केंद्र सरकार ने शैक्षणिक संस्थानों के आसपास के इलाकों को नशामुक्त बनाने का प्रस्ताव रखा है। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने संसद में बताया कि संस्थानों के चारों ओर 500 मीटर यानी आधा किलोमीटर के दायरे में तंबाकू, शराब, गुटका या किसी भी तरह के नशीले पदार्थों की बिक्री नहीं हो सकेगी। यह प्रस्ताव नशीले पदार्थों के नियंत्रण से जुड़े विजन डॉक्यूमेंट (2026-2029) का हिस्सा है।
सरकार का कहना है कि यह कदम प्रधानमंत्री के नशा मुक्त अभियान से जुड़ा है। केंद्र से पैसे पाने वाले उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्र कल्याण कार्यक्रमों के तहत छात्रों की सहमति से नशा जांच शुरू करने का भी प्रस्ताव है।
तीन साल का रोडमैप क्या कहता है
नित्यानंद राय ने बताया कि यह तीन वर्षीय रोडमैप प्रिवेंटिव एजुकेशन पर जोर देता है। यानी किसी समस्या या बुरी आदत शुरू होने से पहले ही लोगों को जानकारी और ट्रेनिंग देकर बचाया जाए। इसमें जागरूकता अभियान, काउंसलिंग और सामुदायिक भागीदारी भी शामिल है। मकसद है कि स्कूल-कॉलेज का माहौल सुरक्षित और नशामुक्त रहे।
उन्होंने कहा कि छात्र कल्याण कार्यक्रम के तहत सहमति से स्क्रीनिंग टेस्ट का प्रस्ताव भी विजन डॉक्यूमेंट में है। यह छात्रों के लिए सुरक्षित माहौल बनाने का एक सुव्यवस्थित और समयबद्ध प्लान है।
प्रधानमंत्री के बयान से जुड़ा प्रस्ताव
यह प्रस्ताव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान के बाद आया है जिसमें उन्होंने युवाओं को भारत की “अमृत पीढ़ी” कहा था। उन्होंने कहा था कि अगले 20-25 साल में युवा अपना जीवन तय करेंगे और 2047 तक देश को विकसित भारत बनाने में मदद करेंगे। इसलिए जरूरी है कि वे नशे और दूसरी बुरी आदतों से दूर रहें।
प्रधानमंत्री ने “विकसित भारत संकल्प अभियान” के तहत “नशा मुक्त युवा” अभियान शुरू किया। दो अगस्त को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उन्होंने एक करोड़ से ज्यादा युवाओं से बात की। उन्होंने कहा था कि देश को युवाओं की ऊर्जा, कल्पना और प्रतिभा की जरूरत है। इसलिए व्यसन से मुक्त रहना देश और खुद के जीवन दोनों के लिए जरूरी है।
अवैध नशीले पदार्थों पर कार्रवाई
गृह राज्य मंत्री ने एक लिखित जवाब में बताया कि सरकार अवैध नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए कई कदम उठा रही है। 2025 में समुद्री मार्गों से 390.803 किलोग्राम नशीले पदार्थ जब्त हुए। इनमें 305.894 किलोग्राम एम्फेटामिन, 53.62 किलोग्राम गांजा, 29.954 किलोग्राम हशीश तेल और 1.335 किलोग्राम चरस शामिल हैं।
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी), दूसरी एजेंसियां और राज्य पुलिस नशीली दवा और मादक पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के तहत काम कर रही हैं।
छात्रों का माहौल साफ रखने पर फोकस
इस पूरे प्लान में मुख्य जोर शैक्षणिक संस्थानों के आसपास के माहौल को साफ रखने पर है। 500 मीटर के दायरे में नशीले पदार्थों की बिक्री बंद रहेगी। साथ ही संस्थानों में सहमति से जांच और जागरूकता कार्यक्रम चलाने की बात है। सरकार का मानना है कि इससे छात्रों को सुरक्षित माहौल मिलेगा और नशे से जुड़ी समस्याओं को जड़ से रोकने में मदद मिलेगी।











