‘परीक्षा पे चर्चा’ : छात्रों को प्रधानमंत्री मोदी ने दिया मंत्र, कहा- 'अंक नहीं आत्मविश्वास बनाता है भविष्य'
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‘परीक्षा पे चर्चा’ : छात्रों को प्रधानमंत्री मोदी ने दिया मंत्र, कहा- ‘अंक नहीं आत्मविश्वास बनाता है भविष्य’

परीक्षा पे चर्चा 2026 में पीएम मोदी ने छात्रों को तनाव, एकाग्रता, पढ़ाई, सपने और जीवन संतुलन पर दिए व्यावहारिक मंत्र, बोले- परीक्षा नहीं जीवन है लक्ष्य

Written byएजेंसीएजेंसी — edited by Shivam Dixit
Feb 6, 2026, 06:29 pm IST
inभारत, शिक्षा, दिल्ली

नई दिल्ली (हि.स.) । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा पास करना नहीं बल्कि जीवन का सर्वांगीण विकास होना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि परीक्षा जीवन की अंतिम मंजिल नहीं, स्वयं को परखने का एक माध्यम है। अंक ही सबकुछ नहीं होते, असली लक्ष्य संतुलित, आत्मविश्वासी और सक्षम जीवन का निर्माण होना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने आज यहां अपने आवास पर ‘परीक्षा पे चर्चा’ 2026 के नौवें संस्करण में देश के विभिन्न हिस्सों से आए विद्यार्थियों से संवाद किया।

मणिपुर की एक छात्रा के सवाल पर प्रधानमंत्री ने छात्रों को सलाह दी कि जो बीत गया उसकी गिनती में समय बर्बाद न करें। अपना उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि ‘17 सितंबर को उनके जन्मदिन पर एक नेता ने फोन किया और बोले कि अब आप 75 के हो गए, तो मैंने कहा कि अभी 25 बाकी हैं।’ उन्होंने कहा कि ‘जो बीता है, मैं उसे गिनता नहीं हूं। जो बचा है उसको गिनता हूं।’ उन्होंने छात्रों से भी यही दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह करते हुए कहा कि जो बीता है उसकी गिनती में समय बर्बाद मत कीजिए, जो बचा है उसको जीने के लिए सोचिए।

अलग-अलग अध्ययन पद्धतियों को लेकर भ्रम

माता-पिता और शिक्षकों द्वारा सुझाई जाने वाली अलग-अलग अध्ययन पद्धतियों को लेकर भ्रम संबंधी एक छात्र के सवाल पर प्रधानमंत्री ने कहा कि यह स्थिति जीवन भर बनी रहती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद भी लोग उन्हें अलग-अलग तरीके से काम करने की सलाह देते हैं। सलाह जरूर लें लेकिन वही करें जो आपके स्वभाव और परिस्थितियों के अनुकूल हो। मोदी ने कहा, “आप अपना जो पैटर्न है, उस पर पूरा भरोसा करो। लेकिन जो पैटर्न के लिए सुझाव देते हैं, उसको ध्यान से सुनो, समझने की कोशिश करो और उसमें आपको लगता है कि यह चीज अगर जोड़ दूं तो अच्छा होगा। लेकिन किसी के कहने पर मत जोड़ो, अपने अनुभव से जोड़ो।”

“इम्पोर्टेंट क्वेश्चन” पर अत्यधिक निर्भरता को लेकर किया आगाह

प्रधानमंत्री ने बोर्ड और स्कूल परीक्षाओं की तैयारी में पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों और तथाकथित “इम्पोर्टेंट क्वेश्चन” पर अत्यधिक निर्भरता को लेकर छात्रों को आगाह किया। उन्होंने कहा कि जब छात्र केवल सीमित पैटर्न पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तब प्रश्नपत्र कठिन लगने लगता है, जबकि वह सिलेबस के बाहर नहीं होता। यह प्रवृत्ति उनके छात्र जीवन के समय भी थी और आज भी कुछ शिक्षक अनजाने में इसे बढ़ावा देते हैं। अच्छे शिक्षक वही होते हैं जो पूरे सिलेबस को जीवन से जोड़ कर पढ़ाते हैं।

प्रधानमंत्री ने खेल का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे एक खिलाड़ी केवल कंधे की मांसपेशियां मजबूत करके अच्छा बॉलर नहीं बन सकता, वैसे ही पढ़ाई में भी संपूर्ण तैयारी जरूरी है। शरीर, मन, नींद, खानपान- सबका संतुलन जरूरी है। शिक्षा भी ऐसी ही है; उसे जीवन के हर पहलू से जोड़कर देखना चाहिए।

एकाग्रता की कमी, भूलने की समस्या

पढ़ाई के दौरान एकाग्रता और भूलने की समस्या पर प्रधानमंत्री ने व्यावहारिक सलाह दी। उन्होंने कहा कि छात्र अपने से कमजोर विद्यार्थियों को पढ़ाएं और अपने से बेहतर विद्यार्थियों से कुछ समय मार्गदर्शन लें। इससे दोहरा लाभ होगा- समझ मजबूत होगी और आत्मविश्वास भी बढ़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि किसी क्षण में जितना अधिक हम शामिल होते हैं, वह उतना ही लंबे समय तक याद रहता है।

बोर्ड और प्रतियोगी परीक्षा की एकसाथ तैयारी

कक्षा 12वीं के छात्रों द्वारा बोर्ड परीक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की एक साथ तैयारी के सवाल पर प्रधानमंत्री ने कहा कि प्राथमिकता बोर्ड परीक्षा को देनी चाहिए। यदि छात्र अपने सिलेबस को गहराई से आत्मसात कर लेते हैं तो प्रतियोगी परीक्षाएं अपने आप आसान हो जाती हैं। उन्होंने माता-पिता से भी आग्रह किया कि वे बच्चों को उनकी क्षमता, रुचि और गति के अनुसार आगे बढ़ने दें।

परीक्षा के दौरान घबराहट से होने वाली गलतियां

परीक्षा के दौरान घबराहट और जल्दबाजी से होने वाली गलतियों पर प्रधानमंत्री ने एक सरल तकनीक साझा की। उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्र मिलने पर 30 सेकंड शांत बैठकर गहरी सांस लें। इससे मन स्थिर होता है और सही उत्तर सूझता है। उन्होंने कहा, “नहीं आता है या गलती होना अलग बात है, लेकिन आता है और फिर भी गलती हो जाए- यह अक्सर हड़बड़ी के कारण होता है।”

सपनों को कर्म से जोड़ें

सपनों के विषय पर प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सपने न देखना एक तरह का अपराध है लेकिन केवल सपने गुनने से कुछ नहीं होता, उन्हें कर्म से जोड़ना जरूरी है। यदि कोई छात्र अंतरिक्ष यात्री बनना चाहता है तो उसे उस दिशा में पढ़ना, जीवनी पढ़नी, संबंधित कार्यक्रम देखना और रुचि को धीरे-धीरे पोषित करना चाहिए। उन्होंने यह भी सलाह दी कि सपनों को सार्वजनिक करने के बजाय उन्हें लिखकर निजी रूप से संजोया जाए।

महान व्यक्तियों की जीवनी पढ़ने की सलाह

प्रधानमंत्री ने छात्रों को महान व्यक्तियों की जीवनी पढ़ने की सलाह देते हुए कहा कि इससे यह समझ आता है कि बड़े लोग भी कभी साधारण हालात से ही आगे बढ़े थे। इससे छात्रों में यह विश्वास पैदा होता है कि वे भी उसी रास्ते पर चल सकते हैं- एक कदम, फिर दूसरा और फिर तीसरा।

कौशल विकास पर बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जीवन कौशल और पेशेवर कौशल दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने संतुलन पर जोर देते हुए कहा कि जैसे शरीर का संतुलन बिगड़ने पर व्यक्ति गिर जाता है, वैसे ही जीवन में किसी एक पक्ष पर अत्यधिक जोर नुकसानदेह हो सकता है।

विकसित भारत के लिए व्यक्तिगत संकल्प

प्रधानमंत्री ने छात्रों से विकसित भारत के निर्माण में भागीदारी का आह्वान करते हुए कहा कि वर्ष 2047 में यही छात्र देश की सबसे सक्रिय पीढ़ी होंगे और उन्हें अभी से उसके लिए तैयारी करनी चाहिए। आज के युवा उस समय अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण दौर में होंगे। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे विकसित भारत के लिए अपने व्यक्तिगत संकल्प लिखें और रोजमर्रा की आदतों में स्वदेशी, स्वच्छता और अनुशासन को अपनाएं। उन्होंने कहा कि स्वच्छता केवल सरकार का नहीं, हर नागरिक का कर्तव्य है।

भारतीय संस्कृति पर आधारित खेल विकसित करने की सलाह

गेमिंग से जुड़े सवाल पर प्रधानमंत्री ने कहा कि गेमिंग एक कौशल है और यह व्यक्तित्व विकास में सहायक हो सकता है लेकिन इसे केवल मनोरंजन या जुए के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने छात्रों को गेम खेलने के बजाय गेम निर्माता बनने और भारतीय संस्कृति व कथाओं पर आधारित खेल विकसित करने की सलाह दी।

एआई का समझदारी से उपयोग

तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर प्रधानमंत्री ने कहा कि एआई एक महान शिक्षक है लेकिन उसका उपयोग समझदारी से होना चाहिए। केवल सारांश निकालना बुद्धिमानी नहीं है; एआई का उपयोग अपनी रुचि के अनुसार सीखने और ज्ञान बढ़ाने के लिए करना चाहिए।

एक छात्र द्वारा शिक्षक के बहुत तेज पढ़ाने की शिकायत पर प्रधानमंत्री ने शिक्षक के दृष्टिकोण से उत्तर देते हुए कहा कि शिक्षक को छात्रों से एक कदम आगे रहना चाहिए, ताकि लक्ष्य चुनौतीपूर्ण रहे लेकिन असंभव न हो। वहीं, छात्रों को शिक्षक द्वारा पढ़ाये जाने वाले पाठ को पूर्व में अध्ययन कर शिक्षक से दो कदम आगे रहने की सलाह भी दी। प्रधानमंत्री ने शिक्षकों को सलाह दी कि वे छात्रों में जिज्ञासा पैदा करने और समझ बेहतर बनाने के लिए उन्हें पहले से जानकारी दें कि अगले सप्ताह कौन-सा पाठ पढ़ाया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा, “हमारा लक्ष्य ऐसा होना चाहिए, जो पहुंच में हो लेकिन पकड़ में ना हो।”

कार्यक्रम के दौरान सिक्किम की छात्रा श्रेया प्रधान ने हिंदी, नेपाली और बांग्ला भाषा में स्वयं रचित गीत प्रस्तुत किया। प्रधानमंत्री ने विद्यार्थियों की प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि पढ़ाई, कौशल, विश्राम और शौक इन सबका संतुलन ही वास्तविक विकास की कुंजी है।

प्रधानमंत्री ने सभी छात्रों को कार्यक्रम की शुरुआत में असम का गमछा भेंट किया। प्रधानमंत्री ने असम के गमछा का उल्लेख कर उसे नारी सशक्तिकरण और पूर्वोत्तर की कारीगरी का प्रतीक बताया।

अंत में प्रधानमंत्री ने छात्रों को संदेश दिया कि परीक्षा को उत्सव की तरह लें, स्वयं पर भरोसा रखें और अपने जीवन के केंद्र में सत्य और आत्मविश्वास को रखें। उन्होंने कहा, “शिक्षा परीक्षा के लिए नहीं, जीवन के लिए है और परीक्षा स्वयं को पहचानने का अवसर है।”

परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम का अगला एपिसोड 9 फरवरी को सुबह 10 बजे प्रसारित होगा।

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