केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ गठबंधन ने हाल ही में विधानसभा चुनाव में एलडीएफ की 10 साल पुरानी सरकार को हराया है। लेकिन इसी के साथ ही पार्टी के अंदर मुख्यमंत्री पद को लेकर तीन मुख्य नेताओं के बीच सियासी विवाद खड़ा हो गया है। हर नेता पार्टी आलाकमान को मनाने की कोशिशों में लगा हुआ है।
तीन मुख्य दावेदार
वीडी सतीसन
वे विपक्ष के नेता के रूप में एलडीएफ के खिलाफ आक्रामक रुख के लिए जाने जाते हैं। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) का समर्थन उन्हें मिला हुआ है।
रमेश चेन्निथला
वे पहले विपक्ष के नेता रह चुके हैं और पार्टी संगठन पर उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। सोनिया गांधी के करीबी नेता समझे जाते हैं। 2021 के चुनाव में उनकी अगुवाई में पार्टी को हार मिली थी।
केसी वेणुगोपाल
वे कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हैं और राहुल गांधी व मल्लिकार्जुन खड़गे के बहुत भरोसेमंद माने जाते हैं। उन्होंने इस बार विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा था। इन तीनों के अलावा शशि थरूर का नाम भी कहीं-कहीं चर्चा में आ रहा है। तिरुवनंतपुरम के सांसद थरूर को मुख्य रूप से राष्ट्रीय राजनीति का चेहरा माना जाता है, न कि राज्य स्तर के प्रशासन का।
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दिल्ली पहुंचे तीनों दावेदार
शनिवार को तीनों मुख्य दावेदार दिल्ली में थे। अगले 24 घंटे में नाम की घोषणा होने की उम्मीद थी। इस बीच समर्थकों ने तिरुवनंतपुरम से इडुक्की तक अपने-अपने नेताओं के पोस्टर और होर्डिंग लगा दिए। सबसे ज्यादा विवाद तब हुआ जब दिवंगत नेता ओमान चांडी और केसी वेणुगोपाल की तस्वीर वाला एक फ्लेक्स बोर्ड फाड़ दिया गया और उस पर काला तेल डाल दिया गया। कांग्रेस सांसद राजमोहन उन्नीथन और पीजे कुरियन ने इस घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि दबाव की राजनीति से मुख्यमंत्री नहीं चुना जा सकता।
चयन की प्रक्रिया
कांग्रेस की परंपरा के मुताबिक, तिरुवनंतपुरम में नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक में एक प्रस्ताव पास करके मुख्यमंत्री चुनने का अधिकार हाईकमान को सौंप दिया गया। एआईसीसी के पर्यवेक्षक मुकुल वासनिक और अजय माकन ने विधायकों से बात करके अपनी रिपोर्ट मल्लिकार्जुन खड़गे को सौंप दी। शनिवार दोपहर खड़गे के घर पर केरल के वरिष्ठ नेताओं की अहम बैठक भी हुई।
वरिष्ठ नेता के. मुरलीधरन ने कहा कि फैसला लेते वक्त सिर्फ वरिष्ठता को ही नहीं देखा जाएगा। गठबंधन साथियों (यूडीएफ) की राय भी बहुत अहम होगी। क्योंकि यह गठबंधन सरकार है, इसलिए आईयूएमएल जैसी पार्टियों की पसंद का खास ध्यान रखा जाएगा। अभी सारी नजरें मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी पर हैं। पार्टी चाहती है कि नाम घोषित होने के बाद कोई अंदरूनी कलह न हो और सब एक साथ नई सरकार का स्वागत करें।

















