कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने स्कूलों में छात्राओं को हिजाब पहनने की अनुमति दे दी है। सिद्धारमैया सरकार ने पूर्व में भाजपा सरकार के फैसले को पलटते हुए बुधवार (13 मई) को आदेश जारी किया। इसके तहत राज्य के स्कूलों और प्री-यूनिवर्सिटी काॅलेजों में छात्रों को निर्धारित यूनिफॉर्म के साथ मजहबी परंपराओं से जुड़े प्रतीकों को पहनने की इजाजत दी गई है।
यानी अब स्कूलों और दूसरे शैक्षणिक संस्थानों में मुस्लिम छात्राओं को हिजाब पहनने की छूट होगी, लेकिन भगवा शॉल पर रोक जारी रहेगी। यह मौजूदा शैक्षणिक सत्र से ही प्रभावी हो गया है।
स्कूल शिक्षा और साक्षरता मंत्री मधु बंगारप्पा ने कहा कि सरकार ने एक नया आदेश जारी किया है। इसमें छात्रों को तय यूनिफॉर्म के साथ-साथ कुछ पारंपरिक और मजहबी प्रतीक जैसे हिजाब/हेडस्कार्फ, पगड़ी, जनेऊ और रुद्राक्ष पहनने की इजाजत होगी। नए आदेश में कहा गया है कि ये प्रतीक यूनिफॉर्म की जगह नहीं ले सकते। इनसे छात्रों की पहचान में कोई नहीं बाधा आनी चाहिए और न ही सुरक्षा नियमों से समझौता होना चाहिए। मधु बंगारप्पा का कहना है कि यह फैसला 24 अप्रैल को हुई एक घटना के बाद लिया गया, जिसमें परीक्षा के दौरान छात्रों से जनेऊ उतरवा दिए गए थे।
कर्नाटक हाईकोर्ट ने भाजपा के फैसले को सही ठहराया
गौरतलब है कि कर्नाटक की भाजपा सरकार ने 5 फरवरी, 2022 को शिक्षण संस्थानों में हिजाब पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। सरकार के आदेश में कहा गया था कि छात्रों को केवल निर्धारित यूनिफॉर्म का ही पालन करना चाहिए, ताकि किसी भी छात्र के साथ भेदभाव न हो सके। कर्नाटक में यह मुद्दा काफी गरमाया था। इस प्रतिबंध के बाद पूरे राज्य में भारी विरोध प्रदर्शन हुए थे और कई मुस्लिम छात्राओं को कक्षाओं में प्रवेश करने से रोक दिया गया था। उस समय की भाजपा सरकार के फैसले को कर्नाटक हाईकोर्ट ने भी सही ठहराया था।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था मामला
कर्नाटक हाईकोर्ट से होते हुए हिजाब विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। मार्च 2022 में, हाईकोर्ट ने भाजपा सरकार के फैसले को सही ठहराते हुए कहा था कि हिजाब पहनना इस्लाम में अनिवार्य मजहबी प्रथा का हिस्सा नहीं है। इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा। अक्टूबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर खंडित फैसला सुनाया था, जिसके बाद इसे एक बड़ी बेंच के पास भेजने का निर्णय लिया गया। 2023 में कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इस आदेश को वापस लेने के संकेत दिए थे।
















