहते रहेंगे। मेरे प्यारे, कुछ और दिन, बस कुछ और दिन। हम अत्याचार की छाया में सांस लेने के लिए मजबूर हैं। अगर हम थोड़े समय और इस अत्याचार को सह लें, अगर हम तकलीफ सहें, अगर हम रोएं, तो यह हमारे पूर्वजों की विरासत है। हम मजबूर हैं।”

मौलाना ने बार-बार कहा कि लगातार सरकारी अत्याचार और संघर्ष से देश की एकता को खतरा हो सकता है। उन्होंने सेना से अपील की कि जनता की तकलीफों पर ध्यान दिया जाए।

Topics: 1971 युद्धमौलाना फजलुर रहमानजनरल याह्या खानआसिम मुनीर मजाकपाकिस्तानी सेनाबांग्लादेशआसिम मुनीर
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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