अटल जी से मैं सन् 1948 में जुड़ा। अटल जी के साथ चलता रहा, उनको देखता रहा, और उनसे सीखता रहा। मेरे पास अटल जी के लिए भावनाएं और व्यक्तिगत यादें ज्यादा हैं।
उनकी रग-रग में संघ था
पहली जनता सरकार बनी, तब अटल जी विदेश मंत्री बने थे। वह सरकार बनी तो एक पार्टी के रूप में थी, लेकिन सब अंदर से बिखरे हुए थे। उसमें जो अन्य पार्टियों के लोग थे वो अपने दल का अभिनिर्देश लेकर चलते थे। एकमात्र अटल जी थे, जिन्होंने दलीय स्तर से ऊपर उठकर काम किया। कभी उन्होंने यह बात नहीं कही कि यह मैं एक जनसंघ के प्रतिनिधि के नाते बोल रहा हूं। जनसंघ के नेता के नाते बोल रहा हूं। जो जनता पार्टी की नीति है उसके अनुसार ही हम काम करते रहे।
संघ है, तो हम हैं
जनता पार्टी में झगड़े हुए, उस समय यह प्रश्न उठा कि आप संघ के साथ संबंध रखते हैं। इसकी जरूरत नहीं है। बहुत लोग मेरे पास आकर कहते कि पार्टी टूट जाएगी। यह कह दीजिए कि हमारा संघ से कोई संबंध नहीं है। जो संघ के लोग हैं यहां पर शाखा में नहीं जाया करेंगे। समीर मुखर्जी, जो सीपीएम के नेता थे, दो बार मेरे पास इस मामले को लेकर आए। आजादी के बाद जो चित्र बना था, वो बचा रहना चाहिए था। अटल जी ने दो टूक बात की कि हमारी नाल तो संघ से जुड़ी हुई है।
आप जरा उस समय की कल्पना कीजिए जहां एक वोट से वो प्रधानमंत्री बन सकते थे। बहुत कुछ हो सकता था। 100 लोगों के साथ मिलकर और विचारधारा के साथ समझौता करके वह ऐसा कर सकते थे। लेकिन उनकी जो दृढ़ता थी, वह जहां हैं, वहां हैं, डट कर रहे। उसके बाद हम संसद में दो सीट पर सिमट गए थे। उस समय के प्रधानमंत्री राजीव गांधी हंसी करते थे-‘हम दो और हमारे दो’। इस पर अटल जी ने कहा- कोई बात नहीं। यहां से ही चलेंगे। एक बार सवाल उठा था-सरस्वती वंदना का। मैंने कहा-सरस्वती वंदना होनी चाहिए या नहीं होनी चाहिए? अब आप प्रधानमंत्री हैं, आप ही बताइए। उन्होंने कहा कि सरस्वती वंदना अगर हमारी सरकार में नहीं होगी तो किस सरकार में होगी? सीधी बात है कि यह तो होनी ही चाहिए।
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सरस्वती नदी
संसद में रोज सवाल उठ रहा था- आर्यों के बाहर से आने का और सरस्वती नदी का। बड़े-बड़े साहित्यकार और इतिहासकार के अलावा कम्युनिस्ट पार्टी, कांग्रेस पार्टी, सोशलिस्ट पार्टी सब एकजुट थे। अटल जी का कहना था कि सरस्वती नदी इस देश की है तो हम उसको लुप्त नहीं होने देंगे। अगर वो लुप्त हो भी गई है तो उसे प्रकट करना है। और आज सरस्वती नदी पुनः प्रकट हो गई। सब स्वीकार रहे हैं। 

















