पाकिस्तान के बलूचिस्तान में अलगाव की मांग एक बार फिर चर्चा में है। 11 अगस्त को बलूच संगठनों और नेताओं ने इस दिन को ‘स्वतंत्रता दिवस’ के रूप में मनाया। इसी अवसर पर बलूच नेता मीर यार बलोच ने बलूचिस्तान को स्वतंत्र देश बताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से उसे मान्यता देने की अपील की।
मीर यार बलोच का स्वतंत्र बलूचिस्तान का दावा
मीर यार बलोच ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि बलूचिस्तान को पाकिस्तान का प्रांत नहीं कहा जाना चाहिए। उन्होंने बलूचिस्तान को ‘रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान’ बताते हुए दुनिया से इसे एक स्वतंत्र देश के रूप में देखने की अपील की। उन्होंने भारत और भारतीय मीडिया की तारीफ करते हुए कहा कि बलूचिस्तान के मुद्दे को दुनिया के सामने रखने में भारतीय मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने लोगों से बलूचिस्तान के लोगों को नैतिक समर्थन देते रहने की अपील भी की। मीर यार बलोच ने पाकिस्तान पर बलूच लोगों के दमन का आरोप लगाया और पाकिस्तान की तुलना ‘कैंसर’ से की। उन्होंने पाकिस्तान को बलूचिस्तान से हटाने की बात भी कही। हालांकि, बलूचिस्तान की स्वतंत्रता के इस दावे को पाकिस्तान या अंतरराष्ट्रीय समुदाय की आधिकारिक मान्यता नहीं मिली है। दुनिया के स्तर पर अभी भी बलूचिस्तान को पाकिस्तान का हिस्सा माना जाता है। मीर यार बलोच और अन्य अलगाववादी संगठनों की मांग इससे अलग है। जुलाई 2026 में मीर यार बलोच ने दावा किया था कि अलगाववादी संगठनों का बलूचिस्तान के करीब 85 प्रतिशत हिस्से पर नियंत्रण है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। बलूचिस्तान में लंबे समय से पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और अलगाववादी संगठनों के बीच संघर्ष चल रहा है।
उन्होंने स्वतंत्र बलूचिस्तान के लिए पासपोर्ट, अपनी मुद्रा, मीडिया संस्थानों, व्यापारिक संगठनों और राजनयिक मिशनों की तैयारी का भी दावा किया। साथ ही बलूच राजनीतिक गुटों को एकजुट करने की कोशिश की बात कही। मीर यार बलूच ने भारत सहित अंतरराष्ट्रीय मीडिया, शोधकर्ताओं और थिंक टैंकों का भी धन्यवाद किया। हालांकि, बलूच नेताओं के बयानों को भारत सरकार की आधिकारिक नीति नहीं माना जाना चाहिए। बलूच राष्ट्रवादी संगठन 11 अगस्त 1947 की घटना को अपनी स्वतंत्रता के इतिहास से जोड़ते हैं। उनका कहना है कि बलूच लोगों ने लंबे समय से अपनी पहचान और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया है।

















