केरल में कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट की सरकार बनने जा रही है। इस गठबंधन का दूसरा अहम घटक दल इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग है। यूडीएफ की सरकार में आईयूएमएल की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि इसका सहयोग इस गठबंधन के लिए सबसे अहम है।
दशकों पुराना है कांग्रेस-मुस्लिम लीग गठबंधन
कांग्रेस पार्टी और आईयूएमएल का केरल में दशकों पुराना गठबंधन है। कांग्रेस पार्टी केरल में मुस्लिम मतों के लिए आईयूएमएल का बड़े पैमाने पर प्रयोग करती है। इसके एवज में आईयूएमएल कांग्रेस पार्टी से वाजिब कीमत भी वसूलती है। आईयूएमएल केरल में अपने मनमुताबिक विधानसभा की सीटों पर चुनाव लड़ने के साथ ही सरकार बनने पर अपने पसंद के मंत्री पद लेने के साथ ही दो लोकसभा की सीटों पोन्नानी और मलप्पुरम सीट पर कांग्रेस पार्टी को सोचने का भी मौका नहीं देती है। मलप्पुरम सीट 1952 से सिर्फ एक बार 2004 लोकसभा की छोड़कर आईयूएमएल ही जीत रही है। वहीं पोन्नानी लोकसभा सीट 1977 से कांग्रेस पार्टी के सहयोग से लगातार आईयूएमएल जीतती आ रही है।
कांग्रेस पार्टी ने केरल के पड़ोसी राज्य तमिलनाडु में भी आईयूएमएल को अपना सहयोगी बनाया है। आईयूएमएल के कारण कांग्रेस पार्टी को आसानी से मुस्लिम मत मिल जाता है और पार्टी को ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती है। इसका राजनीतिक लाभ आईयूएमएल ने कांग्रेस पार्टी से तमिलनाडु में वसूलना शुरू कर दिया है। विगत दो बार से आईयूएमएल रामनाथपुरम की लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रही है। यह सीट भी अब आईयूएमएल के लिए कांग्रेस पार्टी के सहयोग के कारण पोन्नानी और मलप्पुरम की तरह ही मजबूत गढ़ बनता जा रहा है।
यूडीएफ गठबंधन में आईयूएमएल का प्रदर्शन

IUML ने पकड़ी कांग्रेस की कमजोर नब्ज
इस बार केरल में लगातार दो बार विपक्ष में बैठने के बाद कांग्रेस पार्टी नीत यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट ने सत्ता हासिल की है। अतएव इस गठबंधन के दलों की बहुत ही उम्मीदे हैं। आईयूएमएल इस तथ्य से वाकिफ है कि कांग्रेस पार्टी उसके समर्थन के बगैर सरकार नहीं चला सकती है। इसलिए इसका कीमत वसूलने का मन पार्टी ने पहले से ही बना रखा है। इसके बल पर अब केरल से बाहर भी आईयूएमएल अपनी भूमिका की तलाश करेगी।
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टूट रहा इंडि गठबंधन
इंडि गठबंधन में बिखराव की प्रक्रिया तेज होती जा रही है। तृणमूल कांग्रेस, आप और द्रमुक सहित कई दलों ने इस गठबंधन से किनारा कर लिया है। अतएव कांग्रेस पार्टी मुस्लिम मतदाताओं को अपनी ओर खींचने के लिए आईयूएमएल की मदद लेने पर गंभीरता से विचार कर रही है। कांग्रेस पार्टी का ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के साथ संबंध टूट चुका है और 2027 के उत्तर प्रदेश विधासभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन की संभावना कमजोर होती जा रही है। इस कारण तमिलनाडु की तर्ज़ पर ही कांग्रेस पार्टी आईयूएमएल का उपयोग उत्तर प्रदेश में भी कर सकती है। तमिलनाडु में 2021 में द्रमुक और आईयूएमएल के साथ सेक्युलर प्रोग्रेसिव गठबंधन की सरकार बनाने में कामयाब भी हुई थी।
वी सतीशन को मुख्यमंत्री बनाना चाहता IUML
आईयूएमएल केरल के अध्यक्ष सैयद सादिक अली शिहाब थंगल ने स्पष्ट तौर पर कांग्रेस पार्टी से पिछली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष वी सतीशन को मुख्यमंत्री बनाने की मांग की है। यह आईयूएमएल का कांग्रेस पार्टी पर दबाव की राजनीती की शुरुआत है। आईयूएमएल भविष्य में उपमुख्यमंत्री पद की मांग करने के साथ ही मुख्यमंत्री पद के अद्ल बदल के प्रक्रिया की भी मांग कर सकती है। 1979 में आईयूएमएल के मोहम्मद कोया राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं।
आईयूएमएल कांग्रेस पार्टी के साथ गठबंधन में राजनीतिक लाभ के साथ ही अपनी सांप्रदायिक राजनीति को अमलीजामा पहनाने से पीछे नहीं रहती है। लीग के सांप्रदायिक राजनीति की फेरहिस्त काफ़ी लम्बी है, जिसे कांग्रेस पार्टी और गांधी परिवार के पास बर्दाश्त करने के अलावा कोई उपाय नहीं है। 26 अक्टूबर 2023 को कोझिकोड में आईयूएमएल केरल प्रदेश के अध्यक्ष पनक्कड़ सैयद सादिक अली शिहाब थंगल ने अपने भाषण में भारत सरकार पर हमेशा इजरायल का समर्थन करने का आरोप लगाते हुए कहा था कि जो भी इजराइल के साथ हाथ मिलाता है वह आतंकवाद का समर्थन करता है। दूसरे शब्दों में इजराइल को एक आतंकवादी देश बोलने की कोशिश की गई थी।
IUML ने की थी भगत सिंह और सुभाषचंद्र बोस की तुलना हमास आतंकियों से
इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के वरिष्ठ नेता और विधायक एम के मुन्नेर पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस और अमर बलिदानी भगत सिंह जैसे स्वतंत्रता सेनानियों की तुलना हमास आतंकियों से करने के आरोप भी लगे थे। मगर कांग्रेस पार्टी इसके बावजूद भी आईयूएमएल के खिलाफ कोई भी वक्तव्य तक जारी करने का हिम्मत नहीं जुटा सकी थी। जुलाई 2023 में मुस्लिम लीग की युवा शाखा ने केरल के कासरगोड की एक रैली में हिंदुओं के खिलाफ भयंकर भड़काऊ नारे लगाए थे। यूडीएफ सरकार के दौरान इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के शिक्षा मंत्री पी के अब्दुर रब्ब ने अपने आधिकारिक आवास का नाम गंगा से बदलकर ग्रेस कर दिया था।
उन्होंने यह भी कहा था कि कक्षा में लड़के और लड़कियों को एक साथ नहीं बैठना चाहिए। इनके अलग-अलग क्लासेस होने चाहिए। 2015 में मुस्लिम लीग ने अपने मंत्रालय से जुड़े किसी भी कार्यक्रम में दीपक जलाने से इंकार कर दिया था, क्योंकि उनके अनुसार दीप प्रज्वलन इस्लामिक मान्यताओं के खिलाफ है। वहीं फरवरी 2013 में एक मुस्लिम लीग के एक नेता ने केरल यूनिवर्सिटी के सिंडिकेट में मुस्लिम सदस्यों के लिए अधिक से अधिक सीटों की मांग की, जिससे विवाद खड़ा हो गया था और उसे सांप्रदायिक आधार पर शिक्षा नीति को प्रभावित करने की कोशिश के रूप में देखा गया था। इसके बावजूद भी राहुल गांधी को अपने परिवार के लिए वायनाड लोकसभा सीट बचाये रखने के लिए आईयूएमएल को धर्म निरपेक्ष पार्टी बताना पड़ता है।

















