कानपुर : क्या है संघ का 'पंच परिवर्तन'? स्वांत रंजन जी ने समझाए व्यक्ति से राष्ट्र निर्माण के 5 आयाम
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कानपुर : क्या है संघ का ‘पंच परिवर्तन’? स्वांत रंजन जी ने समझाए व्यक्ति से राष्ट्र निर्माण के 5 आयाम

कानपुर में RSS के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित गोष्ठी में अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वांत रंजन जी ने 'पंच परिवर्तन' का मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता और नागरिक कर्तव्यों से ही भारत पुनः विश्व गुरु बनेगा।

Written byShivam DixitShivam Dixit
May 12, 2026, 09:18 pm IST
inभारत, पंच परिवर्तन, उत्तर प्रदेश, संघ @100
RSS Swant Ranjan Kanpur Panch Parivartan

कानपुर में गोष्ठी को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वांत रंजन जी

क्या केवल आर्थिक प्रगति से भारत विश्व गुरु बन सकता है? कानपुर में आयोजित एक गोष्ठी में संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वांत रंजन जी ने इस सवाल का एक गहरा उत्तर दिया…

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में कानपुर के छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के सेनानायक तात्या टोपे सीनेट हॉल में प्रमुख जन गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने की।

गोष्ठी में मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वांत रंजन जी रहे।

डिग्री के साथ चरित्र निर्माण का केंद्र बनें विश्वविद्यालय : प्रो. विनय कुमार पाठक

अपने संबोधन में प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि भारत आज विश्व के सबसे युवा देशों में से एक है। हमारे देश की सबसे बड़ी शक्ति उसकी “युवा ऊर्जा” है। विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने का केंद्र नहीं होता, वह राष्ट्र के विचार, चरित्र और नेतृत्व का निर्माण करने वाला मंच होता है। इसलिए पंच परिवर्तन की अवधारणा में युवाओं और छात्रों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।

उन्होंने कहा- पंच परिवर्तन के पाँच आयाम केवल विचार नहीं, बल्कि जीवन पद्धति हैं। यदि देश का युवा इन्हें अपने जीवन में उतार ले, तो भारत को विकसित और संस्कारित राष्ट्र बनने से कोई नहीं रोक सकता।

‘पंच परिवर्तन’ से विकसित ही नहीं, आदर्श राष्ट्र बनेगा भारत : स्वांत रंजन जी

गोष्ठी में मुख्य वक्ता स्वांत रंजन जी ने अपने संबोधन में कहा कि आज हम ऐसे समय में एकत्रित हुए हैं, जब भारत केवल एक राष्ट्र के रूप में नहीं, बल्कि विश्व के लिए एक सांस्कृतिक दिशा के रूप में पुनः स्थापित हो रहा है। यह कालखंड केवल आर्थिक विकास का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय पुनर्जागरण का कालखंड है।

उन्होंने कहा- भारत की आत्मा को समझे बिना भारत के भविष्य की कल्पना नहीं की जा सकती। इसी संदर्भ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का समाज जीवन में “पंच परिवर्तन” का विचार अत्यंत महत्वपूर्ण है।

पंच परिवर्तन केवल एक अभियान नहीं, बल्कि व्यक्ति से राष्ट्र तक परिवर्तन का एक व्यापक सांस्कृतिक आंदोलन है। यह पाँच ऐसे आयाम हैं, जिनके माध्यम से हम एक सशक्त, समरस, आत्मनिर्भर और संस्कारित भारत का निर्माण कर सकते हैं।

सांस्कृतिक पुनर्जागरण का कालखंड: भेदभाव छोड़ बंधुत्व अपनाने की अपील

उन्होंने आगे कहा कि पंच परिवर्तन के पांच विषयों के अंतर्गत सामाजिक समरसता में भेदभाव व अस्पृश्यता के स्थान पर बंधुत्व की भावना से कार्य करना, कुटुंब प्रबोधन विषय में परिवार को संस्कार का प्रथम केंद्र बनाना, पर्यावरण संरक्षण विषय में प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व, स्वदेशी विषय में आत्मनिर्भर भारत का आधार एवं नागरिक कर्तव्य में अधिकारों से पहले उत्तरदायित्व।

उन्होंने कहा कि पंच परिवर्तन कोई सैद्धांतिक अवधारणा नहीं, बल्कि जीवन का व्यवहारिक मार्ग है। यह परिवर्तन सरकारें नहीं कर सकतीं; यह परिवर्तन समाज के जागृत नागरिक ही कर सकते हैं।

जब समाज समरस होगा, परिवार संस्कारित होगा, प्रकृति सुरक्षित होगी, स्वदेशी सशक्त होगा और नागरिक अपने कर्तव्यों के प्रति सजग होंगे – तब भारत केवल विकसित राष्ट्र नहीं, बल्कि विश्व के लिए आदर्श राष्ट्र बनेगा।

UK, USA और जर्मनी ने जाना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का ‘दृष्टिकोण’ : सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने साझा किया अनुभव

Topics: RSS Centenary YearRSS KanpurSwant RanjanVinay Kumar PathakCSJMU KanpurSocial harmonyPanch Parivartan
Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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