वाराणसी । भगवान राम के चरित्र को घर-घर तक कथाओं के माध्यम से पहुंचाने वाले व्यास अब केवल धर्म ही नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा को लेकर भी चिंतित हैं। अखिल भारतीय व्यास संघ के तत्वावधान में काशी के प्राचीन पातालपुरी मठ में आयोजित राष्ट्रीय अधिवेशन में धर्मांतरण समेत विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई और 14 प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए।
अखिल भारतीय व्यास संघ के राष्ट्रीय अधिवेशन का शुभारंभ
व्यास संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगद्गुरु बालक देवाचार्य जी महाराज ने दीप प्रज्ज्वलित कर राष्ट्रीय अधिवेशन का शुभारंभ किया। इसके बाद संघ के महामंत्री दिनेश त्रिपाठी ने विभिन्न विषयों पर चर्चा के लिए अधिवेशन के अध्यक्ष से अनुमति मांगी।
कन्वर्जन के मुद्दे पर सदस्यों ने जताई चिंता
कन्वर्जन के मुद्दे पर चर्चा शुरू होते ही व्यास संघ के सदस्यों ने इस पर चिंता जताई। सदस्यों ने आरोप लगाया कि लंबे समय से संगठित रूप से कन्वर्जन कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कन्वर्जन को रोकने के लिए बस्तियों में जाने वाले कार्यकर्ताओं के खिलाफ ही मुकदमे दर्ज कर दिए जाते हैं। अधिवेशन में सभी सदस्यों ने कन्वर्जन कराने वालों के खिलाफ सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया। संघ ने गांव स्तर पर समितियों के गठन और कन्वर्जन के खिलाफ देशभर में अभियान चलाने की घोषणा की।
सनातन धर्म के अपमान पर जगद्गुरु बालक देवाचार्य ने कही यह बात
अधिवेशन के अध्यक्ष जगद्गुरु बालक देवाचार्य जी महाराज ने कहा कि सनातन धर्म का अपमान करना दुनिया का सबसे आसान काम बन गया है। उन्होंने कहा कि फिल्म अभिनेता, नेता और वामपंथी विचारधारा से जुड़े लोग सनातन धर्म के खिलाफ बोलने और उसका अपमान करने को अभिव्यक्ति की आजादी मानते हैं।
उन्होंने कहा कि व्यास अपनी कथाओं में धर्म का अपमान करने वालों के नाम लेकर लोगों को जागरूक करेंगे।
Gen Z को धर्म, संस्कृति और राष्ट्रवाद से जोड़ने का प्रस्ताव
व्यास संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगद्गुरु बालक देवाचार्य जी ने कहा, “हम जेन जी (Gen Z) को नजरअंदाज नहीं कर सकते। कथावाचकों का काम केवल कथा सुनाना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी को भारत की महान संस्कृति से जोड़ना भी है। जेन जी को धर्म, संस्कृति और राष्ट्रवाद से जोड़ने का प्रस्ताव है और अब इसका क्रियान्वयन किया जाना है। युवा शक्ति को राम भक्ति की ओर ले जाना होगा।”
व्यास संघ द्वारा पारित प्रमुख प्रस्ताव
व्यास संघ द्वारा पारित प्रमुख प्रस्ताव इस प्रकार हैं –
- धर्म के साथ देश की सुरक्षा को लेकर चिंता।
- प्रत्येक कार्यक्रम में वंदे मातरम् को अनिवार्य करने का प्रस्ताव।
- संस्कृति, परंपरा और संस्कार से जोड़ने की नीति पर चर्चा।
- गो-पालन एवं संरक्षण का प्रस्ताव।
- व्यास संघ के विस्तार का प्रस्ताव।
- कन्वर्जन प्रभावित क्षेत्रों एवं जातियों के बीच संवाद।
- कथा में आने के लिए धर्म और जाति के भेद को समाप्त करने पर चर्चा।
- हिन्दू धर्मग्रंथों एवं देवी-देवताओं पर अभद्र टिप्पणी एवं अपमान के खिलाफ प्रस्ताव।
- Gen Z को धर्म, संस्कृति और राष्ट्रवाद से जोड़ने का प्रस्ताव।
- संयुक्त परिवार को प्रोत्साहित करने का प्रस्ताव।
- बिछड़े भाइयों को मिलाने की योजना पर कार्य।
- नारी शक्ति वंदन के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करने का प्रस्ताव।
- श्रीराम संस्कृति से जोड़ने के लिए टोलियों के गठन का प्रस्ताव।
- कथाओं में स्वतंत्रता संग्राम के महानायकों पर चर्चा।
सर्वसम्मति से पारित हुए प्रस्ताव
इन सभी प्रस्तावों पर सर्वसम्मति बनने के बाद उन्हें पारित कर दिया गया। अखिल भारतीय व्यास संघ ने सभी प्रस्तावों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी प्रेषित किया है।













