UK, USA और जर्मनी ने जाना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का 'दृष्टिकोण' : सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने साझा किया अनुभव
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UK, USA और जर्मनी ने जाना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का ‘दृष्टिकोण’ : सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने साझा किया अनुभव

आरएसएस सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने अपनी 20 दिवसीय UK, USA और जर्मनी यात्रा के अनुभवों को साझा किया। उन्होंने स्टैनफोर्ड और चैथम हाउस में बताया- क्यों हिंदू दर्शन ही वैश्विक समस्याओं का समाधान है।

Written byShivam DixitShivam Dixit
May 12, 2026, 08:55 pm IST
in भारत, विश्व, संघ को जानें, संघ @100
Dattatreya Hosabale foreign visit RSS global vision

विदेशी समाचार एजेंसियों को अपनी हालिया अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी यात्रा के बारे में जानकारी देते RSS सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी साथ में अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर जी।

“क्या हिंदू विचार वैश्विक संघर्षों का समाधान हो सकता है? RSS सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने हाल ही में दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में इसी सवाल का उत्तर दिया है…”

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसाबले जी ने आज नई दिल्ली के झंडेवालान स्थित आरएसएस कार्यालय केशवकुंज में विदेशी समाचार एजेंसियों के साथ संवाद करते हुए अपनी हालिया विदेश (UK, USA और जर्मनी) यात्रा का विवरण साझा किया।

बता दें कि सरकार्यवाह जी की ये यात्राएं RSS के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में संवाद की भावना से अप्रैल 2026 में यूनाइटेड किंगडम (UK), संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) और जर्मनी के प्रतिष्ठित संस्थानों के निमंत्रण पर की गई थी।

इन यात्राओं का मुख्य उद्देश्य व्यापक मानवता की ओर उन्मुख होना था, वैश्विक भलाई, मानवीय कल्याण और सभ्यतागत मूल्यों के आधार पर RSS के 100 वर्षों के अनुभवों और चिंतन को विश्व पटल पर साझा करना था।

10 से 15 अप्रैल 2026 : यूनाइटेड Kingdom

लंदन और रग्बी में छह दिनों के दौरान, RSS सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसाबले जी ने शिक्षा जगत, नीति-निर्माण, विधायिका, व्यापार और सामुदायिक संगठनों से जुड़े ब्रिटिश सार्वजनिक जीवन के विभिन्न क्षेत्रों के लोगों से संवाद किया।

• चैथम हाउस में संबोधन : चैथम हाउस (रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स) में, सरकार्यवाह जी ने ‘RSS का विश्व दृष्टिकोण’ विषय पर एक सत्र को संबोधित किया। इस सत्र में उन सभ्यतागत मूल्यों पर विचार किया गया जो RSS के कार्यों का आधार हैं, और बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत के स्थान पर चर्चा की गई।

• लंदन शहर में स्थित ‘इंटरनेशनल सेंटर फॉर सस्टेनेबिलिटी’ में, उन्होंने ‘जमीनी स्तर से भारत को समझना’ विषय पर एक गोलमेज चर्चा (Round Table Discussion) की। जिसमे भारत को केवल एक राजनीतिक इकाई के रूप में देखने के बजाय, एक सभ्यतागत सत्ता के रूप में समझने के दृष्टिकोण पर विचार-विमर्श किया गया।

• अकादमिक संवाद : ‘RSS और नागरिक संस्थाएँ’ विषय पर आयोजित एक अकादमिक गोलमेज (Round Table Discussion) चर्चा में ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय, यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन, स्कूल ऑफ़ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज़, लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय और ससेक्स विश्वविद्यालय के शोधकर्ता और संकाय सदस्य शामिल हुए।

• संसदीय सत्र : हाउस ऑफ़ कॉमन्स और हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स के सांसदों तथा गणमान्य व्यक्तियों के साथ एक सर्वदलीय रात्रिभोज का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में कंज़र्वेटिव पार्टी, लेबर पार्टी और लिबरल डेमोक्रेट्स के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, और ‘भारत के भविष्य को आकार देने में RSS की भूमिका’ विषय पर विचार-विमर्श किया।

• वहीं लंदन में वरिष्ठ व्यापारिक नेताओं के साथ अनौपचारिक सत्रों में वर्तमान भू-राजनीतिक स्थिति में RSS के वैश्विक दृष्टिकोण पर चर्चा की गई।

• एक और अनौपचारिक सत्र में पूरे यूनाइटेड किंगडम से हिंदू समुदाय के प्रतिनिधि और सामुदायिक संगठनों के प्रतिनिधि एक साथ आए।

• इस यात्रा का समापन रग्बी में RSS से प्रेरित हिंदू स्वयंसेवक संघ UK के ‘कार्यकर्ता मंडल’ की बैठक के साथ हुआ। जोकि स्वयंसेवकों और पदाधिकारियों की एक कार्य-सभा थी, जो ब्रिटेन में व्यापक HSS नेटवर्क के साथ मिलकर काम करते हैं।

16 से 26 अप्रैल 2026 : संयुक्त राज्य अमेरिका

संयुक्त राज्य अमेरिका में सरकार्यवाह जी के दस दिन के प्रवास का केंद्र दो मुख्य आयोजन थे, जिनके साथ-साथ सरकार्यवाह जी की कई शहरों में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लोगों के साथ बातचीत भी हुई।

THRIVE 2026 शिखर सम्मेलन (स्टैनफोर्ड)

स्टैनफोर्ड फैकल्टी क्लब में 16 और 17 अप्रैल को हुए इस कार्यक्रम में ‘ग्लोबल साइंस इनोवेशन फोरम’ के केवल आमंत्रण-आधारित शिखर सम्मेलन में नोबेल पुरस्कार विजेता, वैश्विक नीति-निर्माता, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ और नीतिशास्त्र विशेषज्ञ एक साथ आए।

जिसमे RSS सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले जी ने ‘विज्ञान, ज्ञान प्रणालियाँ और सभ्यतागत नेतृत्व’ विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में अपने विचार रखे। इस पैनल में उनके सह-पैनलिस्ट और प्रतिभागियों में प्रोफ़ेसर स्टीवन चू (भौतिकी के नोबेल पुरस्कार विजेता और अमेरिका के पूर्व ऊर्जा सचिव), लेफ्टिनेंट जनरल एच.आर. मैकमास्टर (अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार), राम श्रीराम (Google के संस्थापक बोर्ड सदस्य), विनोद खोसला (Khosla Ventures के संस्थापक), और प्रोफ़ेसर डेम जूलियट जेरार्ड (न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री की पूर्व मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार) शामिल थे।

इसमें सरकार्यवाह जी का मुख्य प्रतिपादन यह था कि वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति का मूल्यांकन “अर्थव्यवस्था, पारिस्थितिकी और नैतिकता” इन तीन आयामों के आधार पर किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि “आध्यात्मिक और वैज्ञानिक के बीच कभी कोई विभाजन नहीं रहा, बल्कि दोनों का उद्देश्य केवल सत्य की खोज करना रहा है, और जिन्हें हम आज आध्यात्मिक ग्रंथ कहते हैं, उनमें अक्सर गहन वैज्ञानिक सिद्धांतों को ही कूटबद्ध (encoded) किया गया है।”

हडसन इंस्टीट्यूट ‘फायरसाइड डायलॉग’

वाशिंगटन, D.C. में 23 अप्रैल को विदेश नीति के चिंतक और इतिहासकार वाल्टर रसेल मीड के साथ एक ‘फायरसाइड डायलॉग’ (अनौपचारिक संवाद) में, सरकार्यवाह ने उस ‘एकात्म दर्शन’ को स्पष्ट किया, जो RSS की विचारधारा का मूल आधार है।

इस कार्यक्रम में सरकार्यवाह जी ने स्पष्ट कहा कि “हिंदू दर्शन और हिंदू संस्कृति, अपनी मूल संरचना के कारण ही, खुद को श्रेष्ठ मानने की अनुमति नहीं देते, हिंदुओं ने कभी किसी देश पर आक्रमण नहीं किया है और हिंदुओं के पास माफ़ी मांगने जैसा कुछ भी नहीं है।”

उन्होंने आगे कहा कि”विनम्रता की शुरुआत एक साधारण सी समझ से होती है: हम सभी एक ही सार्वभौमिक ऊर्जा का हिस्सा हैं।”

उन्होंने भारत-अमेरिका संबंधों के तीन आधारों के रूप में आपसी विश्वास, समान अवसर और आपसी सम्मान को रेखांकित किया।

स्वागत समारोह में सामुदायिक संदेश

23 अप्रैल को ही हिल्टन मैकलीन, वर्जीनिया में ‘फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज़’ ने हडसन इंस्टीट्यूट के सहयोग से एक स्वागत समारोह आयोजित किया, जिसका विषय था- ‘उभरते विश्व में भारत का वैश्विक दृष्टिकोण और भूमिका: साथ मिलकर समृद्धि के लिए सभ्यतागत आधार’।

जिसके पैनल में सरकार्यवाह जी के साथ वाल्टर रसेल मीड और RSS के लंबे समय से अध्येता रहे वाल्टर एंडरसन भी शामिल हुए। जिसमे एंडरसन ने इस आंदोलन को भारत में स्थिरता लाने वाला एक प्रभाव बताया।

इस कार्यक्रम में सरकार्यवाह जी ने आधुनिक जीवन के पहलुओं पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि

“मानवता ने बड़े घर तो बना लिए हैं, लेकिन परिवार छोटे हो गए हैं।

वर्तमान युग में ‘ज्ञान तो बहुत है, लेकिन विवेक कम है।

विशेषज्ञ तो बहुत हैं, लेकिन समस्याएं ज़्यादा हैं।

मानवता ने बाहरी अंतरिक्ष पर तो विजय पा ली है, लेकिन अपने भीतर के अंतरिक्ष पर नहीं”

उन्होंने यहां कहा कि भारतीय दर्शन “प्रकृति को माँ के रूप में देखता है- जो हमारी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए तो पर्याप्त है, लेकिन हमारे लालच को पूरा करने के लिए नहीं।”

भारत के सभ्यतागत दावे के बारे में उन्होंने कहा कि “जब भारत कहता है कि पूरा विश्व एक परिवार है, तो वह यह बात किसी अनुभव या व्यवहार के आधार पर कहता है।”

प्रवासी और मीडिया के साथ जुड़ाव

इस यात्रा के दौरान सरकार्यवाह जी मिडवेस्ट (Midwest) क्षेत्र में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लोगों द्वारा आयोजित एक सामुदायिक कार्यक्रम में भी शामिल हुए।

24 अप्रैल को वाशिंगटन, D.C. में, सरकार्यवाह जी ने ‘नेशनल पब्लिक रेडियो’ को एक साक्षात्कार दिया। बता दें कि यह RSS का संयुक्त राज्य अमेरिका के मुख्यधारा के मीडिया के साथ एक दुर्लभ जुड़ाव था।

28 से 29 अप्रैल 2026 : जर्मनी में स्थिरता और सामाजिक समरसता पर हुई चर्चा

बर्लिन में सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसाबले जी का जर्मनी के प्रमुख थिंक-टैंक व नीति-निर्धारकों और भारतीय समुदाय के साथ दो दिनों (28 से 29 अप्रैल) तक चर्चा का कार्यक्रम रहा।

• ‘स्टिफ्टंग विसेनशाफ्ट अंड पोलिटिक’ (Stiftung Wissenschaft und Politik) जो कि ‘जर्मन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल एंड सिक्योरिटी अफेयर्स’ है- में हुई चर्चा में, सरकार्यवाह जी ने बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत के स्थान, अंतरराष्ट्रीय संबंधों में सभ्यतागत दृष्टिकोणों की भूमिका, और सामाजिक समरसता में नागरिक समाज के संस्थानों के योगदान जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया।

• ‘कोनराड-एडेनॉयर-स्टिफ्टंग’ (Konrad-Adenauer-Stiftung) में हुई बातचीत में सरकार्यवाह जी ने सांस्कृतिक और नीतिगत संदर्भों में ‘स्थिरता’ (sustainability) के विषय पर, तथा बहुलवादी समाजों में नागरिक समाज की भूमिका पर चर्चा की।

• बर्लिन के ‘एबगियोर्डनेटेनहॉस’ (Abgeordnetenhaus) जिसे ‘बर्लिन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स’ भी कहा जाता है—से जुड़े सदस्यों के साथ हुई चर्चाओं में नागरिक दायित्व, पारिवारिक एकता और विभिन्न समुदायों के बीच आपसी समझ जैसे विषयों पर विचार किया गया।

RSS का विज़न

बता दें कि यहाँ पर भी RSS से प्रेरित ‘हिंदू स्वयंसेवक संघ’ (HSS) जर्मनी, द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में पूरे देश (जर्मनी) से आए दो सौ से अधिक HSS स्वयंसेवक एक साथ एकत्रित हुए।

बर्लिन में सरकार्यवाह जी का मुख्य विचार यह था कि “अगले 100 वर्षों के लिए RSS का विज़न हर स्तर पर – परिवारों से लेकर समाज और पर्यावरणीय ज़िम्मेदारी तक- साझा वैश्विक मूल्यों पर आधारित टिकाऊ समाज बनाने में योगदान देना है।”

आंकड़ों में RSS: विश्व का सबसे बड़ा स्वयंसेवी आंदोलन

विस्तार

● 1925 में नागपुर में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा स्थापित, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) आज स्वयंसेवकों द्वारा संचालित एक हिंदू-केंद्रित, सभ्यतागत और सांस्कृतिक आंदोलन है।

● RSS की पूरे भारत में 88,949 दैनिक शाखाएं (स्वयंसेवकों की स्थानीय बैठकें) प्रतिदिन लगती हैं, जिनके साथ लगभग 30,000 साप्ताहिक शाखाएं (बैठकें) भी होती हैं। इस तरह इनकी (RSS शाखाओं) की कुल संख्या 110,000 से अधिक स्थानीय इकाइयों तक पहुँच जाती है।

● यह आंदोलन सभी लाखों पूर्णकालिक और अंशकालिक RSS स्वयंसेवकों द्वारा संचालित होता है। ये वे स्व-प्रेरित स्वयंसेवक हैं जो इसके कार्य का मूल आधार हैं।

विविधता

● राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से लगभग चालीस प्रेरित संस्थाएं संचालित होती हैं- जिनमें से अधिकांश राष्ट्रव्यापी हैं। जो कि शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, जनजातीय कल्याण, श्रम, भाषा, कला, ग्रामीण विकास, पर्यावरण और अंतर-सामुदायिक संवाद जैसे विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत हैं।

सेवा कार्य

● वैसे तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के स्वयंसेवक पिछले 100 वर्षों से समाज के बीच शिक्षा, स्वास्थ्य, आपदा राहत सहित कई सेवा कार्य करते आ रहे हैं। लेकिन अगर बात आंकड़ों की करें तो 2020 से 2021 के बीच COVID-19 महामारी के दौरान, भारत में 3,42,000 स्वयंसेवकों ने 67,000 स्थानों पर सेवा कार्य किया।

50 लाख परिवारों को राशन किट वितरित किए गए, और 3 करोड़ लोगों तक भोजन के पैकेट पहुँचाए गए। सामान्य वर्षों में, RSS का व्यापक परिवार प्रतिवर्ष लगभग 15,000 चिकित्सा शिविरों का आयोजन करता है।

● वहीं हाल ही में हुए श्री राम जन्मभूमि निधि संग्रह अभियान 5,00,000 से अधिक गांवों तक पहुँचा – जो हाल के इतिहास में सबसे बड़े नागरिक लामबंदी अभियानों में से एक है।

विशेषता

● यह सब सौ वर्षों से बिना किसी वेतनभोगी रोज़गार के, बिना किसी सदस्यता औपचारिकता के, बिना किसी श्रेय-आधारित स्वयंसेवा के और बिना किसी बाहरी वित्तपोषण के निरंतर जारी रहा है। RSS का उद्देश्य ‘इदं राष्ट्राय इदं न मम’ (यह राष्ट्र के लिए है, मेरे लिए नहीं) के मंत्र के साथ अनुशासित स्वयंसेवकों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण और सेवा कार्य करना है।

 

Topics: Chatham Houseglobal peaceRSS CentenaryHudson InstituteDattatreya Hosabale foreign visitRSS global visionHindu PhilosophyDattatreya HosabaleStanford UniversityIndia-US relations
Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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