अस्मिता पर हमले ने भड़काई आग
October 2, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत छत्तीसगढ़

अस्मिता पर हमले ने भड़काई आग

ईसाई मिशनरियां न सिर्फ जबरन कन्वर्जन कर रही हैं, बल्कि भाई को भाई से लड़ाकर हिंदू जनजातीय समाज को तोड़ रही हैं। इसका स्पष्ट उदाहरण कांकेर जिले के आमाबेड़ा गांव की घटना है। इस घटना ने समाज के गुस्से को भड़का दिया है

Written byअरविंद कुमार मिश्राअरविंद कुमार मिश्रा
Dec 31, 2025, 04:46 am IST
inछत्तीसगढ़

ईसाई मिशनरियां जबरन कन्वर्जन ही नहीं कर रहीं, बल्कि हिंदू समाज की एकजुटता को तहस-नहस करने के साथ-साथ भाई-भाई को आपस में लड़ाने का षड्यंत्र भी रच रही हैं। इसका ताजा उदाहरण है छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के आमाबेड़ा गांव की घटना। यह घटना यह बताने के लिए काफी है कि मिशनरियां परिवारों के बीच फांक ही नहीं पैदा कर रही हैं, बल्कि पूरे जनजातीय समाज को एक-दूसरे के विरुद्ध खड़ा कर रही हैं। इसे लेकर समाज में आक्रोश बढ़ रहा है, जिसकी परिणति 24 दिसंबर को बड़े विरोध प्रदर्शन के रूप में दिखी।

दरअसल, आमाबेड़ा गांव के जनजातीय परिवार के एक सदस्य चमरा राम सलाम, जो इसाई बन चुका था, की कांकेर के जिला अस्पताल में 15 दिसंबर की शाम मृत्यु हो गई। उसका बेटा राजमन सलाम भी कन्वर्टेड ईसाई है और भीम आर्मी का जिला अध्यक्ष होने के साथ सरपंच भी है। राजमन पिता का शव लेकर गांव पहुंचा। भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं और स्थानीय ईसाई मिशनरियों की मौजूदगी में शव को श्मशान में दफनाने की तैयारी शुरू हो गई। जब गांव वालों को अवैध तरीके से शव दफनाने की जानकारी मिली तो उन्होंने आपत्ति जताई। ग्रामीणों का कहना था कि गांव के श्मशान जनजातीय परंपराओं के अनुसार संचालित होते हैं। ऐसे में जनजातीय समाज की जमीन पर दूसरे ‘रिलीजन’ के लोगों का शव दफनाना उनकी अस्मिता, पूजा पद्धति, परंपराओं, मूल्यों तथा संवैधानिक अधिकार के विरुद्ध है।

जब विवाद बढ़ा तो 16 दिसंबर को ग्राम सभा ने मानवीय आधार पर जनजातीय समाज की रीति-नीति के अनुसार शव के अंतिम संस्कार की अनुमति दे दी। ग्राम सभा का कहना था कि चूंकि मृतक पूर्व में जनजातीय समाज का हिस्सा था, इसलिए उसका अंतिम संस्कार यदि जनजातीय रीति-रिवाज से होता है, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी। लेकिन दूसरे पक्ष को यह मंजूर नहीं था। पास्टर और भीम आर्मी से जुड़े लोगों ने मृतक के परिवार को उकसा कर जबरन शव को निजी भूमि में ईसाई रीति-रिवाज से दफना दिया।

छत्तीसगढ़ में कांकेर जिले के आमाबेड़ा गांव में दूसरे जिलों से आई ईसाई मिशनरियों व भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने उपद्रव किया

रातों रात बना दिया चबूतरा

इसका स्थानीय लोगों ने विरोध किया। इस बीच, आश्चर्यजनक रूप से आसपास के जिलों से बाहरी तत्वों की भारी भीड़ जुटाई गई, जो इस ‘अंतिम संस्कार’ को एक राजनीतिक मंच में बदलने का प्रयास कर रही थी। यह भीड़ न केवल संदिग्ध थी, बल्कि हिंदू जनजातीय परंपराओं के विरुद्ध ईसाई रिवाज थोपने का प्रयास कर रही थी। विवाद बढ़ा तो 16 दिसंबर की रात स्थानीय प्रशासन के लोग पहुंचे। एसडीएम ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि सुबह शव हटाने की कार्रवाई की जाएगी। रात भर पुलिस बल भी तैनात रहा, लेकिन रातों-रात श्मशान में पक्का चबूतरा बना दिया गया। अगले दिन सुबह आमाबेड़ा, बड़ेतेवड़ा के लोग श्मशान पहुंचे और चबूतरा बना देखा तो विरोध किया। इसके बाद 500 से अधिक लोगों की भीड़ ने उन पर हमला कर दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि बाहर से आए लोगों और भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने गांव वालों पर जानलेवा हमला किया। इसमें 50 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। 18 दिसंबर को बड़ी संख्या में आमाबेड़ा और बड़ेतेवड़ा में सर्व समाज के लोग पहुंचे और प्रशासन से अवैध तरीके से दफनाए गए शव को निकालने की मांग की। प्रशासन की उपस्थिति में शव निकालने की प्रक्रिया शुरू हुई तो भीम आर्मी से जुड़े लोगों ने पथराव शुरू कर दिया। गांव वालों का कहना है कि इस दौरान पुलिस की भूमिका संदिग्ध रही।

क्या कहता है कानून

इस संदर्भ में संविधान की पांचवीं अनुसूची के प्रावधान अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यह अनुसूची अनुसूचित क्षेत्रों (जैसे छत्तीसगढ़ के जनजातीय इलाके) में ग्राम सभा को सर्वोच्च अधिकार प्रदान करती है। इसके अनुसार, निजी या गैर-पंजीकृत भूमि का उपयोग कफन-दफन के लिए निषिद्ध है, जब तक कि स्थानीय ग्राम सभा द्वारा स्पष्ट अनुमति न दी जाए। बिना ग्राम सभा की सहमति के कोई भी अंतिम संस्कार वैध नहीं माना जाता है।

सर्वोच्च न्यायालय और मद्रास उच्च न्यायालय ने भी अपने फैसलों में स्पष्ट किया है कि ईसाई व्यक्ति का शव उनके लिए निर्धारित स्थान (ईसाई कब्रिस्तान) में ही दफनाया जा सकता है। गांव की सामान्य भूमि या श्मशान पर दावा करना कानूनी रूप से अमान्य है। इसी तरह, बिलासपुर उच्च न्यायालय ने ऐसे ही एक मामले में ईसाई व्यक्ति की याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें उसने अपने मृत पिता का अंतिम संस्कार गांव के आम कब्रिस्तान में करने की अनुमति मांगी थी। अदालत ने ग्राम सभा की सहमति और पांचवीं अनुसूची के उल्लंघन को आधार बनाते हुए इसे अस्वीकार कर दिया था। ये प्रावधान हिंदू जनजातीय परंपराओं की रक्षा करते हुए सुनिश्चित करते हैं कि बाहरी तत्व या कन्वर्टेड व्यक्ति ग्राम सभा की इच्छा के विरुद्ध स्थानीय भूमि का दुरुपयोग न कर सकें। आमाबेड़ा मामले में भी यही कानूनी सत्यापन आवश्यक है, ताकि मिशनरी साजिशें परंपराओं को कुचल न सकें।

लगातार बढ़ रहे मामले

आमाबेड़ा की घटना कोई अपवाद या पहली घटना नहीं है। इससे पूर्व भी छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों में इस तरह की घटनाएं घट चुकी हैं। ईसाई मिशनरियों द्वारा कन्वर्जन और स्थानीय परंपराओं के उल्लंघन की प्रवृत्ति लगातार सामने आ रही है, जिसका दुष्परिणाम पूरे सर्व समाज को भुगतना पड़ रहा है। इससे प्रदेश में सामाजिक संतुलन एवं सौहार्द गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है। एक आंकड़े के अनुसार, छत्तीसगढ़ में ईसाई जनसंख्या 2001 में 4.01 लाख थी, जो 2011 में बढ़कर 4.90 हो गई। प्रदेश में चर्चों की संख्या का कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है, लेकिन 5 लाख ईसाई आबादी वाले राज्य में 150 से अधिक चर्च बन चुके हैं और सौ से अधिक प्रार्थना केंद्र हैं। खास बात यह है कि कन्वर्जन की सर्वाधिक गतिविधियां जनजातीय समाज के बीच हुई हैं। सरगुजा और बस्तर संभाग में जनजातीय समाज को निशाना बनाकर कन्वर्जन किया गया। जशपुर जिले की तो कुल जनसंख्या का 22 प्रतिशत ईसाई आबादी है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नारायणपुर के भूमियाबेड़ा, तेरदुल, घुमियाबेड़ा, चिपरेल, कोहड़ा, ओरछा, गुदाड़ी जैसे अनेक गांव ईसाई बहुल हो चुके हैं। अब स्थिति यह है कि प्रदेश के सतनामी, साहू, देवांगन, चंद्राकर समेत अनेक शांतिप्रिय समाज के लोगों को भी कन्वर्जन का शिकार बनाया जा रहा है।

आरक्षण की मलाई

कन्वर्जन के इस खेल में जुटी ताकतें जनजातीय परिवारों को उनकी आस्था और पूजा पद्धति से अलग करती हैं। खास बात यह है कि कन्वर्जन के बाद ‘क्रिप्टो क्रिश्चियन’ का चलन भी तेजी से बढ़ रहा है। इसमें कन्वर्टेड व्यक्ति उपासना पद्धति तो ईसाइयत वाली अपनाता है, लेकिन नाम हिंदू ही रखता है। आरक्षण का लाभ लेने के लिए वह खुद को जनजातीय बताता है। ऐसे लोगों को आरक्षण का लाभ न मिले, इसके लिए ‘डीलिस्टिंग’ की मांग भी लंबे समय से जनजातीय बहुल राज्यों में हो रही है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने हाल ही में इस मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अपने फैसले में न्यायालय ने कहा कि हिंदू धर्म छोड़कर ईसाई या किसी अन्य मत-मजहब को अपनाने वाले व्यक्ति को अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा। यह लाभ सिर्फ हिंदू धर्म के लोगों को ही मिलेगा। धर्म बदलने के बाद भी अनुसूचित जाति का लाभ लेना, संविधान के साथ धोखा है। न्यायालय ने इसे गंभीर मुद्दा बताते हुए इस पर कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

हिंदू समाज के लिए खतरे की घंटी

यह घटना ‘पाञ्चजन्य’ द्वारा लंबे समय से उठाए जा रहे मुद्दे को प्रमाणित करती है कि कन्वर्जन गतिविधियां अब केवल पांथिक नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक विभाजन का हथियार बन चुकी हैं। एक भाई को दूसरे भाई के विरुद्ध खड़ा करने वाली यह प्रक्रिया जनजातीय परिवारों को उनके मूल हिंदू संस्कृति से काट रही है। राजमन सलाम जैसे कन्वर्टेड लोग सरपंच और भीम आर्मी जैसे संगठनों के माध्यम से स्थानीय सत्ता हथियाने के बाद अब मिशनरियों के इशारों पर नाच रहे हैं। बाहरी तत्वों की यह संगठित भीड़ साबित करती है कि पीछे मिशनरी फंडिंग और राजनीतिक संरक्षण का हाथ है, जो हिंदू समाज को कमजोर करने का लक्ष्य रखे हुए है। ऐसी घटनाएं छत्तीसगढ़ जैसे जनजातीय बहुल क्षेत्रों में तेजी से फैल रही हैं, जहां मिशनरी लॉलीपॉप के नाम पर गरीब जनजातीय लोगों को लुभाकर कन्वर्ट कर रही हैं। परिणामस्वरूप परिवार टूट रहे हैं, भाई-भाई लड़ रहे हैं और गांवों में वैमनस्यता पनप रही है।

‘पाञ्चजन्य’ हमेशा से चेतावनी देता आया है कि यह ‘लव जिहाद’ का ईसाई संस्करण है, जिसमें अंतिम संस्कार तक परंपराओं को तोड़ने की साजिश रची जाती है। सरकार को कन्वर्जन विरोधी कठोर कानूनों को सख्ती से लागू करना होगा, ताकि मिशनरी षड्यंत्रों पर लगाम लगे।

Topics: सामाजिक वैमनस्यताअरविंद मिश्रापाञ्चजन्य  विशेषजनजातीय समाजईसाई मिशनरियांजबरन धर्मांतरणअस्मिता पर हमलापरंपरा और रीति-नीतिषड्यंत्र / साजिशडीलिस्टिंग की मांग
अरविंद कुमार मिश्रा
अरविंद कुमार मिश्रा
पत्रकारिता के क्षेत्र में विगत 16 वर्षों से सक्रिय. ज़ी 24 घंटे छत्तीसगढ़, TV9 महाराष्ट्र, इंडिया टीवी, ज़ी मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़, ज़ी न्यूज़, हिंदुस्तान समाचार पत्र, इंद्रप्रस्थ संवाद में कार्य करने का अवसर मिला. दैनिक जागरण, स्वदेश, दैनिक भास्कर, पत्रिका, नवभारत टाइम्स, आज, स्टार समाचार जैसे अनेक समाचार पत्रों में ऊर्जा एवं पर्यावरण पर लेखन. [Read more]
Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

प्रतीकात्मक चित्र

भारत में जनसांख्यिकी परिवर्तन एवं घटती हिंदू जनसंख्या

विदेशी अंशदान का नियमन : आज के समय की आवश्यकता

न्यूयॉर्क में सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत का स्वागत करते भारतीय समुदाय के लोग

‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ : संवाद और सवाल!

विभाजन की विभीषिका : …तो विराट होता भारत का सामर्थ्य

जालंधर निवासी सरदार अमरजीत सिंह 1947 में पाकिस्तान में छूट गई अपनी बहन को गले लगाते हुए दिख रहे हैं। 2022 में करतारपुर साहिब में वर्षों बाद दोनों भाई—बहन मिले, तो अश्रुधारा बहने लगी। अब उनकी बहन एक मुसलमान परिवार का हिस्सा है।

विभाजन की विभीषिका : पीढ़ियों तक सताएगी यह पीड़ा

राष्ट्रधर्म,
देशभक्ति,
देशरक्षा,
राष्ट्रहित
पुण्य,
नागरिक कर्तव्य,
सशक्त भारत,
एकजुटता,
व्यक्तिगत धर्म, main, featured, पाञ्चजन्य विशेष, आज का संस्कृत श्लोक

आज का श्लोक- संचित पुण्य भी देश रक्षा के पलड़े को नहीं उठा पाएंगे

Load More

ताज़ा समाचार

बांग्लादेश में अवामी लीग पर बड़ा दमनचक्र: नेताओं पर ताबड़तोड़ छापे और गिरफ्तारियां, न्याय या राजनीतिक प्रतिशोध?

डॉ. भीमराव अंबेडकर के आर्थिक विचार: कृषि, उद्योग और RBI से लेकर सामाजिक न्याय तक, आज क्यों प्रासंगिक हैं बाबा साहेब?

Asian Games 2026 India 6 Gold Medals Women Hockey Lovlina Borgohain Parveen Hooda Panchjanya Sports

2026 एशियाई खेल: स्वर्ण पदकों की लगी झड़ी, शान से लहराया तिरंगा, बेटियों ने हॉकी, तीरंदाजी और मुक्केबाजी में रचा इतिहास

RSS Chief Dr Mohan Bhagwat Statement Borivali Mumbai Rashtra And Dharm Panchjanya News

भारतीय ज्ञान संपदा की संपूर्ण विश्व को जरुरत: बोरीवली में बोले सरसंघचालक जी- ‘भारत की ओर उम्मीद से देख रही दुनिया’

कल का मौसम: 3 अक्टूबर को देश के किन राज्यों में होगी बारिश, मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट

PM मोदी से बोले कैप्टन मच्छार- हनुमानजी ने बचा लिया, जब भी दर्द में होता हूं ‘हनुमान चालीसा’ पढ़ता हूं

चित्र प्रतीकात्मक

उजड़ता पंजाब: 6 महीने में मां ने खोया दूसरा बेटा! नशे की ओवरडोज से सुनाम में युवक की मौत, परिजनों में हाहाकार

सांकेतिक चित्र

पंजाब बॉर्डर पर BSF की बड़ी कार्रवाई: तरनतारन में घुसपैठ कर रहे 2 पाकिस्तानी तस्कर ढेर, 1 अंधेरे का फायदा उठाकर फरार!

Rampur Tiraha Kand CM Pushkar Singh Dhami Tributes Uttarakhand State Activists Statue Panchjanya

रामपुर तिराहा सभा में CM धामी का बड़ा ऐलान: गांवों में लगेंगी आंदोलनकारियों की मूर्तियां, ई-लाइब्रेरी का होगा निर्माण!

Akhil Bharatiya Vyas Sangh Kashi National Convention Jagadguru Balak Devacharya Panchjanya

काशी में गरजा व्यास संघ: कन्वर्जन के खिलाफ राष्ट्रव्यापी अभियान का ऐलान, Gen Z को राम भक्ति से जोड़ने का प्रस्ताव!

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies