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जय सोमनाथ: क्या आप जानते हैं सोमनाथ मंदिर का नाम कैसे पड़ा? जानिए अद्भुत कथा

सोमनाथ मंदिर केवल एक धार्मिक स्थान ही नहीं है, बल्कि यह आस्था, विश्वास और पुनर्निर्माण का प्रतीक भी है। सदियों से यह मंदिर भक्तों की श्रद्धा का केंद्र रहा है।

Written byMahak SinghMahak Singh
Jan 7, 2026, 04:58 pm IST
inभारत, गुजरात
सोमनाथ मंदिर

सोमनाथ मंदिर

भारत को मंदिरों की भूमि कहा जाता है। यहां ऐसे अनेक धार्मिक स्थल हैं, जिनका न केवल धार्मिक बल्कि ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व भी बहुत गहरा है। इन्हीं पवित्र स्थलों में से एक है सोमनाथ मंदिर, जो भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में पहला माना जाता है। यह मंदिर गुजरात राज्य के गिर सोमनाथ जिले में प्रभास क्षेत्र में स्थित है। समुद्र के किनारे स्थित यह मंदिर अपनी दिव्यता और सुंदरता के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। सोमनाथ मंदिर केवल एक धार्मिक स्थान ही नहीं है, बल्कि यह आस्था, विश्वास और पुनर्निर्माण का प्रतीक भी है। सदियों से यह मंदिर भक्तों की श्रद्धा का केंद्र रहा है। आइए सोमनाथ मंदिर की पौराणिक कथा को समझते हैं-

सोमनाथ मंदिर का पौराणिक महत्व- सोमनाथ मंदिर की कथा भगवान शिव और चंद्र देव से जुड़ी हुई है। यह कथा बहुत ही रोचक और शिक्षाप्रद है। पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन समय में राजा दक्ष की 27 पुत्रियाँ थीं। जिनमें से 26 पुत्रियों का विवाह चंद्र देव से हुआ था। लेकिन चंद्र देव अपनी सभी पत्नियों में से केवल रोहिणी के साथ ही अधिक समय बिताते थे और बाकी पत्नियों की ओर ध्यान नहीं देते थे। इस व्यवहार से राजा दक्ष की अन्य पुत्रियाँ दुखी हो गईं। उन्होंने अपने पिता राजा दक्ष से इसकी शिकायत की। राजा दक्ष ने चंद्र देव को समझाने का प्रयास किया और कहा कि सभी पत्नियों को समान प्रेम देना चाहिए। लेकिन चंद्र देव ने राजा दक्ष की बातों को अनसुना कर दिया। राजा दक्ष इससे बहुत क्रोधित हो गए और उन्होंने चंद्र देव को श्राप दे दिया। उन्होंने कहा, “तुम धीरे-धीरे अपनी चमक और शक्ति खो दोगे।”

यह भी पढ़ें- नाथों के नाथ सोमनाथ: 17 आक्रमण सह कर भी जीवंत रही आस्था

श्राप का प्रभाव- राजा दक्ष के श्राप का असर तुरंत दिखने लगा। चंद्र देव की चमक दिन-प्रतिदिन कम होने लगी। उनका शरीर कमजोर होने लगा। इसका प्रभाव केवल चंद्रमा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पृथ्वी पर भी इसका असर पड़ने लगा। चंद्रमा का सीधा संबंध समुद्र की लहरों, जल, मौसम और प्रकृति से होता है। जब चंद्र देव कमजोर होने लगे, तो पृथ्वी पर असंतुलन पैदा हो गया। समुद्र की लहरें प्रभावित होने लगीं, मौसम बिगड़ने लगा और जीव-जंतुओं पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ा। इस स्थिति से सभी देवता और ऋषि-मुनि चिंतित हो गए। वे समाधान के लिए ब्रह्मा जी के पास पहुँचे।

ब्रह्मा जी का उपाय- ब्रह्मा जी ने चंद्र देव से कहा, “आप प्रभास क्षेत्र में जाकर भगवान शिव की कठोर तपस्या करें। केवल शिव जी ही आपको इस श्राप से मुक्त कर सकते हैं।” चंद्र देव ने ब्रह्मा जी की बात मान ली और प्रभास क्षेत्र पहुँचकर भगवान शिव की तपस्या शुरू कर दी। उन्होंने वर्षों तक कठिन तपस्या की। वे लगातार भगवान शिव का ध्यान करते रहे और उनसे क्षमा माँगते रहे।

भगवान शिव की कृपा- चंद्र देव की सच्ची भक्ति और कठोर तपस्या से भगवान शिव प्रसन्न हो गए। वे प्रकट हुए और चंद्र देव को राजा दक्ष के श्राप से मुक्ति प्रदान की। भगवान शिव ने चंद्र देव को वरदान देते हुए कहा, “अब आपकी शक्ति पूरी तरह समाप्त नहीं होगी। कृष्ण पक्ष में आपकी चमक धीरे-धीरे कम होगी और शुक्ल पक्ष में फिर से बढ़ेगी। पूर्णिमा के दिन तुम्हारी चमक पूर्ण रूप से प्रकट होगी।” इसी कारण आज भी चंद्रमा की कलाएँ घटती-बढ़ती रहती हैं। अमावस्या से पूर्णिमा तक चंद्रमा बढ़ता है और पूर्णिमा से अमावस्या तक घटता है।

यह भी पढ़ें- महमूद गजनवी का भारत पर क्रूर हमला: जयपाल से सोमनाथ तक, लूटपाट और नरसंहार की कहानी

सोमनाथ नाम कैसे पड़ा- श्राप से मुक्त होने के बाद चंद्र देव अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने भगवान शिव से निवेदन किया कि वे माता पार्वती के साथ इसी स्थान पर निवास करें। भगवान शिव ने चंद्र देव की प्रार्थना स्वीकार कर ली और वहीं विराजमान हो गए। चंद्र देव ने इस स्थान पर शिवलिंग की स्थापना की। क्योंकि चंद्रमा को ‘सोम’ कहा जाता है और भगवान शिव को ‘नाथ’, इसलिए इस ज्योतिर्लिंग का नाम पड़ा- सोमनाथ।

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Mahak Singh
Mahak Singh
2022 में ज़ी न्यूज़ से पत्रकारिता की शुरुआत की। उसके बाद न्यूज़ नेशन, दैनिक जागरण और न्यूज़ 24 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य करते हुए पत्रकारिता के विभिन्न आयामों का अनुभव प्राप्त किया। वर्तमान में पाञ्चजन्य में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं। ज़िमा ज़ी इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया आर्ट्स से मैने पत्रकारिता की है। [Read more]
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