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साधना के 100 वर्ष

हरिद्वार में एक सप्ताह तक चले गायत्री परिवार के शताब्दी समारोह में भारत सहित 80 देशों के साधक जुटे। मनीषियों ने धर्म, संस्कृति, पर्यावरण, शिक्षा, सेवा जैसे विषयों पर चिंतन-मनन किया

Written byPanchjanyaPanchjanya
Jan 28, 2026, 08:22 am IST
inउत्तराखंड, धर्म-संस्कृति
दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह के एक सत्र का उद्घाटन करते अमित शाह। साथ में हैं डॉ. चिन्मय पंड्या और पुष्कर सिंह धामी

दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह के एक सत्र का उद्घाटन करते अमित शाह। साथ में हैं डॉ. चिन्मय पंड्या और पुष्कर सिंह धामी

गत 18-24 जनवरी को हरिद्वार में अखिल विश्व गायत्री परिवार ने एक ऐसा अनुष्ठान किया, जिसकी गूंज 80 से अधिक देशों में सुनाई दी। इस आयोजन की पृष्ठभूमि में तीन उपलब्धियां रहीं- गायत्री परिवार के संस्थापक आचार्य पं. श्रीराम शर्मा आचार्य की साधना के 100 वर्ष, वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा की जन्मशती और गायत्री कुंज में जल रहे अखंड दीपक के 100 वर्ष। हरिद्वार में आयोजित शताब्दी समारोह से पहले देश-विदेश में ज्योति कलश यात्राएं निकाली गईं। समारोह में अलग-अलग दिन अनेक कार्यक्रम हुए। पूरा आयोजन राजा दक्ष की नगरी कनखल के वैरागी द्वीप की भूमि पर हुआ। इसके लिए वहां एक विशाल अस्थाई नगर बसाया गया। जब वहां शताब्दी ध्वज लहराया गया, तो मानो एक युग ने अपने गौरवशाली अतीत को नमन करते हुए नवसंकल्प लिया।

समारोह में एक दिन पर्यावरण पर चर्चा हुई। इस अवसर पर जूनापीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज ने प्लास्टिक के पूर्ण त्याग और वृक्षारोपण को जीवन-संस्कार बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि विवाह-वर्षगांठ, जन्मदिवस और मांगलिक अवसरों को हरित-संकल्प से जोड़ा जाए। पतंजलि योगपीठ के संस्थापक स्वामी रामदेव ने कहा कि गायत्री परिवार कोई सामान्य संगठन नहीं, बल्कि वेद तीर्थ और सनातन चेतना का जीवंत केंद्र है। समारोह के नेतृत्वकर्ता डाॅ. चिन्मय पंड्या ने पर्यावरण संकट पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज प्रदूषण युद्ध और आतंकवाद से भी अधिक खतरनाक हो चुका है। प्राण-वायु विषैली होती जा रही है।

समारोह में स्वामी विश्वेश्वरानंद जी, स्वामी अवधेशानंद जी महाराज और स्वामी रामदेव का सम्मान करते डॉ. चिन्मय पंड्या (सबसे बाएं)

समारोह में उपस्थित साधकों को संबोधित करते हुए हरि सेवा आश्रम के प्रमुख संत स्वामी हरिचेतनानंद जी महाराज ने आह्वान किया कि अब अखंड दीप को केवल प्रज्ज्वलित रखने का नहीं, बल्कि उसे ज्वाला में परिवर्तित करने का समय है। एक दीप तुम जलाओ और एक दीप हम जलाएं, ताकि यह प्रकाश घर-घर, जन-जन तक पहुंचे। 19 जनवरी को समारोह में हाउस आफ कॉमंस, यू.के. के सदस्य लॉर्ड कृष रावल ने वहां के प्रधानमंत्री का शुभकामना संदेश सुनाया। रावल ने यह भी कहा कि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य के विचार विश्व को शांति की ओर ले जाने में सहायक हैं। 21 जनवरी को समारोह में जर्मनी में भारतीय मूल के पहले सांसद राहुल कुमार ने कहा कि गायत्री परिवार का विस्तार पूरे विश्व में तेजी से होना चाहिए।

22 जनवरी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि गायत्री परिवार सनातन का ध्वज वाहक है। गायत्री परिवार ने राष्ट्र निर्माण का जो संकल्प लिया है, वह भारत मां को विश्व में परम वैभव का स्थान दिलाएगा। उन्होंने कहा कि अब पंडित श्रीराम शर्मा जी की कल्पना साकार हो रही है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह शताब्दी समारोह वंदनीया माताजी के तपस्वी जीवन, निःस्वार्थ सेवा और अखंड साधना के प्रति राष्ट्र की कृतज्ञता की साक्षात भावात्मक अभिव्यक्ति है। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि सेवा, साधना और संस्कार का यह शताब्दी समारोह नवयुग के निर्माण में मील का पत्थर साबित होगा।

समारोह में उपस्थित गायत्री साधक

समारोह स्थल 22 जनवरी की संध्या बेला में आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर हो उठा। लाखों टिमटिमाते दीपों की आलोक-श्रृंखला से पूरा शताब्दी नगर जगमगा उठा। इस अवसर पर आयोजित भव्य दीप महायज्ञ में अखिल विश्व गायत्री परिवार की प्रमुख श्रद्धेया शैलदीदी की गरिमामयी उपस्थिति रही। दीप महायज्ञ के मुख्य अतिथि और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविन्ददेव गिरि जी महाराज ने कहा कि वे गायत्री परिवार के कार्यों से पिछले 70 वर्ष से अधिक समय से परिचित हैं। उन्होंने कहा कि हमें अपने भीतर ऐसी जाग्रत मानसिकता विकसित करनी चाहिए, जिससे भारत माता और सनातन संस्कृति के संरक्षण व विकास के लिए निरंतर कार्य करते रहने की प्रेरणा मिलती रहे।

इस अवसर पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह वर्चुअल माध्यम से समारोह से जुड़े। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार का मानवता के विकास के लिए किया जा रहा कार्य अतुलनीय है। संस्कृति की रक्षा से ही सीमा की सुरक्षा सुनिश्चित है। उन्होंने कहा कि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने व्यक्ति की चेतना तक पहुंचने का कार्य किया। इससे पूर्व डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि वैदिक परंपरा की वास्तविक आधारशिला अंतःकरण में निहित विश्वास, निष्ठा, समर्पण, संवेदना और संकल्पना को जाग्रत करना है। उन्होंने कहा कि दीप महायज्ञ केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि खंड-खंड में बिखरी चेतना को अखंड ज्योति में रूपांतरित करने की जीवन साधना है। समारोह में देश-विदेश से बड़ी संख्या में गायत्री साधक आए।

कलाकारों की मनोहारी प्रस्तुति

ज्योति कलश यात्रा के दौरान देवभूमि उत्तराखंड की अद्भुत एवं अलौकिक झांकी ने उपस्थित श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। हिमालयी संस्कृति, लोक आस्था और आध्यात्मिक गरिमा से सजी इस झांकी ने उत्तराखंड की देवतुल्य परंपराओं, लोक संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का सजीव दर्शन कराया। यात्रा में सम्मिलित छत्तीसगढ़ के जनजाति लोकनृत्य ने अपनी सहजता, ऊर्जा और प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली का भावपूर्ण प्रदर्शन किया। ढोल-मांदर की गूंज के साथ थिरकते कदमों ने जनजातीय संस्कृति की जीवंतता को साकार कर दिया। वहीं गुजरात का पारंपरिक ‘तलवार राठवा नी घेर’ नृत्य वीरता, शौर्य और अनुशासन का प्रतीक बनकर उभरा। तलवारों की लयबद्ध गति के साथ नर्तकों की सशक्त प्रस्तुतियों ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। ओडिशा का डाकूल नृत्य अपनी विशिष्ट वेशभूषा और प्रतीकात्मक भाव-भंगिमाओं के माध्यम से लोक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं की गहराई को उजागर करता रहा। इसी क्रम में मध्य प्रदेश का भगोरिया एवं भड़म-गौर नृत्य उत्साह, उमंग और लोकजीवन की मस्ती को अभिव्यक्त करता हुआ यात्रा का विशेष आकर्षण बना।

Topics: main. FEATUREDसनातन चेतनादीप महायज्ञअखंड दीपकमनीषीजन्मशतीपर्यावरण संरक्षणनवनिर्माण / नवसंकल्पअनुष्ठानध्वज वाहकपाञ्चजन्य विशेषसाधनाशताब्दी समारोह
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