भुवनेश्वर: ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने घोषणा की है कि फुलबाणी स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (जीएमसीएच) का नामकरण स्वर्गीय संत स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के नाम पर किया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने कंधमाल जिले के जलेस्पाटा आश्रम के विकास हेतु ₹13 करोड़ के व्यापक पैकेज की भी घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय कंधमाल के जनजातीय समुदायों के लिए स्वामी जी की “सेवा और बलिदान” के सम्मान में लिया गया है। वर्ष 2025–26 शैक्षणिक सत्र से एमबीबीएस पाठ्यक्रम प्रारंभ करने वाले इस मेडिकल कॉलेज में वर्तमान में 100 छात्रों के प्रवेश की वार्षिक क्षमता है।
आश्रम विकास के लिए ₹13 करोड़ स्वीकृत
राज्य सरकार की इस पहल के तहत मुख्यमंत्री विशेष सहायता (CMSA) निधि से ₹13 करोड़ की राशि जलेसपेटा आश्रम के संरक्षण एवं समग्र विकास के लिए स्वीकृत की गई है। यही वह स्थान है, जहां वर्ष 2008 में स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती और उनके चार सहयोगियों की हत्या कर दी गई थी।
इस पैकेज में ₹5 करोड़ की लागत से 300 सीटों वाले बालिका छात्रावास का निर्माण किया जाएगा, जिससे छात्राओं को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा उपलब्ध हो सके। इसके अतिरिक्त ₹3 करोड़ स्वामी जी के धरोहर स्थल के संरक्षण के लिए निर्धारित किए गए हैं। इसके अलावा ₹60 लाख की लागत से मेगा रिवर लिफ्ट जलापूर्ति परियोजना लागू की जाएगी, जिससे आश्रम, उसके विद्यालय और कन्याश्रम छात्रावास को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जा सके। शेष राशि से शौचालय निर्माण, छात्रावास विस्तार, चारदीवारी, कक्षाओं के निर्माण तथा पुराने भवनों के नवीनीकरण जैसे कार्य किए जाएंगे।
सामाजिक और धार्मिक नेता को श्रद्धांजलि
मुख्यमंत्री ने इन पहलों की घोषणा करते हुए स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के सनातन धर्म, जनजातीय कल्याण और सांस्कृतिक संरक्षण में योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में इन कदमों को स्वामी जी के “सेवा, त्याग और सांस्कृतिक जागरण” की विरासत को समर्पित एक विनम्र श्रद्धांजलि बताया।
स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती ने कंधमाल जिले में अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति समुदायों के बीच चार दशकों से अधिक समय तक कार्य किया। उन्होंने अनेक विद्यालय, छात्रावास और कल्याणकारी संस्थानों की स्थापना की और सामाजिक एवं धार्मिक मुद्दों पर अपने अभियानों के लिए जाने जाते थे। उन्हें क्षेत्र के सबसे प्रभावशाली हिंदू धार्मिक नेताओं में से एक माना जाता था।
2008 में की गई थी हत्या
23 अगस्त 2008 को जन्माष्टमी के अवसर पर जलेस्पाटा आश्रम में स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती और उनके चार सहयोगियों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद कंधमाल में व्यापक सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी, जो ओडिशा के हालिया इतिहास की सबसे संवेदनशील घटनाओं में से एक मानी जाती है। राज्य सरकार की यह पहल भुवनेश्वर में स्वामी जी पर आधारित एक पुस्तक के विमोचन से एक दिन पहले सामने आई है, जिससे उनके जीवन और योगदान पर पुनः ध्यान केंद्रित हुआ है।
नायडू आयोग की रिपोर्ट गुम होने पर क्राइम ब्रांच जांच
इसी बीच, मुख्यमंत्री माझी ने सोमवार को स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या से संबंधित न्यायमूर्ति ए.एस. नायडू आयोग की रिपोर्ट के कथित रूप से गुम होने के मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंपने का आदेश दिया। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के अनुसार, इस मामले को विस्तृत जांच के लिए क्राइम ब्रांच को भेज दिया गया है।
यह कार्रवाई 10 जून को गृह विभाग द्वारा भुवनेश्वर के कैपिटल पुलिस थाने में दर्ज कराई गई एफआईआर के बाद की गई है। इस एफआईआर में मुख्यमंत्री कार्यालय से दो जांच आयोगों की रिपोर्टों के गायब होने की बात कही गई थी। इनमें नायडू आयोग की रिपोर्ट के अलावा SUM अस्पताल अग्निकांड से संबंधित राजस्व मंडल आयुक्त (RDC) की रिपोर्ट भी शामिल है।
गुम रिपोर्टों पर जांच तेज
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, ये दोनों रिपोर्टें गृह विभाग द्वारा पहले मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपी गई थीं। विधानसभा चुनाव के बाद 4 जून 2024 को अन्य फाइलें वापस कर दी गईं, लेकिन ये दोनों रिपोर्टें वापस नहीं की गईं। एफआईआर में कहा गया है कि बार-बार प्रयासों के बावजूद इन रिपोर्टों का पता नहीं चल पाया, जिससे उनकी स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। अब क्राइम ब्रांच को इस पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदारी तय करने का कार्य सौंपा गया है। न्यायमूर्ति ए.एस. नायडू ने अपनी रिपोर्ट वर्ष 2016 में राज्य सरकार को सौंपी थी, जबकि SUM अस्पताल अग्निकांड से संबंधित रिपोर्ट 2018 में प्रस्तुत की गई थी।

















