कांग्रेस पार्टी अपनी असफलता से नहीं सीखती है और चुनावों में मुँह की खाती है। कांग्रेस पार्टी अपनी गलतियों से सीखने के बदले उनको दोहराती है और फिर हार का ठीकरा इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन और अन्य मुद्दों पर डाल देती है। पंजाब वाली गलती कांग्रेस पार्टी कर्नाटक में भी दोहरा रही है। कांग्रेस पार्टी में पंजाब में अपनी बुरी पराजय से कुछ भी नहीं सीखा और उस गलती को फिर से दोहरा रही है। अब कांग्रेस को जिस प्रकार का पराजय पंजाब में मिला वैसा ही चुनाव परिणाम कर्नाटक में भी देखने को मिलेगा और फिर दोषारोपण इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन पर किया जाएगा।
गांधी परिवार की मनमानी
कांग्रेस पार्टी ने 2017 में पंजाब में चुनाव बाद बहुमत मिलने पर अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री बनाया। मगर चुनाव के कुछ समय पूर्व ही पार्टी ने लोकतान्त्रिक प्रणाली से निर्वाचित अमरिंदर सिंह को हटाकर चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री नियुक्त कर दिया। इसका कारण केवल गाँधी परिवार की अपनी खुद की मनमानी थी। गाँधी परिवार किसी भी जनाधार और लोकप्रिय नेता को बर्दाश्त नहीं करती है और इसकी कीमत अमरिंदर सिंह को अपने पद से मुक्त होकर चुकाना पड़ा। मगर पंजाब की जनता ने इसका बहुत ही क्रूर और कड़ा फैसला दिया। गाँधी परिवार द्वारा नियुक्त चरणजीत सिंह चन्नी को दो विधानभा की सीटों से हरा दिया। तत्कालीन मुख्यमंत्री चन्नी भदौर और चमकौर साहिब सीटों से चुनाव लड़ा और दोनों सीटों के हारने के साथ ही भदौर सीट पर मुश्किल से जमानत बचा सके थे।
कांग्रेस पार्टी के इस राजनीतिक गलती का सीधा लाभ आम आदमी पार्टी ने उठाया और पिछले विधानसभा में महज 20 सीटों वाली आप 92 सीट के साथ सरकार बनाने में सफलता प्राप्त किया। यह आप की लोकप्रियता से ज्यादा कांग्रेस पार्टी के राजनीतिक गलत कदमों का परिणाम था।
इसे भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी घुसपैठियों पर शुभेंदु सरकार का सख्त एक्शन: रोजाना 70-80 वापस भेजे जा रहे
कर्नाटक में सिद्धारमैया को हटाकर गलती कर रही कांग्रेस
जो गलती कांग्रेस पार्टी ने अमरिंदर सिंह को हटाकर किया। वहीं गलती कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी सिद्धारमैया को हटाकर दोहरा रही है। इसका सीधा लाभ आगामी विधानसभा के चुनाव में भाजपा को मिलेगा, क्योंकि इस राज्य में भाजपा की मुख्य विपक्षी दल है। कांग्रेस पार्टी ने कई प्रदेशों में ऐसी गलतियां की है और सत्ता से बेदखल होकर उसका कीमत चुकाई है। कांग्रेस पार्टी का वर्तमान में चार राज्यों तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक और केरल में मुख्यमंत्री है। मगर ये सभी राज्य सत्ता विरोधी लहर से संचालित होते हैं और इन राज्यों में चुनाव दर चुनाव सरकार बदलती रहती है। कांग्रेस पार्टी के पास एक भी स्थाई या कई बार सरकार बनाने वाली प्रदेश नहीं है।
भाजपा के पास गुजरात, असम, हरियाणा, त्रिपुरा, बिहार, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश सहित कई प्रदेश है, जहाँ पार्टी चुनाव दर चुनाव सरकार बना रही है। मगर कांग्रेस पार्टी केवल सत्ता विरोधी लहर का ही इंतज़ार कर रही है। भाजपा ने 2022 में इसी प्रकार का एक राज्य उत्तराखंड में लगातार दूसरी बार सरकार बनाकर कांग्रेस पार्टी के हाथों से सत्ता विरोधी रुझान वाला एक प्रदेश और छीन लिया है।

















