किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) का शिखर सम्मेलन चल रहा है। जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से अलग-अलग मुलाकात की। दोनों मुलाकातों में युद्ध और क्षेत्रीय अशांति के मुद्दे प्रमुख रहे। इस दौरान ईरानी राष्ट्रपति ने पीएम मोदी से इस जंग को रुकवाने में मदद करने की अपील की।
ईरानी राष्ट्रपति की अपील
पिछले करीब छह महीनों से अमेरिका और इजरायल के साथ युद्ध झेल रहे ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने प्रधानमंत्री मोदी से सीधी अपील की। उन्होंने कहा कि मोदी अपने संपर्कों का इस्तेमाल करके इस युद्ध को खत्म करवाने में मदद करें। यह दोनों नेताओं की पहली आमने-सामने मुलाकात थी।
बैठक में पेजेश्कियान ने ईरान पर हुए हमलों और नौवहन की स्वतंत्रता का मुद्दा उठाया। मोदी ने भी नाविकों पर हमलों और समुद्री रास्तों की सुरक्षा की बात कही। भारत के लिए यह विषय इसलिए अहम है क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। भारत का काफी कच्चा तेल और ऊर्जा आयात यहीं से होता है। युद्ध की वजह से शिपिंग प्रभावित होने से न सिर्फ ऊर्जा सुरक्षा पर असर पड़ता है, बल्कि इस इलाके में काम कर रहे भारतीय नाविकों और व्यापारिक जहाजों पर भी खतरा बढ़ जाता है। होर्मुज के पास तीन भारतीय जहाजों पर हुए हमले में सात नाविकों की मौत हो चुकी है।
मोदी ने पेजेश्कियान को अगले हफ्ते ब्राजील में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन के लिए भी आमंत्रित किया। दोनों तरफ से द्विपक्षीय मुद्दे भी चर्चा में रहे। इनमें समुद्री सहयोग, होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति और चाबहार बंदरगाह शामिल थे। ईरान सरकार के मुताबिक, राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि उसने युद्ध एवं दबाव का रास्ता चुना है, जबकि ईरान समझौतों के लिए प्रतिबद्ध रहा है।
ईरान ने राजनीतिक, आर्थिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई। प्रधानमंत्री मोदी ने भी भारत-ईरान की पुरानी दोस्ती को विभिन्न क्षेत्रों में मजबूत करने और व्यापार बास्केट को विस्तार देने की बात कही। भारतीय विदेश मंत्रालय ने बताया कि बैठक की जानकारी दोनों सरकारों ने अलग-अलग अंदाज में दी।
पुतिन से बातचीत
उसी दिन बिश्केक में मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात की। यूक्रेन युद्ध चार साल से ज्यादा समय से चल रहा है। मोदी ने पुतिन को फिर से शांति का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अंतहीन युद्ध से युद्ध के अंत की तरफ बढ़ना ही होगा।
समरकंद में कहा था-ये युद्ध का काल नहीं
2022 में भी एससीओ शिखर सम्मेलन (समरकंद) के दौरान पुतिन से मोदी ने यही बात कही थी कि यह युद्ध का काल नहीं है। उस समय वैश्विक नेताओं ने इसे साहसिक बयान माना था। इस बार भी मोदी ने कहा कि उन्होंने यूक्रेन के मुद्दे पर लगातार चर्चा की है। पिछली मुलाकात में पुतिन ने उन्हें इस मामले के सभी पहलुओं से अवगत कराया था।
मोदी ने जोर देकर कहा कि भारत शांति के सभी प्रयासों का समर्थन करता है और आगे भी करता रहेगा। युद्ध में बीता हर दिन मानवता को पीछे धकेलता है, जबकि शांति की दिशा में उठाया गया कदम मानवता को नई उम्मीद और उत्साह से भर देता है। उन्होंने कहा कि युद्ध के अंत की ओर बढ़ना चाहिए। यह मानवता की भलाई के लिए जरूरी है। सभी मुद्दों का शीघ्र शांतिपूर्ण हल ही मानवता की पुकार है और यही भारत का संदेश है। गांधी और बुद्ध की भूमि का एक ही संदेश है – शांति का मार्ग।
इस पर पुतिन ने जवाब दिया, “बहुत-बहुत धन्यवाद, प्रधानमंत्री। हम इसी रास्ते पर बढ़ रहे हैं।”

















