पाञ्चजन्य इस सप्ताह | 6 सितंबर 2026 इस सप्ताह पाञ्चजन्य के विशेष अंक की कवर स्टोरी है—‘वंदे मातरम्’। आखिर एक गीत से आगे बढ़कर यह भारत की राष्ट्रीय चेतना और स्वतंत्रता आंदोलन का इतना महत्वपूर्ण प्रतीक कैसे बना? इसके इतिहास से लेकर आज खड़े किए जा रहे विवादों तक, इस अंक में पूरे विषय को तथ्यों और ऐतिहासिक संदर्भों के साथ समझने की कोशिश की गई है। संपादक हितेश शंकर जी की संपादकीय में वंदे मातरम् के इतिहास, कांग्रेस की भूमिका, इसके राजनीतिक विभाजन, मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों के जुड़ाव और जिन्ना के रुख समेत कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा है। अंक में वंदे मातरम् की सांस्कृतिक चेतना और इसके विभिन्न छंदों के अर्थ को भी समझाया गया है। साथ ही वरिष्ठ अधिवक्ता डीके दुबे जी के लेख में राष्ट्रगीत के संवैधानिक स्वरूप और 2026 में इससे जुड़े कानूनी प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई है। इसके अलावा इस अंक में ‘तुष्टिकरण की राजनीति का अंत कब?’ जैसे अहम सवाल पर भी चर्चा है। लेकिन कहानी सिर्फ वंदे मातरम् तक सीमित नहीं है। नेपाल आपदा और भारत की मदद नेपाल में आई भीषण बाढ़ और प्राकृतिक आपदा के बीच भारत की राहत एवं सहायता, RSS, VHP और ABVP की ओर से सहयोग के प्रयास और संकट की पूरी तस्वीर। न्यूयॉर्क में Universal Oneness Celebration RSS सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के न्यूयॉर्क कार्यक्रम, उसके उद्देश्य, आयोजकों और कार्यक्रम को लेकर उठे सवालों पर खास रिपोर्ट। नकाब के पीछे छिपा नक्सल तंत्र’ ‘दिमागी नक्सल’ के नाम से चर्चा में आने वाले कथित वैचारिक नेटवर्क और उसके काम करने के तरीके पर वरिष्ठ पत्रकार मृदुल त्यागी का विश्लेषण। इसके अलावा अंक में आतंकवाद के तंत्र, ऑपरेशन सिंदूर पर बनी डॉक्यूमेंट्री, स्त्री अस्मिता की भारतीय दृष्टि, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की चुनौतियों और पूर्वोत्तर में संघ कार्यकर्ताओं के बलिदान जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी लेख शामिल हैं।
देखिए ‘पाञ्चजन्य इस सप्ताह’ और जानिए 6 सितंबर के विशेष अंक में देश और दुनिया से जुड़े इन अहम मुद्दों की पूरी कहानी।















