ऋषिकेश: प्रकृति पर्यावरण और मानवता के कल्याण के पावन संकल्प के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पर्यावरण विभाग के राष्ट्रीय संयोजक श्री गोपाल आर्य जी का पावन आगमन परमार्थ निकेतन में हुआ। इस अवसर पर परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के साथ उनकी दिव्य भेंटवार्ता हुई, जिसमें पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, हरियाली संवर्धन, भारतीय संस्कृति में प्रकृति के महत्व तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित भविष्य के निर्माण पर गहन विचार-विमर्श हुआ।
भारतीय संस्कृति का प्राण है प्रकृति
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि प्रकृति केवल हमारे जीवन का आधार नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति का प्राण है। भारत ने सदैव पृथ्वी को माता माना है और नदियों, पर्वतों, वृक्षों एवं समस्त जीव-जगत में दिव्यता का दर्शन किया है। पर्यावरण संरक्षण हमारी सनातन संस्कृति का मूल संस्कार है।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि श्रावण मास सृष्टि की सामूहिक साधना का अवसर है। यह वह पावन समय है जब सम्पूर्ण प्रकृति शिवमय हो उठती है। वर्षा की हर बूंद शिव का आशीर्वाद बनकर धरती को जीवन देती है, नदियों की हर धारा शिव की करुणा का संदेश देती है और वृक्षों की हरियाली सृष्टि के नवजीवन का उत्सव बन जाती है।
शिव की चेतना को करें जागृत
उन्होंने आह्वान किया कि इस पावन श्रावण में हम अपने अंतर्मन में शिव की चेतना को जागृत करें, प्रकृति का सम्मान करें और जल, जंगल एवं जीवन की रक्षा का संकल्प लें। श्री गोपाल आर्य ने पर्यावरण संरक्षण में जनभागीदारी के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि पर्यावरण की रक्षा प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। हमारी भारतीय जीवन पद्धति सदैव प्रकृति के साथ सामंजस्य और सम्मान का संदेश देती रही है।
पर्यावरण संरक्षण को जनांदोलन बनाने की जरूरत
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन बनाना होगा। प्रत्येक परिवार, युवा और समाज का प्रत्येक व्यक्ति जब प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनेगा, तभी वास्तविक परिवर्तन संभव होगा। उन्होंने युवाओं से जल संरक्षण, वृक्षारोपण, स्वच्छता और सतत जीवनशैली को अपनाने का आह्वान किया। इस अवसर पर श्री गोपाल आर्य जी एवं पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने संदेश दिया कि भारत की आध्यात्मिक चेतना और आधुनिक पर्यावरणीय प्रयासों का समन्वय ही विश्व को एक नई दिशा प्रदान कर सकता है। श्रावण मास के पावन उपहार स्वरूप पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने श्री गोपाल आर्य जी को परमार्थ निकेतन का सिग्नेचर उपहार—पवित्र रुद्राक्ष का पौधा भेंट किया।

















