मुंबई। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के परिसर में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास एवं मुंबई विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में “विकसित भारत हेतु शिक्षा” विषय पर एक भव्य राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में पहुंचे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने देश की भावी शिक्षा नीति और भारतीय मूल्यों पर अपना विचार प्रस्तुत किया.
सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि केवल भौतिक या आर्थिक प्रगति ही विकास का एकमात्र मानदंड नहीं हो सकता. “ज्ञान, कौशल और चरित्र—इन तीनों का समन्वय ही वास्तविक शिक्षा है. विकसित भारत की कल्पना में हमें धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष, सभी आयामों के विकास के लिए विद्यार्थियों को तैयार करना होगा.”

“हम कोई फैक्ट्री नहीं, बल्कि एक महान सभ्यता बना रहे हैं”
दत्तात्रेय होसबाले ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि राधाकृष्ण आयोग की रिपोर्ट के अंत में स्पष्ट लिखा गया था कि हम किसी कारखाने का निर्माण नहीं कर रहे हैं, बल्कि एक सभ्यता गढ़ रहे हैं. इसलिए एक राष्ट्र के रूप में हमें मानव जीवन से जुड़े सभी पहलुओं पर समग्रता से कार्य करने की आवश्यकता है.
“हमने जिस तरह सीखा है, आज की पीढ़ी को ठीक उसी तरह नहीं सिखा सकते। उनके अनुसार हमें अपनी शिक्षण पद्धतियों का निर्माण करना होगा। विकसित भारत 2047 एक पड़ाव है, मंजिल की समाप्ति नहीं। हमें अपनी जड़ों और सांस्कृतिक मूल्यों को छोड़े बिना समय की आवश्यकता के अनुसार बदलाव स्वीकार करने होंगे।” – दत्तात्रेय होसबाले, सरकार्यवाह, RSS
कोच्चि की ‘ज्ञानसभा’ से शुरू हुई वैश्विक सोच की यात्रा
कार्यक्रम के दौरान जानकारी दी गई कि पिछले वर्ष केरल के कोच्चि में आरएसएस सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी के सान्निध्य में आयोजित ‘ज्ञानसभा’ में देश के 500 प्रमुख शिक्षाविदों ने मंथन किया था. इसके बाद महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों में ज्ञानसभाएं आयोजित की गईं, उसी श्रृंखला में मुंबई के एनएसई परिसर में उद्योग व आर्थिक क्षेत्र के नेतृत्व को शिक्षा जगत से जोड़ा गया है.

विभिन्न सत्रों एवं विचार-विमर्श के मुख्य बिंदु:
- डॉ. पंकज मित्तल (अध्यक्ष, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास): राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP 2020) भारतीय शिक्षा को वैश्विक नेतृत्व प्रदान करने का ऐतिहासिक दस्तावेज है.
- डॉ. अतुल कोठारी (राष्ट्रीय सचिव, न्यास): विकास का अर्थ केवल भौतिक संसाधन जुटाना नहीं, बल्कि आध्यात्मिक व चारित्रिक मूल्य भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं. सरकार और समाज एक ही गाड़ी के दो पहिये हैं.
- प्रथम सत्र (नवाचार प्रस्तुतिकरण): देश के चुनिंदा उत्कृष्ट संस्थानों ने अपने नवाचारों का प्रदर्शन किया. इस सत्र की अध्यक्षता आशीष चौहान (एमडी एवं सीईओ, NSE) ने की.
- द्वितीय सत्र (शिक्षा, अनुसंधान व उद्योग): शिक्षा, अनुसंधान, उद्योग और समाज के समन्वित प्रयासों को विकसित भारत @2047 के लिए अनिवार्य माना गया.

समारोह का शुभारंभ माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ और समापन राष्ट्रगान से किया गया. इस अवसर पर देश भर से आए लगभग 100 विशिष्ट आमंत्रित प्रतिनिधियों, कुलपतियों, केंद्रीय नीति-निर्माताओं और मंत्रियों ने सहभागिता की.















