पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन होने के साथ ही वहां पर चीजें बदलने लगी हैं। इसी क्रम में मालदा में सोमवार को एक 3.5 फुट ऊंचा पत्थर का शिवलिंग तारकेश्वर से लाया गया। इसे आदिना मस्जिद से महज 50 गज दूर एक मंदिर में स्थापित किया गया। इस दौरान भक्तों की बड़ी भीड़ जुट गई और पुलिस की भारी तैनाती रही।
क्या है पूरा मामला
हिंदू सुरक्षा समिति ने शनिवार को ही प्लान की घोषणा कर दी थी। सोमवार को बंगाली महीने श्रावण के शुभ दिन पर हजारों शिव भक्त आदिना पहुंचे। महिलाएं खासतौर पर व्रत रखकर शिवलिंग पर जल और दूध चढ़ाने के लिए आई थीं। कुछ भक्त तो रातभर से वहां इंतजार कर रहे थे।
दोपहर करीब 12:30 बजे शिवलिंग लेकर जुलूस पहुंचा। आसपास की सड़क ASI संरक्षित मस्जिद कॉम्प्लेक्स के बहुत करीब है, इसलिए पुलिस ने लोगों और गाड़ियों की आवाजाही को नियंत्रित किया। मस्जिद परिसर के अंदर और बाहर पुलिस तैनात रही। एंट्री चेकिंग के बाद ही दी गई और ड्रोन से निगरानी की गई।
प्रशासन की तैयारी
मालदा के एसपी अनुपम सिंह ने कहा, “हमने पूरे कार्यक्रम की सुरक्षा और ASI साइट की सुरक्षा के लिए इंतजाम किए थे।” हिंदू सुरक्षा समिति के राज्य अध्यक्ष अभिजीत दास ने बताया, “हम कभी भी कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं पैदा करना चाहते थे। हमने प्रशासन द्वारा बताई गई जगह पर ही अपनी पूजा-अर्चना की।”
मंदिर समिति का दावा
आदिनाथ मंदिर कमेटी के काजल गोस्वामी ने कहा कि उनके पास सबूत हैं कि आदिना मस्जिद पहले मंदिर था। उन्होंने आगे कहा, “हम अपना केस हाई कोर्ट और केंद्र सरकार के सामने रखेंगे।” कुछ भक्तों ने तो यह भी कहा कि वे शिवलिंग को मस्जिद कॉम्प्लेक्स के अंदर ले जाकर स्थापित करना चाहते थे।

















