मोदी की अपील पर शोर करने वाला विपक्ष क्यों भूल गया नेहरू-इंदिरा का इतिहास?
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मोदी की अपील पर शोर करने वाला विपक्ष क्यों भूल गया नेहरू-इंदिरा का इतिहास?

संकट के समय मोदी की अपील पर विपक्ष को भूल गया नेहरू, इंदिरा, शास्त्री और चिदंबरम का इतिहास। जब इन नेताओं ने भी सोना न खरीदने, भोजन छोड़ने और पेट्रोल बचाने की अपील की थी।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
May 12, 2026, 01:30 pm IST
inभारत

अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते पूरी दुनिया की तेल की सप्लाई चेन बिगड़ गई है। हालात ये हो गए हैं कि खाड़ी देशों, जहां से दुनिया का 20 फीसदी तेल सप्लाई होता है, वो लगभग ठप हो गया है। इसी संकट को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देश के लोगों से अपील की कि वो पेट्रोल-डीजल का इस्तेमाल कम करने, कम से कम एक साल तक सोना न खरीदें। प्रधानमंत्री की इस अपील के बाद राहुल गांधी समेत पूरा विपक्ष ऐतिहासिक तथ्यों को किनारे रखते हुए सरकार को नाकारा और निकम्मा साबित करने में जुट गए।

इन लोगों ने तमाम तरह के दावे किए। लेकिन, ये लोग इस तथ्य को बड़ी ही बेशर्मी के साथ अनदेखा कर देते हैं कि कई बार नेहरू से लेकर इंदिरा गांधी तक ने कई प्रधानमंत्रियों, कांग्रेस नेताओं ने राष्ट्र की आवश्यकताओं और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इसी तरह की अपीलें की थीं। इन अपीलों का पालन न केवल विपक्ष ने किया, बल्कि आम नागरिकों ने भी किया, जिन्होंने सहयोगपूर्ण और समर्थनकारी दृष्टिकोण अपनाया। ऐसे मामलों को दलीय राजनीति से ऊपर रखा गया। यहां हम इसे कुछ उदाहरणों के साथ स्पष्ट करने की कोशिश करेंगे:

खान-पान की आदतें बदलनी होंगी, 1950 (खाद्य मंत्री के.एम. मुंशी)

खाद्य संकट के दौरान खाद्य मंत्री के.एम. मुंशी मुंबई के ताज महल पैलेस में होटल और रेस्टोरेंट एसोसिएशन की बैठक में गए। उन्होंने कहा था कि खाद्य समस्या मुख्य रूप से बड़े औद्योगिक शहरों जैसे कोलकाता और मुंबई की वजह से है। इन इलाकों में अकेले कुल आयातित अनाज के बराबर खपत होती है। खुद को अनाज में आत्मनिर्भर बनाने के लिए बर्बादी रोकनी होगी और अनाज के अलावा दूसरे खाद्य पदार्थों का ज्यादा इस्तेमाल करना होगा।

मिस अ मील मूवमेंट, 1950 (वाणिज्य मंत्री श्री प्रकाश)

1950 में “मिस अ मील” यानी एक भोजन छोड़ने का आंदोलन शुरू हुआ। इसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और कई केंद्रीय मंत्रियों का पूरा समर्थन था। वाणिज्य मंत्री श्री प्रकाश भी इससे जुड़े थे। उस समय देश गंभीर खाद्य संकट से जूझ रहा था। जुलाई 1950 में श्री प्रकाश ने कहा, “हममें से जो लोग अपेक्षाकृत अच्छी स्थिति में हैं, वे जरूरत से ज्यादा खाते हैं। न सिर्फ दिन में कई बार, बल्कि हर बार ज्यादा मात्रा में। हमें अपनी सेहत और देश के भले के लिए कई भोजन छोड़ देने चाहिए।”

इसे भी पढ़ें: आर्थिक संकट के दौर में प्रधानमंत्री का ‘स्वर्ण’ संदेश, आखिर एक साल तक क्यों नहीं खरीदें सोना?

असम राहत के लिए एक बार का भोजन छोड़ो, 1950 (मुख्यमंत्री बिश्नुराम मेधी)

21 सितंबर 1950 को असम के मुख्यमंत्री बिश्नुराम मेधी ने भुखमरी की समस्या से निपटने के लिए लोगों से अपील की थी कि गांधी जयंती पर एक भोजन छोड़कर भूख से मर रहे लोगों की मदद करें।

हफ्ते में एक भोजन छोड़ने की अपील, 1951 (प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू)

1 मई 1951 को आकाशवाणी पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नेहरू ने कहा कि हर गांव में छोटी समिति बनाई जाए जो गांव के हर व्यक्ति की मदद करे। जिनके पास थोड़ा अतिरिक्त अनाज है, वे जरूरतमंदों की मदद करें। गांव खुद को एक सहकारी इकाई की तरह चले।

नेहरू ने कहा था, “जब हम हर दाने का सदुपयोग करने की कोशिश कर रहे हैं तो बर्बादी से बड़ा पागलपन क्या हो सकता है। हमें एक भोजन हफ्ते में छोड़कर बचाए गए अनाज को जरूरतमंद इलाकों में भेजना चाहिए।” उन्होंने लोगों से भावनात्मक रूप से जुड़कर इस संकट का सामना करने की बात कही।

सरकार को सारा सोना सौंप दो, 1957 (प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू)

13 अप्रैल 1957 को नेहरू ने आर्थिक और विदेशी मुद्रा की दिक्कतों के बीच लोगों से अपील की कि जो लोग सोना या जेवर रखते हैं, वे उसे सरकार को सौंप दें। उन्होंने कहा, “मैं मुफ्त तोहफा नहीं मांग रहा। लेकिन अगर काफी संख्या में लोग ऐसा करें तो बहुत मदद मिलेगी। इससे मुश्किलों का साथ निभाने का माहौल बनेगा।”

आयात कम करने के लिए खान-पान बदलो, 1958 (प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू)

4 जनवरी 1958 को नेहरू ने कहा कि लोगों को अपनी खान-पान की आदतें बदलनी चाहिए ताकि देश अनाज के बड़े आयात पर कम निर्भर रहे और स्वास्थ्य भी बेहतर हो। उन्होंने कहा कि हम जल्द ही अपने पैरों पर खड़े होंगे और आयात बंद करेंगे। चावल और गेहूं ज्यादा पैदा करने के साथ-साथ संतुलित आहार की ओर बढ़ना चाहिए।

रक्षा कोष के लिए सोना और रुपये दो, 1962 (वित्त मंत्री मोरारजी देसाई)

26 अक्टूबर 1962 को वित्त मंत्री मोरारजी देसाई ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए अपील की कि लोग रुपये, सोना और सोने के आभूषण राष्ट्रीय रक्षा कोष में दें। इससे विदेश से रक्षा सामग्री खरीदने में मदद मिलेगी।

सोने के आभूषण न खरीदें, 1963 (गोल्ड कंट्रोल बोर्ड चेयरमैन जी.बी. कोटक)

22 जनवरी 1963 को जी.बी. कोटक ने महिलाओं से अपील की कि वे सोने के आभूषण न खरीदें। इसे देशभक्ति का काम बताया।

हफ्ते में एक बार भोजन छोड़ो, 1965 (प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री)

21 अक्टूबर 1965 को प्रयागराज में महिलाओं से बात करते हुए शास्त्री जी ने खाद्य संकट के बीच हफ्ते में एक भोजन छोड़ने की सलाह दी। उन्होंने पाकिस्तान-चीन की चुनौतियों का जिक्र करते हुए आत्मनिर्भरता पर जोर दिया। महिलाओं से अपील की कि कोई अनाज बर्बाद न हो और मोटे अनाज भी खाए जाएं। उन्होंने सोमवार को शाम का भोजन छोड़ने का आह्वान किया और खुद इसका पालन किया।

पेट्रोल का इस्तेमाल कम करो, 1973 (प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी)

इंदिरा गांधी सरकार ने पेट्रोल की खपत में 30 प्रतिशत कटौती पर विचार किया क्योंकि आयातित कच्चे तेल की कीमत बढ़ गई थी और विदेशी मुद्रा खर्च बचाना था।

तेल बचाओ अभियान, 1986 (राज्य मंत्री चंद्रशेखर सिंह)

1986 में राजीव गांधी सरकार में राज्य मंत्री चंद्रशेखर सिंह ने पेट्रोलियम उत्पादों की बचत के लिए कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की।

पेट्रोलियम बचाओ, 1991 (प्रधानमंत्री चंद्रशेखर)

6 जनवरी 1991 को प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने तेल संरक्षण सप्ताह के मौके पर अपील की कि हम पेट्रोलियम उत्पादों का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करें क्योंकि 40 प्रतिशत मांग आयात से पूरी होती है।

रात में पेट्रोल पंप बंद करने पर विचार, 2013 (पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली)

यूपीए सरकार ने रात में पेट्रोल पंप बंद करने समेत कई उपायों पर विचार किया ताकि तेल आयात बिल कम हो।

सोना खरीदने का लालच न करें, 2013 (वित्त मंत्री पी. चिदंबरम)

13 जून 2013 को चिदंबरम ने नागरिकों से अपील की कि सोना खरीदने का लालच छोड़ दें। उन्होंने कहा कि सोना सबसे सुरक्षित निवेश है, यह मानना गलत है।

Topics: नरेंद्र मोदीइंदिरा गांधीनेहरूनरेंद्र मोदी पेट्रोल बचाओ अपीलकांग्रेस दोहरा मापदंड
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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