कर्नाटक बोर्ड के 93 फीसदी छात्रों ने हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में चुना
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कर्नाटक बोर्ड के 93 फीसदी छात्रों ने हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में चुना

आंकड़ों के मुताबिक, 7.5 लाख से अधिक छात्रों ने तीसरी भाषा के रूप में हिंदी का चयन किया है। यह ट्रेंड राज्य सरकार की पॉलिसी में ग्रेडिंग सिस्टम में बदलाव के बीच आया है। छात्रों की स्थानीय भाषाओं में बहुत कम दिलचस्पी देखी गई।

Written byसुनीता मिश्रासुनीता मिश्रा — edited by Shivam Dixit
Apr 8, 2026, 09:18 pm IST
inभारत, कर्नाटक

कर्नाटक में शैक्षणिक सत्र 2026 में लगभग 93 प्रतिशत छात्रों ने तीसरी भाषा के रूप में हिंदी को चुना है। देश के कई राज्यों में हिंदी थोपने को लेकर समय-समय पर बहस होती रहती है। इस बीच यह ट्रेंड दक्षिण भारत में छात्रों के बीच हिंदी भाषा की बढ़ती लोकप्रियता दर्शाता है।

7.5 लाख से अधिक छात्रों ने हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में चुना

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, शैक्षणिक सत्र 2026 में करीब 8.1 लाख छात्रों ने तीसरी भाषा को चुना है, जिनमें से 7.5 लाख से अधिक छात्रों ने सामान्य पाठ्यक्रम के तहत अपनी तीसरी भाषा के रूप में हिंदी का चयन किया। इसके अलावा आदर्श विद्यालयों में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम में 4,778 छात्रों ने हिंदी पढ़ी है। इससे हिंदी सीखने वालों की कुल संख्या लगभग 7.6 लाख हो गई है।

स्थानीय भाषा सीखने में छात्रों की बहुत कम दिलचस्पी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हिंदी की तुलना में दूसरी भाषाओं का चयन करने वाले छात्रों की संख्या काफी कम थी। खासकर स्थानीय भाषाओं में छात्रों की बहुत कम दिलचस्पी देखी गई। कन्नड़ को 11,483, जबकि अंग्रेजी को 32,135 छात्रों ने चुना। 5,544 छात्रों ने उर्दू और 5,159 ने संस्कृत को अपनी तीसरी भाषा के रूप में चुना। वहीं, अरबी को केवल 361, तुलु को 845, कोंकणी को 34 और सिर्फ तीन छात्रों ने मराठी को अपनी तीसरी भाषा के तौर पर अपनाया।

पॉलिसी में बदलाव

यह ट्रेंड राज्य सरकार द्वारा हाल ही में किए गए बदलाव के बाद आया है। पहले एसएसएलसी परीक्षा में तीसरी भाषा के अंक कुल परिणाम में शामिल होते थे, लेकिन अब यह नई ग्रेडिंग प्रणाली के आधार पर हो रहे हैं, जिससे छात्रों पर दबाव कम हुआ है। माना जा रहा है कि इस कदम से छात्रों के बीच हिंदी भाषा काफी लोकप्रिय हो रही है।

‘हिंदी को सीखना आसान’

दरअसल, नई ग्रेडिंग प्रणाली आने के बाद छात्रों के लिए भाषा चुनना आसान हो गया है। कर्नाटक स्टेट हाई स्कूल असिस्टेंट टीचर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मंजूनाथ एचके ने कहा, “थर्ड लैंग्वेज पॉलिसी लागू होने के बाद यह स्वाभाविक था कि अधिकतर छात्र हिंदी को ही चुनेंगे, क्योंकि यह हमारे देश में प्रमुख भाषाओं में से एक है और इसे सीखना भी आसान है।”

Topics: Karnataka Students Choose HindiThird Language HindiKarnataka Boardदक्षिण भारत में हिंदीकर्नाटकkarnatakaह‍िंदी भाषा
सुनीता मिश्रा
सुनीता मिश्रा
हरियाणा की कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री। इग्नू दिल्ली से राजनीतिक विज्ञान में मास्टर डिग्री। पत्रकारिता में 10 वर्षों का अनुभव। [Read more]
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