नेपाल में अचानक आई बाढ़ ने कई इलाकों में तबाही मचा दी है। तेज पानी के कारण कहीं पुल बह गए तो कहीं सड़कें डूब गईं। कई गाड़ियां भी पानी के तेज बहाव में बहती नजर आईं। इस बाढ़ में अब तक 7 लोगों की मौत की खबर है। वहीं, करीब 300 विदेशी पर्यटकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इनमें 105 भारतीय नागरिक भी बताए जा रहे हैं।
कैलाश मानसरोवर जा रहे तीर्थयात्री भी फंसे
बाढ़ के कारण कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे कई तीर्थयात्रियों से भी संपर्क टूट गया है। काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, तिब्बत जाने वाले करीब 390 तीर्थयात्री रसुवागढ़ी इलाके में संपर्क से बाहर हो गए हैं। टच कैलाश ट्रैवल्स एंड टूर्स के मैनेजिंग डायरेक्टर बाशु कुमार अधिकारी ने बताया कि बुधवार को 93 नेपाली नागरिकों समेत 390 तीर्थयात्रियों को बॉर्डर पार करना था। लेकिन दोपहर करीब 3 बजे तक कुछ लोगों को छोड़कर बाकी तीर्थयात्रियों से संपर्क नहीं हो पाया था। नेपाल ट्रेकिंग एजेंसीज एसोसिएशन के अध्यक्ष सागर पांडे ने कहा कि तीर्थयात्रियों से संपर्क करने और उनकी स्थिति का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार, उत्तरी नेपाल में सुबह करीब 9 बजे भोटे कोशी नदी का पानी अचानक बढ़ गया। बताया जा रहा है कि बाढ़ का पानी तिब्बत की ओर से आया था। पानी बढ़ने से रसुवा जिले के तिमुरे और स्याफ्रुबेसी इलाके में काफी नुकसान हुआ। तेज बहाव के चलते सड़कें डूब गईं और कई पुलों को नुकसान पहुंचा। कुछ जगहों पर कार और ट्रक पानी में बहते दिखाई दिए। अचानक आई बाढ़ के कारण कई लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण ने रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, चितवन और गोरखा के नदी किनारे रहने वाले लोगों को सावधान रहने को कहा है। बाढ़ का असर त्रिशूली नदी बेसिन के आसपास के इलाकों में भी पड़ा है। प्रशासन और बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में हालात पर नजर रख रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता उन पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को लेकर है, जिनसे अभी तक संपर्क नहीं हो पाया है। राहत और बचाव टीमों की कोशिश है कि जल्द से जल्द लापता लोगों का पता लगाया जाए और उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा सके।















