नई दिल्ली: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के एक बयान ने फिर से ट्रंप की टेंशन बढ़ा दी है। नेतन्याहू का कहना है कि अगर आवश्यकता पड़ी तो ईरान पर फिर से सैन्य हमला करेंगे। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम समझौता चल रहा है। नेतन्याहू ने चैनल 14 को दिए इंटरव्यू में कहा कि ईरान के खिलाफ पहले किए गए सैन्य अभियानों ने इजरायल को संभावित परमाणु खतरे से बचाया। ईरान से हमने खुद को एटमी बमों से बचाया और अगर जरूरत पड़ी तो तीसरी बार भी ऐसा करेंगे। इजरायल किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा और आवश्यकता पड़ने पर स्वतंत्र रूप से कार्रवाई करेगा।
नेतन्याहू के बयान से बढ़ी अमेरिका-ईरान की चिंता?
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए बातचीत चल रही है। ऐसे में नेतन्याहू का यह बयान ट्रंप की चिंता को बढ़ा सकता है। नेतन्याहू ने फिर दोहराया कि अमेरिका और ईरान के बीच हुआ समझौते इजरायल पर लागू नहीं होता है। उन्होंने कहा कि यदि कोई समझौता उसकी सुरक्षा चिंताओं का समाधान नहीं करता और ईरान की सैन्य या परमाणु क्षमताएं बरकरार रहती हैं, तो वह खुद को उस समझौते से बंधा हुआ नहीं मानेगा। इससे साफ है कि इजरायल भविष्य में भी एकतरफा सैन्य कार्रवाई का विकल्प खुला रखना चाहता है।
इजरायल और ईरान के बीच सैन्य तनाव जारी है। बेरूत में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर इजरायली हमलों के बाद ईरान ने भी मिसाइलें दागीं हैं। इसके जवाब में इजरायल ने फिर ईरान के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। नेतन्याहू ने दक्षिणी लेबनान के इजरायली नियंत्रण वाले इलाकों का दौरा भी किया है। उन्होंने कहा कि जब तक हिज्बुल्लाह हथियारबंद है और इजरायल के लिए खतरा बना हुआ है तब तक सेना दक्षिणी लेबनान से पीछे नहीं हटेगी। गौरतलब है कि इजरायल पहले से ही कह रहा है कि जब तक हिज्बुल्लाह का खात्मा नहीं होता वो लेबनान पर हमले जारी रखेगा।

















