पश्चिम बंगाल में बड़ी जीत के बाद अब भाजपा का अगला मिशन केरल और तमिलनाडु हो गया है। केरल विधानसभा चुनावों में तीन सीट जीतकर पार्टी केरल को अगला पश्चिम बंगाल बनाना चाह रही है। पश्चिम बंगाल में भाजपा ने 2016 में तीन सीटों पर जीत दर्ज़ किया था और 2026 में स्पष्ट बहुमत से काफी अधिक सीट लेकर सरकार बनाने में सफल हुई है। मगर भाजपा केरल में सत्ता में आने के लिए एक चुनाव का इंतज़ार नहीं करना चाह रही है और अन्य प्रदेशों में अपने अनुभवों से केरल में महज एक चुनाव में ही सत्ता प्राप्त करना चाह रही है।
भाजपा ने त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में वाम दलों का सफाया करके भाजपा ने कम्युनिस्ट दलों के खिलाफ चुनाव लड़ने और जीतने की कला सीख ली है। त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल के प्रयोग को केरल में लागू करके भाजपा अब केरल में आने वाले दिनों में कांग्रेस पार्टी नीत यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट को राजनीतिक तौर पर हाशिए पर करेगी। इसके लिए भाजपा 13-बिंदु राजनीतिक सूत्र के साथ आगे बढ़ रही है।
मजबूत योजना के साथ आगे बढ़ रही भाजपा
भाजपा इसके लिए सबसे पहले हिंदू समाज के पिछड़ी जातियों के बीच अपनी उपस्थिति को मजबूत करने की योजना के साथ आगे बढ़ रही है। समाज के इस वर्ग को वाम दलों का समर्थन रहा है। मगर इस बार वाम दलों के सत्ता से बेदखल होने के बाद यह वर्ग अब पूर्णतः भाजपा के साथ जुड़ेगा। केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पी विजयन ने अपने कार्यकाल में अपने परिवारवाद को बढ़ावा दिया है। विजयन ने अपने दामाद मोहम्मद रियास को मंत्री बनाने के लिए पार्टी के वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं को किनारे कर दिया था। इसका भी असर विधानसभा के चुनाव में देखने को मिला और वाम दल चुनाव हार गई। अतएव यह वर्ग अब पूरी तरह से भाजपा के साथ अपने को जोड़ लेगी।
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ईसाइयों के साथ निकटता बनाने के लिए प्रयास कर रही भाजपा
भाजपा राज्य में अल्पसंख्यकों विशेष रूप से ईसाइयों के साथ विधानसभा चुनावों से पहले समुदाय के साथ निकट संबंध बनाने के लिए पहले से ही प्रयास कर रही है। भाजपा को केवल इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी। आरक्षण पर भाजपा की नीति स्पष्ट है कि अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण के बहाने धार्मिक आरक्षण को पूरी तरह से समाप्त किया जाना चाहिए और आरक्षण नीतियों को ओबीसी, एससी/एसटी और ईडब्ल्यूएस श्रेणियों तक सीमित किया जाना चाहिए। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष चंद्रशेखर के अनुसार, पार्टी पिछड़ी जाति के आरक्षण को धर्म आधारित आरक्षण में बदलने की अनुमति नहीं देगी।
भाजपा इस मुद्दे के आधार पर पिछड़ी हिंदू जातियों के बीच अपनी स्वीकार्यता को बढ़ाना चाह रही है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष चंद्रशेखर ने कहा है कि आरक्षण एससी, एसटी और ओबीसी समुदायों के लिए हैं और पार्टी इसमें छेड़छाड़ के किसी भी प्रयास के खिलाफ पूरी ताकत से लड़ेगी।
भाजपा हिन्दुत्व के साथ ही ईसाई वर्ग के साथ जुड़ाव को बरकरार रखेगी
भाजपा हिन्दुत्व से जुड़ाव के साथ ही ईसाई वर्ग के साथ भी अपने जुड़ाव को बरकरार रखेगी। ईसाई वर्ग के सदस्य कई जिलों में संगठनात्मक पदों पर आसीन हैं। हालांकि, भाजपा की यह राजनीतिक पहल हिचकोले ले रही है। सत्तारूढ़ कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ के साथ बिशपों के बढ़ते राजनीतिक आपाधापी के बीच चर्च नेतृत्व से जुड़ाव भाजपा के लिए मुश्किल हो रहा है।
भाजपा ने सबरीमाला मुद्दे को फिर से उठाते हुए पार्टी की मूल हिंदुत्व स्थिति को फिर से दोहराया है। इसमें मंदिरों की संपत्तियों और संसाधनों के जांच करने की मांग की गई है, जो धार्मिक और सांस्कृतिक मोबिलाइजेशन के साथ-साथ सामाजिक संपर्क रणनीति पर निरंतर जोर दे रहा है। पार्टी ने सबरीमाला सोने की लूट के संबंध में कानूनी कार्रवाई और सीबीआई जांच की मांग करने के साथ ही सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश विरोध प्रदर्शनों के दौरान दर्ज सभी मामलों को वापस लेने की मांग करते हुए अपनी अगली राजनीतिक यात्रा की शुरुआत कर दिया है।

















