अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने जिहादी सोच को मदद देते आ रहे ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ की तीन मध्य एशियाई शाखाओं को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है। ट्रंप ने पिछले साल ही ऐसा करने का वादा किया था जिसे अब उन्होंने पूरा कर दिया है। इन शाखाओं और उनके सदस्यों पर कड़े प्रतिबंध जड़ दिए गए हैं। माना जा रहा है कि ट्रंप के इस फैसले का असर मध्य एशिया में अमेरिका के सहयोगियों के साथ संबंधों पर पड़ सकता है।
अमेरिका के ट्रेजरी और स्टेट डिपार्टमेंट ने मुस्लिम ब्रदरहुड की लेबनान, जॉर्डन और मिस्र में कार्यरत शाखाओं के खिलाफ ये प्रतिबंध लगाए हैं। ट्रंप के अनुसार, ये संयुक्त राज्य अमेरिका और अमेरिकी हितों के लिए खतरा पैदा कर रही हैं।

अमेरिकी विदेश विभाग ने लेबनानी शाखा को एक विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया है, जो सबसे गंभीर आरोप माना जाता है। इसके तहत इस समूह को किसी भी तरह की मदद देना एक आपराधिक अपराध बन गया है। जॉर्डन और मिस्र की शाखाओं को ट्रेजरी विभाग द्वारा हमास को समर्थन देने को लेकर विशेष रूप से वैश्विक आतंकवादी घोषित किया गया है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने एक बयान में कहा कि ‘ये फैसला मुस्लिम ब्रदरहुड की शाखाओं की हिंसा और अस्थिरता को रोकने के लिए लगातार किए जा रहे प्रयास की शुरुआती कार्रवाई है। उन्होंने कहा कि ‘संयुक्त राज्य अमेरिका इन मुस्लिम ब्रदरहुड शाखाओं को आतंकवाद में शामिल होने या उसका समर्थन करने के संसाधनों से वंचित करने के लिए सभी उपलब्ध माध्यमों का उपयोग करेगा।’
विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रंप के हस्ताक्षर से जारी एक कार्यकारी आदेश के तहत पिछले साल रूबियो और ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट को इन समूहों पर प्रतिबंध लगाने का सबसे उचित तरीका तय करने का काम सौंपा गया था। इनके बारे में अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि वे हिंसा और अस्थिरता फैलाने के अभियानों में शामिल हैं या उनका समर्थन करते हैं, जो अमेरिका और अन्य क्षेत्रों को नुकसान पहुंचाते हैं।

वहीं ट्रेजरी के आतंकवाद और वित्तीय खुफिया मामलों के अवर सचिव जॉन हर्ले ने एक बयान में कहा है कि ‘मुस्लिम ब्रदरहुड ने हमास जैसे आतंकवादी समूहों को प्रेरित किया, पाला-पोसा और पैसा मुहैया कराया है। यह अमेरिकी लोगों और हमारे सहयोगियों की सुरक्षा के लिए सीधा खतरा हैं।’
ट्रंप के इस कार्यकारी आदेश में लेबनान, जॉर्डन और मिस्र की शाखाओं को विशेष रूप से निशाना बनाया गया था, जिसमें कहा गया था कि लेबनानी शाखा की एक इकाई ने हमास के इस्राएल पर 7 अक्तूबर, 2023 के हमले के बाद इस्राएल पर रॉकेट दागे थे, जिससे गाजा में युद्ध शुरू हुआ था। आदेश में कहा गया है कि जॉर्डन में समूह के नेताओं ने हमास को समर्थन दिया है।
मुस्लिम ब्रदरहुड 1928 में मिस्र में गठित किया गया था। लेकिन दिलचस्प तथ्य है कि 2013 में उसी देश में इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। जॉर्डन ने गत अप्रैल माह में मुस्लिम ब्रदरहुड पर बड़े पैमाने पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी।
यहां बता दें कि मुस्लिम ब्रदरहुड 1928 में मिस्र में गठित किया गया था। लेकिन दिलचस्प तथ्य है कि 2013 में उसी देश में इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। जॉर्डन ने गत अप्रैल माह में मुस्लिम ब्रदरहुड पर बड़े पैमाने पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी। इस मुद्दे पर जॉर्ज वाशिंगटन यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान और अंतरराष्ट्रीय मामलों के प्रोफेसर नाथन ब्राउन का कहना है कि अमेरिका के कुछ सहयोगी, जिनमें संयुक्त अरब अमीरात और मिस्र शामिल हैं, मुस्लिम ब्रदरहुड पर लगे प्रतिबंध से संतुष्ट होंगे।
प्रो. ब्राउन ने कहा कि जिन देशों में ‘ब्रदरहुड’ को बर्दाश्त किया जाता है, उनके और अमेरिका के संबंधों में इससे एक खटास जरूर पैदा होगी। इसमें कतर और तुर्किए जैसे देश शामिल हैं। तुर्किए की सत्तारूढ़ पार्टी के तो पहले मुस्लिम ब्रदरहुड के सदस्यों के साथ अच्छे संबंध भी रहे हैं। जबकि कतर सरकार ने मुस्लिम ब्रदरहुड से किसी भी प्रकार के संबंध होने से इनकार ही किया है।
माना जा रहा है कि अमेरिका द्वारा इस संगठन पर लगाए प्रतिबंध का असर न सिर्फ अमेरिका बल्कि पश्चिमी यूरोपीय देशों और कनाडा में आने वाले लोगों के वीजा और शरण के दावों पर भी पड़ सकता है।
अमेरिकी विशेषज्ञ प्रो. ब्राउन ने आगे कहा कि संभव है इससे इमिग्रेशन अधिकारियों को शक करने का एक मजबूत आधार मिलेगा, और अदालतों के लिए ‘ब्रदरहुड’ के उन सदस्यों के खिलाफ किसी भी तरह की आधिकारिक कार्रवाई पर सवाल उठाना मुश्किल हो सकता है जो इस देश में रहना चाहते हैं, यहां राजनीतिक शरण मांग रहे हैं।
रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रपति ट्रंप ने 2019 में अपने पहले कार्यकाल के दौरान मुस्लिम ब्रदरहुड को आतंकवादी संगठन घोषित करने के बारे में विचार किया था। कुछ प्रमुख ट्रंप समर्थकों, जिनमें दक्षिणपंथी सोच इन्फ्लुएंसर लौरा लूमर भी शामिल हैं, ने उनके प्रशासन पर इस समूह के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का दबाव डाला था। इससे पहले रिपब्लिकन नेतृत्व वाली दो राज्य सरकारे- फ्लोरिडा और टेक्सास-इस समूह को आतंकवादी संगठन घोषित कर ही चुकी थीं।
ट्रंप के इस आदेश में जॉर्डन में मुस्लिम ब्रदरहुड के नेताओं पर हमास को ‘मटीरियल सपोर्ट’ देने और समूह की लेबनानी शाखा– जिसे अल-जमा अल-इस्लामिया के नाम से जाना जाता है–पर इस्राएल के साथ युद्ध में हमास और हिज्बुल्लाह का साथ देने का आरोप लगाया गया है।
इसी आदेश में यह दावा भी किया गया है कि इस्राएल के गाजा पर युद्ध के दौरान मिस्र के एक मुस्लिम ब्रदरहुड नेता ने संयुक्त राज्य अमेरिका के सहयोगियों और हितों के खिलाफ हिंसक हमलों का आह्वान किया था।

















