सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में शामिल हुए CM माझी, बोले- सोमनाथ मंदिर 140 करोड़ भारतीयों का आत्मसम्मान का प्रतीक
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सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में शामिल हुए CM माझी, बोले- सोमनाथ मंदिर 140 करोड़ भारतीयों का आत्मसम्मान का प्रतीक

सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सोमवार को लिंगराज मंदिर स्थित एकाम्र क्षेत्र में 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' आध्यात्मिक वातावरण में मनाया गया।

Written byडॉ. समन्वय नंदडॉ. समन्वय नंद — edited by Lalit Fulara
May 11, 2026, 04:01 pm IST
in ओडिशा

भुवनेश्वर: सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सोमवार को लिंगराज मंदिर स्थित एकाम्र क्षेत्र में ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ आध्यात्मिक वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए मोहन चरण माझी ने अपने संबोधन में सोमनाथ और लिंगराज के बीच मौजूद गहरे और अदृश्य आध्यात्मिक संबंध पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यदि सोमनाथ भारत के पश्चिम का प्रहरी है, तो लिंगराज पूर्व की अडिग शक्ति का प्रतीक है।

एकाम्र पीठ में उस समय विशेष आध्यात्मिक माहौल देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने गुजरात के प्रभास पाटन स्थित सोमनाथ मंदिर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा आयोजित भव्य समारोह का सीधा प्रसारण देखा। गुजरात से श्री सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संबोधन एवं पूजा-अर्चना कार्यक्रम को मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने श्रद्धापूर्वक देखा और लिंगराज पीठ के श्रद्धालुओं के साथ उस आध्यात्मिक क्षण को साझा किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने अपने उद्बोधन में भारतीय संस्कृति की रक्षा तथा शैव पीठों के विकास पर विशेष जोर देते हुए सोमनाथ मंदिर के संघर्षपूर्ण इतिहास का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल द्वारा भारतीय सभ्यता के पुनर्स्थापन की ऐतिहासिक शुरुआत थी, और आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत सांस्कृतिक पुनर्जागरण के नए युग में प्रवेश कर रहा है। इतिहास के पन्नों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आक्रमणकारियों ने कई बार मंदिरों को ध्वस्त कर भारत की आत्मा को मिटाने का प्रयास किया, लेकिन सनातन आस्था की अमिट शक्ति के कारण यह परंपरा हर बार पुनर्जीवित होकर और अधिक दृढ़ता के साथ उभरी है।

वर्ष 1951 की ऐतिहासिक घटना का स्मरण करते हुए मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल के दृढ़ संकल्प के कारण ही सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण संभव हो सका था। उन्होंने तत्कालीन राजनीतिक बाधाओं और तथाकथित सेकुलरिज्म के नाम पर हुए विरोध की आलोचना करते हुए कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ‘नया भारत’ अपनी सांस्कृतिक पहचान पर गर्व कर रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का ‘विकास भी, विरासत भी’ मंत्र आज काशी विश्वनाथ कॉरिडोर से लेकर राम मंदिर के भव्य निर्माण तक स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रहा है।

ओडिशा के विकास के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार राज्य की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को सुदृढ़ बनाने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘विकास भी, विरासत भी’ नीति के अनुरूप ओडिशा सरकार 330 करोड़ रुपये के निवेश से एकाम्र क्षेत्र के विकास तथा 1000 करोड़ रुपये की लागत से श्री जगन्नाथ संग्रहालय जैसी परियोजनाओं को आगे बढ़ा रही है। मुख्यमंत्री माझी ने कहा कि ये परियोजनाएँ ओडिशा को भारत की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने आगे कहा कि ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ अर्थात संस्कृति आधारित अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करते हुए पर्यटन के माध्यम से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करना उनकी सरकार का प्रमुख लक्ष्य है।

अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने सरदार वल्लभ भाई पटेल के साहस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदृष्टि को प्रेरणा बताते हुए साढ़े चार करोड़ ओड़िया नागरिकों से ‘समृद्ध ओडिशा’ और ‘विकसित भारत’ के निर्माण हेतु एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया। इस अवसर पर राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण और शैव पीठों की महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब भारत का आत्मसम्मान संकट में था, तब सोमनाथ मंदिर एक प्रकाश स्तंभ की तरह दृढ़ता से खड़ा रहा। उन्होंने कहा कि हमारी धरती के प्रत्येक पत्थर में इतिहास, आस्था और आत्मविश्वास की अमिट गाथा छिपी हुई है।

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