पाञ्चजन्य भारतीय पत्रकारिता की लंबी और विशिष्ट यात्रा का साक्षी रहा है। वर्ष 1948 में लखनऊ से साप्ताहिक पत्र के रूप में इसकी शुरुआत हुई और अटल जी इसके प्रथम संपादक थे। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने भी इसके प्रारंभिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दशकों की यात्रा में पाञ्चजन्य ने राष्ट्रीय हित, समाज, संस्कृति, अर्थव्यवस्था और शासन से जुड़े विषयों पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य रखा है। इसका अर्थ केवल ऊंची जीडीपी नहीं, बल्कि समृद्ध, सक्षम, समावेशी और तकनीकी रूप से मजबूत भारत का निर्माण है। विकास की वास्तविक कसौटी यह है कि सरकार की योजनाओं और नीतियों का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंचे। यही सुशासन है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय के ‘अंत्योदय’ का विचार भी इसी भावना को सामने रखता है-समाज के अंतिम व्यक्ति को प्राथमिकता देकर उसे विकास की मुख्यधारा से जोड़ना। पूर्वोत्तर जैसे भौगोलिक और जनजातीय विविधता वाले क्षेत्रों में यह चुनौती और कठिन है। इसलिए शासन की सफलता इसी में है कि योजनाओं का लाभ वास्तव में उन लोगों तक पहुंचे, जिनके लिए वे बनाई गई हैं।
इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री का मंत्र है-“सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास।” हमारी सभ्यता में भी सबको साथ लेकर चलने की भावना रही है-“सर्वे भवन्तु सुखिनः…”। आज यही भावना शासन और समाज की साझेदारी में दिखाई देती है।
स्वयं सहायता समूह इसका उदाहरण हैं। जब समाज ने पहल की और सरकार ने सहयोग दिया, तो ये समूह आत्मनिर्भरता और सामाजिक-आर्थिक बदलाव के माध्यम बने। त्रिपुरा में मेरे कार्यकाल के दौरान स्वयं सहायता समूहों की संख्या लगभग 3,000 से बढ़कर 56,000 हुई। शुरुआत में बैंक ऋण देने में हिचकिचाते थे। मैंने उनसे कहा-“आप चिंता मत कीजिए, हम गारंटर हैं।” इसके बाद इन समूहों में ऋण चूक की दर एक प्रतिशत से भी कम रही। यह बताता है कि सरकार समाज पर विश्वास करे और समाज उस विश्वास को जिम्मेदारी से निभाए, तो बड़े बदलाव संभव हैं।
क्रांति केवल सड़कों पर नहीं होती। सकारात्मक परिवर्तन भी एक क्रांति है, जो चर्चा, विचार-विमर्श, निर्णय और उसे कार्यरूप देने से आता है। इसलिए शासन को नागरिकों पर विश्वास करना होगा और नागरिकों को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। महिलाओं को अवसर, संसाधन और विश्वास मिला तो उन्होंने आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाया। आज ये समूह आर्थिक गतिविधि के साथ महिला सशक्तीकरण और सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बन रहे हैं।
सरकार का काम केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचाना, नागरिकों को अवसर देना और समाज को विकास में भागीदार बनाना है। यही सुशासन का सार है-विश्वास, सहभागिता, समावेशिता और अंतिम व्यक्ति तक विकास की पहुंच।
















