बदलते वैश्विक परिदृश्य और तकनीकी चुनौतियों के बीच क्या हिंदुत्व की जीवन पद्धति में भी व्यावहारिक बदलाव की आवश्यकता है? राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने पुणे में इसी ‘युगधर्म’ को परिभाषित किया है…
Dattatreya Hosabale Pune Speech Hindutva Panch Parivartan | पुणे । राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा संस्थान में आयोजित ‘अनंत आणि पद्मा बिरादार परिवार’ के स्नेहमिलन तथा परिवार प्रबोधन कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने कहा कि “हिन्दुओं का संगठन ही हिन्दुत्व का शाश्वत धर्म है। लेकिन बदलते समय के अनुसार-
- सामाजिक समरसता,
- कुटुम्ब प्रबोधन (परिवार जागरूकता),
- पर्यावरण संवर्धन,
- स्वबोध (स्वदेशी आचरण)
- नागरिक कर्तव्यों का पालन,
यह ‘पंच परिवर्तन’ का मंत्र ही अब हिन्दुत्व का युगधर्म है”।
बता दें कि इस अवसर पर मंच पर हरीक्षेत्र हरिहर स्थित वीरशैव लिंगायत पंचमसाली जगद्गुरु पीठ के जगद्गुरू वचनानंद महास्वामी जी भी उपस्थित रहे।
जन्म के आधार पर भेदभाव संपूर्ण रूप से नष्ट होना चाहिए
इस अवसर पर सरकार्यवाह जी ने अपने संबोधन में कहा-
“व्यक्ति निर्माण और समाज का संगठन संघ का मूलाधार है। लेकिन युगानुकूल समाज परिवर्तन के लिए संघ ने पंच परिवर्तन का विचार सामने रखा है। जन्म के आधार पर होने वाला भेदभाव ईश्वर विरोधी है और उसका हिन्दू समाज में स्थान नहीं है। समाज में भेदभाव संपूर्ण रूप से नष्ट होना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि-
“पर्यावरण संवर्धन के लिए केवल कानून बनाने से काम नहीं होगा, बल्कि उसे नित्य संस्कार द्वारा सुदृढ़ करना होगा। नागरिकों को संविधान द्वारा दिये गए अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों का भी बोध होना चाहिए।
परिवार राष्ट्र की आर्थिक और सामाजिक ईकाई है। इसी परिवार प्रणाली के कारण भारत ने हजारों वर्षों तक विदेशी आक्रमणों का सफलता से सामना किया। लेकिन आज के तकनीकी युग में पश्चिमी देशों के अंधानुकरण के चलते हमारी परिवार प्रणाली के समक्ष बड़ी चुनौती खड़ी हुई है”।
बच्चों को विदेशी भाषा सिखाएं, पर मातृभाषा बोलने में हीनभाव न हो
सरकार्यवाह जी ने मातृभाषा के गौरव को लेकर मराठी भाषा का उदाहरण देते हुए कहा कि- महाराष्ट्र में रहने वाले हर व्यक्ति को मराठी भाषा आनी ही चाहिए।
“भारत की हर भाषा में विश्व का श्रेष्ठ साहित्य निर्माण हुआ है। बच्चों को विदेशी भाषा अवश्य सिखाएं, लेकिन मातृभाषा बोलने में कोई हीनभाव नहीं होना चाहिए। भाषा और संस्कृति के विषय में केवल गर्व करने से काम नहीं होगा, बल्कि उसका प्रतिदिन आचरण करना होगा।”
परिवार भारत का प्राण
अपने संबोधन में सरकार्यवाह जी ने भारतीय परिवार प्रणाली को लेकर कहा कि-
परिवार से ही राष्ट्र बनता है। भौतिक सुविधाओं के चलते केवल ‘घर’ बनता है, लेकिन ‘परिवार’ आत्मीयता से ही बनता है। भारतीय हिन्दू जीवन पद्धति की परिवार प्रणाली की प्रशंसा पूरे विश्व में होती है। आज संयुक्त परिवार प्रणाली शायद व्यावहारिक रूप से संभव न हो, लेकिन परिवार में आपसी संबंध, प्रेम और आत्मीयता बनी रहना आवश्यक है।
सोशल मीडिया की चुनौती
सोशल मीडिया और स्वार्थ के युग में बिखर रहे परिवारों एवं योग्य संस्कारों को लेकर सरकार्यवाह जी ने कहा कि –
आज सोशल मीडिया और स्वार्थ के युग में पश्चिम के अंधानुकरण के कारण परिवार बिखर रहे हैं। ऐसे समय में नई पीढ़ी को योग्य संस्कार देना अधिक जिम्मेदारी का कार्य है। परिवार को केवल व्यवस्था न बनाते हुए उसे संस्कारों का केंद्र बनाना चाहिए।
पहले हिन्दू फिर लिंगायत
चिकित्सा पद्धति का भविष्य योग और प्राकृतिक उपचार में ही है, यह कहते हुए वचनानंद महास्वामी जी ने कहा-
“वर्तमान में हिन्दू समुदाय को विभाजित करने के प्रयास जारी हैं। लेकिन लिंगायत सर्वप्रथम हिन्दू है और बाद में लिंगायत है, यह विचार स्पष्ट होना चाहिए।”


















