रांची के निवारणपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत कार्यालय पर देर रात पेट्रोल बम फेंककर हमला किया गया। इस हमले ने सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल सिर्फ इतना नहीं कि हमला हुआ, सवाल यह है कि हमलावरों को इतनी हिम्मत आई कैसे? वह भी एक बड़े संगठन के कार्यालय पर। जानकारी के अनुसार, दो अज्ञात लोग पेट्रोल बम लेकर पहुंचते हैं, हमला करते हैं और आराम से भाग निकलते हैं।
संघ कार्यालय पर पेट्रोल बम से हमला
यह घटना रात 11 बजे से 12 बजे के बीच की बताई जा रही है। सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, दो हमलावरों ने पहले पेट्रोल बम में आग लगाई और फिर उसे संघ कार्यालय की ओर फेंका। एक बम पार्किंग में गिरा, लेकिन वह फटा नहीं। दूसरा छत पर जाकर फटा। इसमें अच्छी बात सिर्फ इतनी रही कि किसी को चोट नहीं आई। आपको बता दें कि जिस वक्त यह घटना घटी, उस वक्त संघ कार्यालय में लगभग 20 लोग सो रहे थे। इस घटना के बाद संघ कार्यालय में अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला।
पुलिस ने शुरू की जांच
अब सवाल यह उठता है कि क्या सिर्फ किसी के बच जाने से मामला छोटा हो जाता है? बिल्कुल नहीं। असल मुद्दा यह है कि हमला हुआ ही क्यों, और सुरक्षा तंत्र उस वक्त कहां था? आपको बता दें कि यह कार्यालय रांची की मुख्य सड़क से सिर्फ 500 मीटर की दूरी पर स्थित है। प्रशासन भी इन रास्तों के आसपास हमेशा सजग और तैनात रहने का दावा करता है। इसके बावजूद इस तरह की घटना का घट जाना और बम फेंकने वालों का वहां से भाग जाना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल तो खड़े करता ही है। सीसीटीवी फुटेज में दो लोगों की हरकत साफ दिखाई दे रही है। वे आग लगाते हैं, बम फेंकते हैं और फिर वहां से भाग जाते हैं। यानी यह घटना अचानक नहीं घटी, बल्कि एक सोची-समझी वारदात दिखाई दे रही है। इस घटना के बाद रांची पुलिस को सूचना दी गई और रांची पुलिस घटनास्थल की जांच करने के लिए संघ कार्यालय पहुंच चुकी है। इस मामले को लेकर पुलिस प्रशासन भी जांच कर दोषियों को जल्द गिरफ्तार करने की बात कर रहा है।
हिंसा के जरिए डर फैलाने की साजिश
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि यह हमला सिर्फ संघ कार्यालय पर नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर भी है जो राजधानी को सुरक्षित रखने का दावा करती है। अगर रांची जैसे शहर में भी ऐसी वारदात हो सकती है, तो फिर आम आदमी की सुरक्षा का क्या भरोसा? आज संघ कार्यालय पर हमला हुआ है, कल किसी और संस्था, किसी दफ्तर या किसी आम नागरिक के घर पर भी हो सकता है। अगर प्रशासन अभी नहीं जागा, तो फिर बहुत देर हो जाएगी। यह भी याद रखना चाहिए कि यह कोई पहली जगह नहीं है जहां इस तरह की घटनाएं हुई हों। देश के कुछ राज्यों में पहले भी संघ कार्यकर्ताओं और उनके कार्यालयों पर हमलों की खबरें आती रही हैं। अब झारखंड में भी उसी तरह की घटनाएं सामने आना बेहद गंभीर बात है। इसका मतलब साफ है कि कुछ लोग हिंसा को हथियार बनाकर डर फैलाना चाहते हैं।
















