खाड़ी संकट लगातार गहराता जा रहा है। अमेरिका लगातार ईरान पर हमले कर रहा है। लेकिन, इसका असर ये हो रहा है कि दुनियाभर में तेल की सप्लाई बुरी तरह से बाधित हुई है। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें 7 प्रतिशत तक बढ़कर 100 डॉलर के पार हो गई है।
क्या कह रही अमेरिकी सेना
अमेरिकी सेना (CENTCOM) के अनुसार, ये हमले इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा वाणिज्यिक जहाजों को दी जा रही धमकियों का जवाब हैं। ईरान पर आरोप है कि उसके बलों ने क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया, जिससे कई समस्याएं पैदा हुईं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी के बाद ये कार्रवाई की जा रही है। हमले का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना और उसे जवाबदेह ठहराना है।
अमेरिकी वायुसेना ने ईरान के सैन्य बुनियादी ढांचे, कमांड सेंटर्स, एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल और ड्रोन सुविधाओं, तटीय निगरानी साइटों आदि को लक्ष्य बनाया। ये हमले रात के समय किए जा रहे हैं और कई दिनों से लगातार जारी हैं।
होर्मुज का महत्व
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के बड़े हिस्से का तेल निर्यात करने वाला रास्ता है। यहां तनाव बढ़ने से जहाजों का आवागमन प्रभावित हो रहा है। ईरान के इलाके में होने वाले इन हमलों के कारण व्यापारिक मार्गों पर दबाव बढ़ गया है। बाब अल मंदेब जैसे अन्य क्षेत्रों में भी जहाजों की सुरक्षा की चिंता है।
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तेल की कीमतों पर असर
इस तनाव का सीधा असर वैश्विक बाजार पर पड़ा है। कच्चे तेल की कीमत सात प्रतिशत तक बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई। अमेरिकी क्रूड भी 90 डॉलर से ऊपर पहुंच गया। मई के बाद ये दूसरी बार है जब कीमत इस स्तर पर आई है। बाजार में आशंका है कि आगे ये 120 डॉलर तक भी जा सकती है, जिससे पूरी दुनिया में ईंधन और दूसरे सामानों की कीमतें प्रभावित होंगी।
दोनों तरफ की स्थिति
अमेरिका इन हमलों को ईरान की आक्रामक गतिविधियों का जवाब बता रहा है। वहीं ईरान की तरफ से भी जवाबी कार्रवाई की आशंका बनी हुई है। क्षेत्र में पहले से ही कई देश प्रभावित हो रहे हैं। आम लोगों की जिंदगी पर इसका बोझ बढ़ रहा है – चाहे वो तेल की महंगाई हो या क्षेत्र में अस्थिरता।

















