“सृष्टि का सृजन, संवर्धन और पोषण बिना मातृत्व के संभव नहीं है।” विश्वमांगल्य सभा द्वारा आयोजित “युगानुकूल मातृत्व” विषयक राष्ट्रीय प्रबोधन बैठक के समापन सत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने मातृत्व, भारतीय परिवार व्यवस्था, संस्कार, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण पर विस्तृत विचार रखे। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि माता ही मनुष्य की पहली गुरु होती है, परिवार में संवाद और संस्कार की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है तथा आने वाली पीढ़ियों का निर्माण मातृत्व की शक्ति से ही संभव है। उन्होंने भारतीय संस्कृति, एकात्मता, परिवार व्यवस्था और मातृशक्ति की भूमिका को राष्ट्र निर्माण का आधार बताया। इस कार्यक्रम का आयोजन विश्वमांगल्य सभा द्वारा 23–24 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में किया गया। दो दिवसीय राष्ट्रीय प्रबोधन बैठक में देशभर से सैकड़ों महिलाओं ने सहभागिता की और “मातृ निर्माण से राष्ट्र निर्माण” विषय पर व्यापक चिंतन हुआ।

















