गत 19-21 अगस्त तक विशाखापट्टणम (आंध्र प्रदेश) के समीप विज्ञान विहार आवासीय विद्यालय परिसर, गुडिलोवा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से प्रेरित विभिन्न संगठनों की तीन दिवसीय अखिल भारतीय समन्वय बैठक आयोजित हुई। बैठक में सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत तथा सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले की विशेष उपस्थिति रही। इसमें समाज और राष्ट्र के लिए विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत संघ प्रेरित संगठनों के प्रमुख पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। बैठक के लिए कुल 326 प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया था, जिनमें विभिन्न संगठनों से महिला नेतृत्व भी शामिल रहा। बैठक में 49 महिला प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। बैठक के दौरान देश और समाज की वर्तमान परिस्थितियों, विभिन्न संगठनों द्वारा किए जा रहे कार्यों, उनके अनुभवों, भविष्य की चुनौतियों तथा आगामी कार्ययोजना पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।
प्रमुख विषयों पर हुआ चिंतन-मंथन
21 अगस्त को पत्रकार वार्ता में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह श्री मुकुंदा सी. आर. ने बताया कि बैठक में प्राकृतिक आपदाओं के समय समाज आधारित सेवा और पुनर्वास कार्यों की समीक्षा की गई। असम में आई भीषण बाढ़ के दौरान राष्ट्रीय सेवा भारती, भारतीय किसान संघ, नेशनल मेडिकोज ऑर्गेनाइजेशन (एनएमओ), आरोग्य भारती सहित विभिन्न संगठनों और कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए राहत एवं पुनर्वास कार्यों की जानकारी साझा की गई।
संत रविदास की 650वीं जयंती के संदर्भ में सामाजिक समरसता एवं सामाजिक सौहार्द के लिए देशभर में किए गए कार्यक्रमों और समाज से मिले सकारात्मक प्रतिसाद की समीक्षा की गई। बैठक में जनसांख्यिकीय परिवर्तन एवं असंतुलन पर भी गंभीर चर्चा हुई। विश्व के अनेक देशों में वृद्ध होती जनसंख्या तथा घटती प्रजनन दर से उत्पन्न चुनौतियों के संदर्भ में भारत की परिस्थितियों पर विचार किया गया। विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों में जनसंख्या के अनुपात में हो रहे परिवर्तनों तथा उनके सामाजिक प्रभावों पर चर्चा करते हुए समाज में संतुलन और सौहार्द बनाए रखने के उपायों पर विचार हुआ।

नशामुक्त समाज के लिए प्रयास
देश में युवाओं और विद्यार्थियों तक मादक पदार्थों की बढ़ती पहुंच पर बैठक में गंभीर चिंता व्यक्त की गई। इस समस्या को केवल सरकार या पुलिस के स्तर पर नहीं, बल्कि पूरे समाज की सहभागिता से हल करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। शिक्षण संस्थानों, अभिभावकों, सामाजिक संगठनों, प्रशासन, पुलिस तथा अन्य संबंधित पक्षों को साथ लेकर नशामुक्त समाज के लिए समन्वित प्रयास करने की आवश्यकता पर चर्चा हुई।
आकांक्षाओं और चिंताओं पर चर्चा
युवा पीढ़ी की सोच, आकांक्षाओं, सृजनात्मक क्षमता, भविष्य संबंधी चिंताओं तथा राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका पर विस्तृत विचार हुआ। संघ का कार्य बड़ी संख्या में युवाओं के बीच चल रहा है। इस वर्ष संघ के 21 दिवसीय प्रशिक्षण वर्गों में लगभग 21,000 युवा स्वयंसेवकों ने भाग लिया। देशभर की दैनिक शाखाओं में उपस्थित स्वयंसेवकों में 60 प्रतिशत से अधिक युवा हैं। युवाओं के साथ केवल उपदेशात्मक संवाद के बजाय उनके साथ प्रत्यक्ष जुड़ाव, उनकी भावनाओं और चिंताओं को समझना तथा संवाद के माध्यम से देश, संस्कृति और सामाजिक मूल्यों के प्रति आत्मीयता विकसित करना आवश्यक बताया गया।
शिक्षा बनी सामाजिक परिवर्तन का माध्यम
विशाखापट्टनम के पास गुडिलोवा स्थित विज्ञान विहार का अपना एक सामाजिक और शैक्षणिक महत्व है। 1980 में स्थापित विज्ञान विहार की कल्पना केवल एक आवासीय विद्यालय के रूप में नहीं की गई थी। इसे भारतीय चिंतन, सामाजिक जिम्मेदारी, सांस्कृतिक मूल्यों और आध्यात्मिक आधार से जुड़ी पारंपरिक गुरुकुल व्यवस्था के आधुनिक रूप के तौर पर विकसित किया गया।
पिछले 46 वर्ष में इस संस्था और इससे जुड़े सेवा कार्यों ने शिक्षा को आसपास के ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों के सामाजिक बदलाव का माध्यम बनाने का प्रयास किया है। इसकी शुरुआत 1977 में आए दिविसीमा चक्रवात और बाढ़ के बाद हुई। अनकापल्ले के पास विजयराम राजूपेटा की बस्ती पूरी तरह तबाह हो गई थी। इसके बाद राष्ट्र सेवा समिति ने वहां रिकॉर्ड समय में 120 पक्के मकान और एक सामुदायिक भवन का निर्माण कराया।
इस विचार ने 1979 में आकार लिया। जमीन की व्यवस्था के बाद 1980 में करीब 50 एकड़ क्षेत्र में विज्ञान विहार का आवासीय विद्यालय शुरू हुआ। इसका उद्देश्य शुरू से ही अलग था। यहां पढ़ाई के साथ व्यक्तित्व विकास, जीवन-मूल्य, जीवन कौशल और सामाजिक जिम्मेदारी पर भी जोर दिया गया। आज यहां 14 राज्यों के विद्यार्थी पढ़ते हैं, जबकि इसके पूर्व छात्र 22 देशों में फैले हुए हैं। इसके तहत 42 गांवों में बाल संस्कार केंद्र, मातृ मंडल, भजन मंडल, ट्यूशन केंद्र, विद्यार्थी विकास केंद्र, सिलाई केंद्र और चिकित्सा केंद्र विकसित किए गए हैं।
1984 में डॉ. हेडगेवार अस्पताल की स्थापना की गई। 20 बिस्तरों वाले इस अस्पताल के माध्यम से आसपास के गांवों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का प्रयास किया गया। इसके बाद 1989 में सरस्वती विद्या विहार शुरू हुआ। अंग्रेजी माध्यम का यह विद्यालय तीन मंडलों के 64 गांवों के बच्चों को शिक्षा देता है। संस्था ने शिक्षा के साथ संस्कृति और जनजातीय क्षेत्रों में भी काम बढ़ाया।
1990 में भारती कला संगीत एवं नृत्य विद्यालय शुरू किया गया। 1993 में 220 गांवों के जनजातीय बच्चों के लिए विद्यालय और छात्रावास की स्थापना की गई। विज्ञान विहार के काम में आर्थिक आत्मनिर्भरता को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। अनकापल्ले की अनुसूचित जाति बस्ती में 1978 से सिलाई प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके अलावा कंप्यूटर और सिलाई केंद्र भी स्थापित किए गए हैं। वात्सल्य विहार नाम से एक अनाथालय भी चलाया जा रहा है। इसमें फिलहाल करीब 20 बच्चे रहते हैं।
पर्यावरण हितैषी और समावेशी विकास
बैठक में भारतीय दृष्टि पर आधारित विकास मॉडल पर भी चर्चा हुई। विकास आत्मनिर्भर, पर्यावरण हितैषी और समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने वाला होना चाहिए-इस दिशा में आर्थिक क्षेत्र में कार्यरत संगठनों के अनुभवों पर विचार हुआ। कई संगठनों द्वारा विभिन्न प्रकार के समाज उपयोगी कार्य किए जा रहे हैं, जैसे लघु उद्योग भारती द्वारा सूक्ष्म उद्योगों के क्षेत्र में संचालित कौशल विकास केंद्रों के माध्यम से इस वर्ष 41,000 से अधिक लोगों को कौशल प्रशिक्षण दिए जाने की जानकारी भी साझा की गई।
पंच परिवर्तन और कुटुंब प्रबोधन
संघ शताब्दी वर्ष के संदर्भ में समाज परिवर्तन के लिए निर्धारित ‘पंच परिवर्तन’ के विभिन्न आयामों पर बैठक में विशेष चर्चा हुई। विशेष रूप से कुटुंब प्रबोधन के अंतर्गत भारतीय परिवार व्यवस्था, पारिवारिक मूल्यों तथा पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक परंपराओं को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर विचार हुआ। पर्यावरण के संदर्भ में प्रत्येक व्यक्ति और परिवार के दैनिक जीवन में परिवर्तन लाने पर बल दिया गया। जल का विवेकपूर्ण उपयोग, प्लास्टिक का न्यूनतम उपयोग और हरित क्षेत्र बढ़ाना जैसे विषय प्रत्येक परिवार के व्यवहार का हिस्सा बनने चाहिए।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर चर्चा
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के समाज पर बढ़ते प्रभाव को लेकर बैठक में विस्तृत प्रस्तुति और चर्चा हुई।
एआई की सकारात्मक संभावनाओं के साथ उससे जुड़ी सावधानियों और चुनौतियों पर विचार करते हुए इसे भारतीय दृष्टिकोण और भारतीय सामाजिक संदर्भ में देखने की आवश्यकता पर बल दिया गया। तकनीक का उपयोग समाज हित में कैसे हो और उसके संभावित दुष्प्रभावों के प्रति समाज को कैसे जागरूक किया जाए, इस विषय पर आगे भी चिंतन जारी रहेगा। संघ प्रेरित 32 संगठनों द्वारा समाज के विविध क्षेत्रों में किए जा रहे कार्यों के विस्तार पर भी चर्चा हुई। राष्ट्रीय दृष्टि और समाज केंद्रित चिंतन को समाज के अधिकाधिक क्षेत्रों तक पहुंचाने तथा संगठनात्मक कार्य का विस्तार करने के लिए आगामी वर्ष की योजनाओं पर विचार किया गया।

















