एंथ्रोपिक समेत कई AI कंपनियां पुरानी किताबें खरीदकर क्यों कर रहीं कॉपी?
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एंथ्रोपिक समेत कई AI कंपनियां पुरानी किताबें खरीदकर क्यों कर रहीं कॉपी?

एंथ्रोपिक समेत कई कंपनियों ने मॉडल को बेहतर बनाने के लिए प्रिं​टेट किताबों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। स्कैनिंग के दौरान कई बार इन किताबों की बाइंडिंग और पन्नों को काट दिया जाता है, जिससे दुर्लभ और ऐतिहासिक पुस्तकें हमेशा के लिए नष्ट हो रही हैं

Written byसुनीता मिश्रासुनीता मिश्रा
Jul 28, 2026, 03:28 pm IST
inविज्ञान और तकनीक, शिक्षा
पुस्तकें (प्रतीकात्मक चित्र)

पुस्तकें (प्रतीकात्मक चित्र)

दुनिया की बड़ी एआई कंपनियां एआई जनरेटेड कंटेंट को उच्च गुणवत्ता वाला बनाने के लिए कम कीमत में पुरानी किताबें खरीद रही हैं। इसके लिए साल 2022 से पहले की प्रकाशित किताबों को अधिक भरोसेमंद माना जा रहा है। इसकी वजह यह है कि इन किताबों में एआई कंटेंट न होने की गारंटी है। स्कैनिंग के दौरान कई बार इन किताबों की बाइंडिंग और पन्नों को काट दिया जाता है, जिससे दुर्लभ और ऐतिहासिक पुस्तकें हमेशा के लिए नष्ट हो रही हैं।

इंटरनेट अब कम गुणवत्ता वाले एआई कंटेंट से भर गया है। ऐसे में एंथ्रोपिक समेत कई कंपनियों ने अपने मॉडल को बेहतर बनाने और ज्यादा ट्रेनिंग डेटा के लिए अब प्रिं​टेट किताबों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है, जिनकी लाखों पुरानी कॉपियां उन्हें बहुत सस्ते में मिल रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एआई को ट्रेन करने के लिए एंथ्रोपिक बुक रीसेलर्स से खरीदी गई लेखकों की किताबों का इस्तेमाल कर रहे हैं। एक कंपनी का कहना है कि केवल प्रिंटेड किताबें ही ​एआई कंटेंट को बेहतर बना सकती है, क्योंकि वह चैटबॉट के आने से पहले छपी थीं।

किताबें इंसानी ज्ञान का संग्रह

ISBNdb नाम की एक कंपनी एआई लैब्स के लिए बड़ी संख्या में प्रिंटेट किताबें इकट्ठा करती है ताकि उन्हें स्कैन करके ट्रेनिंग डेटा बनाया जा सके। यह कंपनी खुद को दुनिया का सबसे बड़ा बुक डेटाबेस बताती है। इसकी वेबसाइट पर भी लिखा है, “दुनिया का सबसे अच्छा एआई ट्रेनिंग डेटा शेल्फ पर रखा है।” कंपनी का कहना है कि किताबें इंसानी ज्ञान का ऐसा संग्रह हैं, जिसे पूरी रिसर्च के साथ तैयार किया गया है। इसकी समीक्षा विशेषज्ञों ने की है, जो किसी खास विषय से जुड़ी हैं। इन्हें इस तरह से व्यवस्थित किया गया है कि कोई भी वेब इनकी नकल नहीं कर सकता। ये किताबें जानकारी से भरपूर, एडिट की हुई और विश्वसनीय होती हैं। डेटा ब्रोकर ISBNdb के अनुसार, एआई के लिए लाखों किताबों की बाइंडिंग काटनी पड़ती है और फिर इसकी मूल कॉपी को नष्ट कर दिया जाता है।

पुरानी किताबें ही क्यों?

असली बात तारीख की होती है। ISBNdb का कहना है कि साल 2022 से पहले प्रकाशित किताबें ‘लार्ज लैंग्वेज मॉडल’ के दौर से पहले की हैं, इसलिए उनमें एआई से बना टेक्स्ट नहीं हो सकता। पहले से प्रकाशित सामग्री इंसानों द्वारा लिखा गया एक रिकॉर्ड है, जिसे कोई बदल नहीं सकता। हालांकि लेखकों ने अब डेटा पॉइजनिंग के जरिए एआई को कई जगहों पर गुमराह करना शुरू कर दिया है। दरअसल, डेटा पॉइजनिंग के माध्यम से लेखक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और मशीन लर्निंग मॉडल के प्रशिक्षण डेटा में जानबूझकर गलत या भ्रामक जानकारी मिला देते हैं, जिससे एआई कई बार सही जानकारी नहीं दे पाता।

 

Topics: एआई जनरेटेड कंटेंटऐतिहासिक किताबेंएआईएआई कंपनियां
सुनीता मिश्रा
सुनीता मिश्रा
हरियाणा की कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री। इग्नू दिल्ली से राजनीतिक विज्ञान में मास्टर डिग्री। पत्रकारिता में 10 वर्षों का अनुभव। [Read more]
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